दुनिया का सबसे बड़ा AI समिट: अश्विनी वैष्णव ने मांगी माफी, बनाया वॉर रूम
दुनिया का सबसे बड़ा AI समिट होने का गौरव हासिल करने वाला ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ अपने शुरुआती दौर में ही विवादों और उपलब्धियों के अनोखे संगम का गवाह बन गया है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने समिट के पहले दिन हुई भारी अव्यवस्था, भीड़ और तकनीकी दिक्कतों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है।
उन्होंने स्वीकार किया कि उम्मीद से कहीं ज्यादा भीड़ जुटने के कारण लॉजिस्टिक चुनौतियां पैदा हुईं, जिन्हें हल करने के लिए मंत्रालय ने अब एक ‘वॉर रूम’ स्थापित कर दिया है। वैष्णव ने साफ किया कि सरकार फीडबैक के प्रति पूरी तरह सजग है और आने वाले दिनों में आयोजन को और अधिक सुचारू बनाया जाएगा।
यह समिट ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला अपनी तरह का पहला वैश्विक आयोजन है, जिसमें दुनिया भर के 100 से अधिक देश और दिग्गज टेक लीडर्स हिस्सा ले रहे हैं।
70 हजार की भीड़ और ‘मिसमैनेजमेंट’: भारत मंडपम में क्यों मचा बवाल?
भारत मंडपम में आयोजित इस मेगा इवेंट के दूसरे दिन 70,000 से अधिक लोगों ने शिरकत की, लेकिन पहले दिन की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर ‘मैनेजमेंट फेलियर’ की बहस छेड़ दी। स्टार्टअप फाउंडर्स और प्रतिनिधियों ने घंटों लंबी कतारों, खराब मोबाइल नेटवर्क और आयोजन स्थल पर बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायत की।
कुछ कंपनियों ने तो यहाँ तक आरोप लगाया कि पीएम मोदी के दौरे से पहले सुरक्षा जांच के दौरान उनके स्टॉल से कीमती सामान चोरी हो गया। नियोसैपियन (Neosapien) के फाउंडर धनंजय यादव ने ‘X’ पर अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि हाई-सिक्योरिटी जोन होने के बावजूद उनके वियरेबल्स (Wearables) गायब हो गए।
इस अव्यवस्था ने उन युवाओं और टेक प्रोफेशनल्स को निराश किया जो बड़े उत्साह के साथ इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनने आए थे।
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पीएम मोदी का 2047 विजन: एआई सुपरपावर बनने की दिशा में भारत के कदम
विवादों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के भविष्य का एक बेहद महत्वाकांक्षी खाका पेश किया है। पीएम मोदी ने समिट के दौरान स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य भारत को दुनिया की टॉप 3 ‘AI सुपरपावर’ में शामिल करना है।
उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को रेखांकित करते हुए कहा कि AI केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि विकास की रफ़्तार बढ़ाने वाला ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ है। पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को केवल तकनीक का उपभोक्ता (Consumer) नहीं, बल्कि इसका निर्माता (Creator) बनना होगा।
उनका यह विजन शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों में एआई के समावेश पर आधारित है, जिससे शहरी और ग्रामीण भारत के बीच की खाई को पाटा जा सके।
$400 बिलियन का आईटी सेक्टर: क्या एआई बदल देगा नौकरियों का भविष्य?
