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भारत-जर्मनी शिखर सम्मेलन: वीज़ा मुक्त ट्रांजिट सुविधा पर ऐतिहासिक समझौता

वीज़ा मुक्त ट्रांजिट सुविधा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने सोमवार को अहमदाबाद में एक व्यापक द्विपक्षीय वार्ता के साथ रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने का जश्न मनाया। इस बैठक का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय यात्रियों के लिए वीज़ा मुक्त ट्रांजिट सुविधा की घोषणा रही, जिससे अब भारतीय पासपोर्ट धारकों को जर्मनी के एयरपोर्ट्स से गुजरते समय लंबी प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी। पीएम मोदी और चांसलर मर्ज़ ने रक्षा, टेक्नोलॉजी, अपस्किलिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, व्यापार और निवेश सहित कई महत्वपूर्ण गठबंधनों की घोषणा की। चांसलर मर्ज़ ने कहा कि दुनिया तेजी से शक्ति राजनीति से प्रभावित हो रही है और “मुश्किल हवाओं” का सामना करने के लिए हमें खुद को तैयार करना होगा। यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 50 बिलियन डॉलर को पार कर गया है, जो यूरोपीय संघ के साथ भारत के कुल व्यापार का 25% है।

साबरमती के तट पर कूटनीति और उत्सव: इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल 2026 का आगाज

सोमवार को राजनीति, कूटनीति और उत्सव का अनूठा मेल साबरमती रिवरफ्रंट पर देखने को मिला, जहाँ पीएम मोदी और चांसलर मर्ज़ ने अहमदाबाद इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल 2026 का उद्घाटन किया। आसमान में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लिखे झंडे, गदा लिए विशाल हनुमान और तिरंगे के साथ अनगिनत पतंगें उड़ रही थीं। दोनों नेताओं ने एक खुली गाड़ी में सवारी की, महिला कारीगरों से बात की और पतंग उड़ाने में हाथ आजमाया। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे संदेशों वाली पतंगों के बीच, 108 संगीतकारों ने जर्मन प्रतिनिधिमंडल का स्वागत भारतीय वाद्ययंत्रों पर जर्मन धुन बजाकर किया। इस महोत्सव में 50 देशों के 135 अंतरराष्ट्रीय और 871 स्थानीय प्रतिभागियों ने भाग लिया। ओडिशा के प्रतिभागी प्रभातकुमार पुष्टि ने गर्व से बताया कि पीएम मोदी ने चांसलर के साथ मिलकर उनकी पतंग उड़ाई, जो इस आयोजन की वैश्विक अपील को दर्शाता है।

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रक्षा और सुरक्षा संबंधों में बड़ा अपग्रेड: औद्योगिक सहयोग के लिए बना नया रोडमैप

प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज़ ने रक्षा और सुरक्षा को अपनी साझेदारी का मुख्य स्तंभ बताया। दोनों नेताओं ने गहरे सैन्य-से-सैन्य सहयोग, संयुक्त अभ्यास और वरिष्ठ अधिकारियों के आदान-प्रदान का स्वागत किया। इस दौरान रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप विकसित करने के लिए एक संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए गए, जो सह-विकास और सह-उत्पादन पर केंद्रित होगा। मोदी ने प्रमुख भारतीय नौसैनिक और हवाई अभ्यासों में जर्मनी की भागीदारी और IFC-IOR में एक संपर्क अधिकारी की तैनाती का स्वागत किया। चांसलर मर्ज़ ने स्पष्ट किया कि भारत जर्मनी के लिए एक “पसंदीदा भागीदार” है। दोनों नेताओं ने आतंकवाद को मानवता के लिए सबसे गंभीर खतरा बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की और आतंकी नेटवर्क एवं उनके वित्तपोषण के खिलाफ मिलकर लड़ने का संकल्प लिया।

