हैदराबाद बिरयानी टैक्स चोरी: ₹70,000 करोड़ का महाघोटाला,
हैदराबाद बिरयानी टैक्स चोरी का यह मामला आज देश की सबसे बड़ी वित्तीय सुर्खियों में शुमार हो चुका है। आयकर विभाग (I-T Department) ने हैदराबाद की कुछ मशहूर बिरयानी चेन पर जब एक नियमित जांच शुरू की थी, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि यह धागा ₹70,000 करोड़ के एक विशाल राष्ट्रव्यापी फर्जी बिलिंग घोटाले तक ले जाएगा।
आज 19 फरवरी 2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, जांचकर्ताओं ने पाया कि ये लोकप्रिय बिरयानी आउटलेट्स केवल भोजन नहीं बेच रहे थे, बल्कि काले धन को सफेद करने और फर्जी खर्चों के जरिए भारी टैक्स बचाने के एक बड़े सिंडिकेट का हिस्सा थे। यह जांच अब केवल हैदराबाद तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसके तार मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं, जिसने भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है।
बिरयानी की प्लेट और फर्जी बिलों का खेल: कैसे अधिकारियों को दिया गया चकमा?
इस घोटाले की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। हैदराबाद बिरयानी टैक्स चोरी की गहराई में जाने पर पता चला कि ये रेस्टोरेंट्स दोहरी अकाउंटिंग प्रणाली का उपयोग कर रहे थे। एक ओर जहाँ ग्राहकों को हाथ से बने या कच्चे बिल दिए जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर कागजों पर फर्जी वेंडर्स से करोड़ों रुपये की खरीदारी दिखाई जा रही थी।
अधिकारियों ने पाया कि मांस, चावल और मसालों की आपूर्ति के लिए जिन कंपनियों के नाम इस्तेमाल किए गए, वे हकीकत में अस्तित्व में ही नहीं थीं। इन ‘शेल कंपनियों’ के जरिए फर्जी खर्च दिखाकर मुनाफे को कम किया गया, जिससे सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपये के टैक्स का चूना लगाया गया। यह तकनीक इतनी सटीक थी कि वर्षों तक किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया।
रूटीन रेड से ‘पेंडोरा बॉक्स’ तक: आईटी विभाग की वो छापेमारी जिसने सबको चौंका दिया
आयकर विभाग ने शुरुआत में इसे एक सामान्य सर्वे के रूप में शुरू किया था। हैदराबाद के कुछ पॉश इलाकों में स्थित बिरयानी आउटलेट्स पर जब अधिकारियों ने अपनी टीम भेजी, तो वहां रखे डिजिटल रिकॉर्ड्स और गुप्त लेजर बुक्स ने इस हैदराबाद बिरयानी टैक्स चोरी के असली चेहरे को बेनकाब कर दिया।
छापेमारी के दौरान कई ऐसे पेन ड्राइव और हार्ड डिस्क बरामद हुए जिनमें 70,000 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का ब्योरा था। इन दस्तावेजों से संकेत मिले कि यह घोटाला केवल रेस्टोरेंट सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई रियल एस्टेट डेवलपर्स और ज्वेलर्स भी शामिल हैं, जो बिरयानी चेन के जरिए अपने कैश को ठिकाने लगा रहे थे। इस ‘पेंडोरा बॉक्स’ के खुलने से अब पूरे देश के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में डर का माहौल है।
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70,000 करोड़ का आंकड़ा: क्या यह भारत का सबसे बड़ा ‘फूड सेक्टर’ स्कैम है?
