इंडिया AI इम्पैक्ट समिट: नई दिल्ली डिक्लेरेशन और 8 साल का नन्हा वक्ता
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट आज इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया क्योंकि भारत मंडपम में दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों ने एक सुर में ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन AI इम्पैक्ट’ को अपना लिया है। शनिवार, 21 फरवरी 2026 को संपन्न हुए इस तीन दिवसीय महाकुंभ में अमेरिका, ब्रिटेन और यहाँ तक कि चीन ने भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित और सहयोगात्मक उपयोग के विजन पर सहमति जताई है।
यह घोषणापत्र न केवल एआई के नैतिक विकास की बात करता है, बल्कि विकासशील देशों में डिजिटल विभाजन को कम करने के लिए एक वैश्विक ढांचे की रूपरेखा भी तैयार करता है। इस ऐतिहासिक समझौते ने भारत को एआई कूटनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है, जहाँ तकनीक और नैतिकता का अद्भुत मिलन देखने को मिला।
रणवीर सचदेवा का जलवा: जब 8 साल के बच्चे ने सुंदर पिचाई को किया निरुत्तर
इस इंडिया AI इम्पैक्ट समिट की सबसे ज्यादा वायरल होने वाली तस्वीर 8 साल के रणवीर सचदेवा की रही, जिन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर सबसे कम उम्र के वक्ता के रूप में इतिहास रच दिया। रणवीर ने जब मंच संभाला, तो सामने गूगल के CEO सुंदर पिचाई और OpenAI के सैम ऑल्टमैन जैसे दिग्गज बैठे थे।
रणवीर ने एआई के भविष्य और स्कूली शिक्षा में इसके एकीकरण पर ऐसे सवाल पूछे और सुझाव दिए कि सुंदर पिचाई खुद अपनी सीट से उठकर उनसे मिलने पहुँचे। रणवीर की कोडिंग क्षमता और एआई के प्रति उनकी समझ ने यह साबित कर दिया कि अगली पीढ़ी तकनीक को केवल इस्तेमाल नहीं करेगी, बल्कि उसे अपनी जरूरतों के हिसाब से नए सिरे से परिभाषित भी करेगी।
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ग्लोबल कोलाबरेशन का नया मंत्र: नई दिल्ली डिक्लेरेशन की 5 मुख्य बातें
नई दिल्ली डिक्लेरेशन को अपनाना इंडिया AI इम्पैक्ट समिट की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इस दस्तावेज़ में एआई के ‘मानव-केंद्रित’ विकास पर जोर दिया गया है, ताकि यह तकनीक मानव नौकरियों को खत्म करने के बजाय उनकी क्षमताओं को बढ़ाए।
सदस्य देशों ने डेटा गोपनीयता और एल्गोरिदम की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘इंटरनेशनल एआई रेगुलेटरी बॉडी’ बनाने का प्रस्ताव दिया है।
इसके अलावा, सदस्य देशों ने एआई रिसर्च के लिए एक साझा फंड बनाने पर भी सहमति व्यक्त की है, जिससे गरीब और मध्यम आय वाले देशों को एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में मदद मिल सके। यह घोषणापत्र एआई सुरक्षा (AI Safety) के प्रति वैश्विक एकजुटता का एक सशक्त प्रमाण है।
सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन का विजन: भारत बनेगा दुनिया का एआई गैराज
समिट के दौरान गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने भारत की सराहना करते हुए कहा कि इंडिया AI इम्पैक्ट समिट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत केवल एक बाजार नहीं, बल्कि दुनिया का एआई गैराज बनने की क्षमता रखता है। पिचाई ने घोषणा की कि गूगल भारत में एआई-स्किलिंग प्रोग्राम के तहत 10 लाख युवाओं को ट्रेनिंग देगा।
वहीं, सैम ऑल्टमैन ने रणवीर सचदेवा जैसे टैलेंट को देखकर कहा कि भविष्य के सबसे बड़े एआई स्टार्टअप्स भारत की गलियों और छोटे कमरों से निकलेंगे। ऑल्टमैन ने भारतीय स्टार्टअप्स के लिए विशेष कंप्यूटेशनल रिसोर्स और एपीआई एक्सेस देने का वादा किया, जिससे भारतीय उद्यमी वैश्विक स्तर की एआई सेवाएं विकसित कर सकें।