आईटी सेक्टर को लेकर प्रधानमंत्री ने एक बड़ी भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक भारतीय आईटी उद्योग को विस्थापित करने के बजाय उसे नया रूप देगी और साल 2030 तक यह सेक्टर 400 बिलियन डॉलर के आंकड़े को छू सकता है। युवाओं की नौकरी जाने की चिंताओं को दूर करते हुए उन्होंने कहा कि डर का सबसे बड़ा इलाज ‘तैयारी’ और ‘स्किलिंग’ है। सरकार ‘इंडिया एआई मिशन’ के जरिए स्टार्टअप्स को किफायती दरों पर जीपीयू (GPUs) और हाई-एंड कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करा रही है। पीएम का मानना है कि डोमेन-विशिष्ट ऑटोमेशन और एआई-सक्षम आउटसोर्सिंग भारत के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा करेंगे।
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मल्लिकार्जुन खरगे का हमला: ‘पीआर की भूख’ ने देश को दिलाई वैश्विक शर्मिंदगी
विपक्ष ने समिट के मैनेजमेंट को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार की ‘पीआर की भूख’ ने एक शानदार अवसर को अराजकता में बदल दिया। खरगे ने ट्वीट कर कहा कि पीएम मोदी के ‘फोटो अवसर’ के चक्कर में एग्जीबिटर्स और फाउंडर्स को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि आयोजन स्थल पर डिजिटल इंडिया के दावों के विपरीत केवल कैश पेमेंट लिया जा रहा था और डिजी यात्रा (Digi Yatra) जैसे सिस्टम फेल हो गए। खरगे ने सरकार को सुझाव दिया कि बड़े वैश्विक सम्मेलनों को सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए उन्हें ‘बेंगलुरु टेक समिट’ (BTS) जैसे सफल आयोजनों से सीख लेनी चाहिए।
ग्लोबल लीडर्स का जमावड़ा: सैम ऑल्टमैन और सुंदर पिचाई पर टिकी निगाहें
भले ही मैनेजमेंट पर सवाल उठ रहे हों, लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा AI समिट अपने कद में छोटा नहीं हुआ है। समिट में ओपन एआई के सैम ऑल्टमैन और गूगल के सुंदर पिचाई जैसे दिग्गजों के शामिल होने की चर्चा है।
इसके अलावा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा समेत 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों की भागीदारी भारत की बढ़ती डिजिटल ताकत का प्रमाण है।
भारत इस मंच का उपयोग ‘एआई गवर्नेंस’ और समावेशी डेटासेट के लिए वैश्विक आम सहमति बनाने में कर रहा है। समिट के दौरान स्वास्थ्य सेवा के लिए ‘SAHI’ और ‘BODH’ जैसी महत्वपूर्ण डिजिटल पहलों को भी लॉन्च किया गया है।
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अश्विनी वैष्णव का ‘वॉर रूम’: शिकायतों के समाधान के लिए सरकार की मुस्तैदी
आलोचनाओं को गंभीरता से लेते हुए आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपनी टीम को 24×7 अलर्ट पर रखा है। उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा AI समिट आयोजित करना एक बड़ी जिम्मेदारी है और किसी भी कमी को दूर करने के लिए ‘वॉर रूम’ सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
मंत्री ने खुद प्रतिनिधियों से फीडबैक मांगा है और आश्वासन दिया है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल और विजिटर मैनेजमेंट के बीच संतुलन बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब एंट्री पॉइंट्स पर कतारें कम करने के लिए अतिरिक्त मैनपावर लगाई गई है और वाई-फाई कनेक्टिविटी को सुधारा गया है। सरकार की यह ‘ओपन-माइंडेड’ अप्रोच दिखाती है कि वे इस आयोजन की गरिमा को बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
क्या भारत बनेगा दुनिया की एआई राजधानी?
अंततः, ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ भारत की तकनीक और प्रबंधन दोनों की परीक्षा है। यह सच है कि पहले दिन की अव्यवस्था ने सुर्खियां बटोरीं, लेकिन पीएम मोदी का 2047 का विजन और आईटी सेक्टर का $400 बिलियन का लक्ष्य एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।
दुनिया का सबसे बड़ा AI समिट होने के नाते, इसके निष्कर्ष वैश्विक एआई नीतियों को प्रभावित करेंगे। अगर भारत अपनी प्रबंधन संबंधी गलतियों से सीखकर इस विजन को धरातल पर उतारता है, तो वह निश्चित रूप से वैश्विक एआई परिदृश्य में एक अनिवार्य शक्ति बन जाएगा।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि समिट के अगले दिन भारत की डिजिटल साख को कितनी मजबूती देते हैं।
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