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, घोटाले की रकम बढ़ती जा रही है। शुरुआती अनुमान कुछ सौ करोड़ का था, लेकिन अब यह हैदराबाद बिरयानी टैक्स चोरी का मामला ₹70,000 करोड़ तक पहुँच गया है। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक शहर की बात नहीं है, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है जो पूरे भारत में फैला हुआ है।
इस नेटवर्क ने जीएसटी (GST) और आयकर की चोरी के लिए एक ऐसा इकोसिस्टम बनाया था जहाँ हर स्तर पर फर्जी इनवॉइस जनरेट किए जा रहे थे।
विशेषज्ञ इसे भारत के खाद्य उद्योग के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला मान रहे हैं, क्योंकि इसमें शामिल राशि कई बड़े राज्यों के वार्षिक बजट के बराबर है। यह स्कैम डिजिटल इंडिया के दौर में मैनुअल और तकनीकी खामियों के दुरुपयोग का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है।
जेन-जी और मिलेनियल्स के बीच रोष: पसंदीदा ‘फूड डेस्टिनेशन’ पर उठा सवाल
हैदराबाद बिरयानी केवल एक व्यंजन नहीं है, बल्कि यह एक भावना है, विशेष रूप से युवाओं के लिए। हैदराबाद बिरयानी टैक्स चोरी की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर ‘बिरयानी गेट’ जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। लोग इस बात से निराश हैं कि जिन ब्रांड्स पर वे सालों से भरोसा कर रहे थे, वे इस तरह के अनैतिक कार्यों में संलिप्त थे।
कई इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर्स और फूड ब्लॉगर्स ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, क्योंकि वे अक्सर इन रेस्टोरेंट्स को प्रमोट करते थे। युवाओं का कहना है कि वे जो कीमत चुका रहे थे, वह न केवल भोजन की थी बल्कि उस भरोसे की भी थी जो अब टूट चुका है। यह आक्रोश केवल टैक्स चोरी को लेकर नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था को लेकर है जहाँ बड़े कॉर्पोरेट घराने जनता की आंखों में धूल झोंकते हैं।
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जांच का दायरा बढ़ा: ईडी (ED) और सीबीआई की एंट्री की संभावना
आयकर विभाग की शुरुआती सफलता के बाद, अब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के शामिल होने की पूरी संभावना है, क्योंकि इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता सबूत मिले हैं। हैदराबाद बिरयानी टैक्स चोरी के इस मामले में विदेशी फंडिंग और हवाला के जरिए पैसे को बाहर भेजने के संकेत भी मिले हैं।
सूत्रों का कहना है कि कुछ बिरयानी चेन के प्रमोटर्स ने खाड़ी देशों में भारी निवेश किया है, जिसका कोई कानूनी रिकॉर्ड नहीं है। सीबीआई भी इस एंगल से जांच कर सकती है कि क्या इसमें कुछ बैंक अधिकारियों या सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत थी। अगर ऐसा होता है, तो यह मामला आने वाले महीनों में कई रसूखदार लोगों की गिरफ्तारी का कारण बन सकता है, जिससे राजनीति और व्यापार जगत में हड़कंप मच जाएगा।
रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पर असर: क्या अब बिरयानी खाना महंगा हो जाएगा?
इस बड़े खुलासे के बाद अब रेस्टोरेंट उद्योग पर निगरानी और सख्त होने वाली है। सरकार अब डिजिटल पेमेंट को अनिवार्य करने और हर लेनदेन के लिए पक्का बिल सुनिश्चित करने की दिशा में नए नियम ला सकती है। हैदराबाद बिरयानी टैक्स चोरी कांड के बाद कई ईमानदार रेस्टोरेंट मालिकों को डर है कि उन पर भी अविश्वास की गाज गिर सकती है।
इसके अलावा, टैक्स चोरी के इस बड़े अंतर को पाटने के लिए सरकार सख्ती बरतेगी, जिसका सीधा असर बिरयानी की कीमतों पर पड़ सकता है। यदि रेस्टोरेंट्स को अपनी हर एक पाई का हिसाब देना पड़ा, तो वे अपने खर्चों को मैनेज करने के लिए मेनू की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। यह आम आदमी की जेब पर एक और वार होगा, जो पहले ही महंगाई से जूझ रहा है।
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स्वाद के पीछे छिपा भ्रष्टाचार और हमारी सामूहिक जिम्मेदारी
अंततः, हैदराबाद बिरयानी टैक्स चोरी का यह मामला हमें याद दिलाता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें हमारी थाली तक पहुँच चुकी हैं। यह केवल सरकारी राजस्व की हानि नहीं है, बल्कि यह उस नैतिकता का पतन है जिस पर एक समाज टिका होता है। 70,000 करोड़ रुपये का यह घोटाला हमारी शासन व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है, जहाँ एक सामान्य दिखने वाली बिरयानी की दुकान देश की अर्थव्यवस्था को चुनौती दे सकती है।
अब समय आ गया है कि उपभोक्ता के तौर पर हम भी जागरूक बनें और पक्का बिल मांगने की आदत डालें। यह जांच केवल दोषियों को सजा देने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इससे एक ऐसी पारदर्शी व्यवस्था का निर्माण होना चाहिए जहाँ कोई भी ‘स्वाद’ के नाम पर ‘साजिश’ न कर सके।
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