एआई और समाज: डिजिटल इंडिया का अगला चरण अब ‘इंटेलिजेंट इंडिया’
सरकार की ओर से जारी प्रेस रिलीज में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट को डिजिटल इंडिया अभियान का सबसे उन्नत चरण बताया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) ने कहा है कि यह समिट केवल तकनीक के बारे में नहीं था, बल्कि एआई को कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने के लिए इस्तेमाल करने का एक रोडमैप था।
‘शिक्षा साथी’ जैसे एआई टूल्स का प्रदर्शन यह दिखाता है कि कैसे एआई ग्रामीण क्षेत्रों में भाषाई बाधाओं को तोड़ सकता है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ट्वीट कर रणवीर सचदेवा जैसे युवाओं को भारत की नई ‘टेक्नोलॉजी पावर’ बताया और समिट की सफलता पर सभी भागीदार देशों को बधाई दी।
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जेन-जी और मिलेनियल्स के लिए करियर के नए रास्ते: केवल कोडिंग नहीं, अब प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग का दौर
सोशल मीडिया पर इस इंडिया AI इम्पैक्ट समिट की गूँज विशेष रूप से जेन-जी और मिलेनियल्स के बीच देखी गई। लिंक्डइन और एक्स (X) पर युवा पेशेवर इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि एआई उनकी नौकरियों को कैसे प्रभावित करेगा। समिट में दिए गए सत्रों ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग’ और ‘एआई एथिक्स’ जैसे क्षेत्र करियर के सबसे हॉट विकल्प होंगे।
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि युवाओं को केवल एक भाषा सीखने के बजाय एआई मॉडल्स को ट्रेन करने और उन्हें समस्या समाधान के लिए उपयोग करने पर ध्यान देना चाहिए। रणवीर सचदेवा की कहानी ने हजारों बच्चों और माता-पिता को प्रेरित किया है कि वे तकनीक को एक डरावनी चीज के बजाय एक सृजनात्मक खिलौने के रूप में देखें।
चुनौतियां और विवाद: एआई की छाया में सुरक्षा और गोपनीयता का सवाल
जहाँ एक तरफ इंडिया AI इम्पैक्ट समिट अपनी सफलताओं का जश्न मना रहा था, वहीं साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने कुछ गंभीर सवाल भी उठाए। कुछ सत्रों में ‘डीपफेक’ और ‘एआई-जनित गलत सूचनाओं’ (Misinformation) को लेकर चिंता व्यक्त की गई।
चर्चा इस बात पर भी हुई कि क्या नई दिल्ली डिक्लेरेशन के नियम वास्तव में चीन और अमेरिका जैसी महाशक्तियों द्वारा लागू किए जाएंगे या यह केवल एक कागजी औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
रणवीर सचदेवा के पिता ने भी एक साक्षात्कार में कहा कि जहाँ वे अपने बेटे की सफलता पर गर्व करते हैं, वहीं वे बच्चों के लिए एआई के ‘स्क्रीन टाइम’ और ‘मेंटल हेल्थ’ पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सतर्क हैं।
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भारत की अध्यक्षता में एआई का भविष्य उज्ज्वल
अंततः, इंडिया AI इम्पैक्ट समिट ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब तकनीक के क्षेत्र में केवल एक उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक ‘थॉट लीडर’ (विचारक) है। रणवीर सचदेवा जैसे युवाओं का उभरना और नई दिल्ली डिक्लेरेशन पर वैश्विक देशों का एकमत होना, इस बात का प्रमाण है कि भविष्य का एआई अधिक सुरक्षित, समावेशी और मानव-केंद्रित होगा।
एक सीनियर जर्नलिस्ट के नाते मेरा मानना है कि तकनीक का असली प्रभाव तब होता है जब वह आम आदमी के चेहरे पर मुस्कान लाए। इस समिट ने उस दिशा में एक बड़ा और साहसिक कदम उठाया है। अब जिम्मेदारी दुनिया के नेताओं और डेवलपर्स की है कि वे इस ‘नई दिल्ली विजन’ को हकीकत में बदलें और एआई को मानवता के कल्याण का सबसे बड़ा हथियार बनाएं।
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