भारतीय यात्रियों और छात्रों के लिए बड़ी राहत: वीज़ा नियमों में ऐतिहासिक बदलाव

अहमदाबाद की इस वार्ता में लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए वीज़ा मुक्त ट्रांजिट सुविधा की घोषणा को एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। अब यदि भारतीय यात्री जर्मन एयरपोर्ट पर लेओवर के दौरान इंटरनेशनल एरिया के अंदर रहते हैं और उनका गंतव्य शेंगेन देश नहीं है, तो उन्हें किसी ट्रांजिट वीज़ा की आवश्यकता नहीं होगी। यह सुविधा 12 जनवरी 2026 को माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट (MMPA) के तहत घोषित की गई। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने नई शिक्षा नीति के तहत प्रमुख जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने के लिए आमंत्रित किया। दोनों देशों ने उच्च शिक्षा और ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप पर एक व्यापक रोडमैप पर हस्ताक्षर किए, जिससे भारतीय छात्रों और पेशेवरों, विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लोगों के लिए जर्मनी में नौकरी के बाजार के रास्ते आसान होंगे।

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हरित ऊर्जा और आर्थिक विकास: 50 अरब डॉलर के व्यापार से तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था की ओर

आर्थिक मोर्चे पर, भारत और जर्मनी रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन को प्राथमिकता दे रहे हैं। दोनों देशों ने ‘जॉइंट ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट’ पर गहरे तकनीकी और वाणिज्यिक सहयोग की पुष्टि की। इसके तहत AM Green जर्मनी की Uniper Global Commodities को ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति करेगा। पीएम मोदी ने बताया कि 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां भारत में मौजूद हैं, जो यहां के अवसरों में उनके विश्वास को दर्शाती हैं। वीज़ा मुक्त ट्रांजिट सुविधा के साथ-साथ आर्थिक नीतियों में निरंतरता पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। नेताओं ने यूरोपीय संघ और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की प्रगति पर भी चर्चा की, जिसके इस महीने के अंत तक फाइनल होने की उम्मीद है।

समुद्री विरासत और सांस्कृतिक जुड़ाव: लोथल और ब्रेमरहेवन के बीच ऐतिहासिक गठबंधन

भारत और जर्मनी के बीच संबंधों को एक नया आयाम देते हुए समुद्री संग्रहालय सहयोग पर एक महत्वपूर्ण MoU पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत लोथल में बन रहे नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स (NHMC) और जर्मनी के ब्रेमरहेवन स्थित जर्मन मैरीटाइम म्यूजियम (DSM) एक साथ आएंगे। पीएम मोदी ने इसे एक “ऐतिहासिक कदम” बताया जो दोनों देशों के समुद्री इतिहास को जोड़ेगा। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग को गहरा करने के लिए गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय और जर्मनी के बीच भी समझौता हुआ। मोदी ने याद किया कि कैसे रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद ने भारत-जर्मनी के बीच दर्शन और ज्ञान का पुल बनाया था, और आज वीज़ा मुक्त ट्रांजिट सुविधा जैसे कदम इस आधुनिक साझेदारी को और अधिक जीवंत बना रहे हैं।

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इंडो-पैसिफिक और वैश्विक भू-राजनीति पर साझा विजन

प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज़ ने एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून और UNCLOS के सम्मान पर जोर दिया और एक नए द्विपक्षीय इंडो-पैसिफिक परामर्श तंत्र की घोषणा की। उन्होंने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के प्रति अपने मजबूत समर्थन की पुष्टि की और इसे वैश्विक वाणिज्य के लिए परिवर्तनकारी बताया। नेताओं ने यूक्रेन और गाजा की स्थिति पर भी चर्चा की, जहाँ मोदी ने दोहराया कि भारत हमेशा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए, दोनों देशों ने G4 ढांचे के तहत सदस्यता विस्तार की मांग को फिर से दोहराया।

भविष्य की ओर बढ़ता भारत-जर्मनी संबंध: नवाचार और स्थिरता का संकल्प

वार्ता के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी का साथ पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है। रिन्यूएबल एनर्जी के लिए वित्त और निवेश जुटाने हेतु एक संयुक्त प्लेटफॉर्म और बैटरी ऊर्जा भंडारण समाधान पर कार्य समूहों का शुभारंभ किया गया। चांसलर मर्ज़ की यह पहली भारत यात्रा एशिया में उनके विशेष ध्यान को दर्शाती है। मोदी ने “आवकारो मीठो आपजे रे” की गुजराती भावना के साथ चांसलर का धन्यवाद किया। अंततः, वीज़ा मुक्त ट्रांजिट सुविधा, ग्रीन हाइड्रोजन और रक्षा औद्योगिक सहयोग जैसे ठोस कदमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी अब अगले स्तर पर पहुंच गई है, जो नवाचार, विश्वास और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है।

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