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ईरान में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने ईरान यात्रा की एडवाइजरी जारी की

ईरान यात्रा की एडवाइजरी

ईरान यात्रा की एडवाइजरी आज सोमवार (5 जनवरी) को भारत सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से जारी कर दी गई है, जिसमें हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए भारतीय नागरिकों को अगली सूचना तक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने का सख्त आग्रह किया गया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की आसमान छूती लागत को लेकर ईरान के विभिन्न शहरों में भड़के बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद यह कदम उठाया है। तेहरान और अन्य प्रांतीय शहरों में बिगड़ते सुरक्षा हालातों के बीच भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

विदेश मंत्रालय की सख्त हिदायत और सुरक्षा प्रोटोकॉल

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी इस आधिकारिक सलाह में ईरान में पहले से मौजूद भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों (PIO) को “पूरी सावधानी” बरतने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नागरिक उन इलाकों से पूरी तरह दूर रहें जहाँ विरोध प्रदर्शन या प्रदर्शनकारियों की भीड़ जमा हो रही है। एडवाइजरी में भारतीय समुदाय से तेहरान स्थित भारतीय दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट, सोशल मीडिया हैंडल और स्थानीय समाचारों पर बारीकी से नज़र रखने को कहा गया है। ईरान में रेजिडेंट वीजा पर रह रहे भारतीयों के लिए दूतावास में तत्काल पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में सहायता सुनिश्चित की जा सके।

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ईरान में आर्थिक संकट और महंगाई का विस्फोट

ईरान इस समय अपने सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है, जहाँ मार्च 2025 से महंगाई दर 36% से ऊपर बनी हुई है। राष्ट्रीय मुद्रा रियाल की कीमत डॉलर के मुकाबले आधी रह गई है, जिससे आम जनता के लिए बुनियादी जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है। आर्थिक ठहराव और बढ़ती कीमतों के खिलाफ 28 दिसंबर को व्यापारियों और दुकानदारों द्वारा शुरू की गई हड़ताल अब एक जन आंदोलन में तब्दील हो चुकी है। हालात इतने खराब हैं कि चावल, मांस और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही हैं, और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं ने 2026 में गंभीर मंदी की भविष्यवाणी की है।

ट्रंप की दखलअंदाजी की चेतावनी और वैश्विक तनाव

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों ने आग में घी डालने का काम किया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की, तो अमेरिका “बहुत बुरी तरह सबक सिखाएगा”। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने साफ कहा, “हम इस पर बहुत करीब से नजर रख रहे हैं। अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं, तो उन्हें अमेरिका से जोर का झटका लगेगा।” हालाँकि उन्होंने किसी विशिष्ट सैन्य कार्रवाई का जिक्र नहीं किया, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के कड़े रुख ने क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति की संभावनाओं को हवा दे दी है।

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विरोध प्रदर्शनों का बढ़ता दायरा और हताहतों की संख्या

ईरान के 31 प्रांतों में से 23 और लगभग 40 से अधिक शहरों में विरोध प्रदर्शन फैल चुके हैं। मानवाधिकार समूहों के अनुसार, सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में अब तक लगभग 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें सुरक्षाकर्मी और बच्चे भी शामिल हैं। करीब 1,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। ईरान के पश्चिमी क्षेत्रों में हिंसा की खबरें सबसे ज्यादा हैं, जहाँ प्रदर्शनकारी अब आर्थिक शिकायतों के साथ-साथ राजनीतिक बदलाव की मांग भी कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगे नए प्रतिबंधों के बाद वहां के हालातों पर चिंता जता रही हैं।

अयातुल्ला खामेनेई और ईरानी शासन की प्रतिक्रिया

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि देश “दुश्मन के सामने नहीं झुकेगा”। उन्होंने विरोध करने वालों को ‘दंगाई’ करार देते हुए कहा कि उन्हें उनकी जगह दिखाई जाएगी। वहीं, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने कुछ नरम रुख अपनाते हुए गृह मंत्रालय को प्रदर्शनकारियों के प्रति “दयालु” रहने का निर्देश दिया है, हालांकि उन्होंने भी स्वीकार किया कि समाज को केवल बलपूर्वक शांत नहीं किया जा सकता। ईरानी शासन का आरोप है कि ‘विदेशी एजेंट’ इन विरोध प्रदर्शनों को हाईजैक करने की कोशिश कर रहे हैं।

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भारतीयों की मौजूदगी और तीर्थयात्रियों की चिंता

ईरान में वर्तमान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक रह रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या छात्रों की है। इसके अलावा, भारत से शिया मुस्लिम तीर्थयात्री भी बड़ी तादाद में ईरान की पवित्र स्थलों की यात्रा पर जाते हैं। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए ईरान यात्रा की एडवाइजरी में धार्मिक यात्रियों और छात्रों को सतर्क रहने को कहा गया है। यह देखते हुए कि ईरानी रियाल की कीमत एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.4 मिलियन तक गिर गई है, वहां मौजूद भारतीयों को वित्तीय लेनदेन और आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और इजराइल का रुख

ईरान के भीतर मची इस हलचल पर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ईरानी नागरिकों की “स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं” का समर्थन किया है। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल पर देश को अस्थिर करने और विभाजन बोने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। इन बदलते वैश्विक समीकरणों और ट्रंप की चेतावनी के बीच भारत सरकार ने अपनी ईरान यात्रा की एडवाइजरी के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि भारतीय नागरिक किसी भी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष या आंतरिक अशांति की चपेट में न आएं।

अंत में, वरिष्ठ संपादकों का मानना है कि ईरान में स्थिति अभी और नाजुक हो सकती है, इसलिए ईरान यात्रा की एडवाइजरी का पालन करना प्रत्येक नागरिक के लिए अनिवार्य है। अगली सूचना तक ईरान के लिए किसी भी प्रकार की पर्यटन या गैर-ज़रूरी व्यावसायिक यात्रा को टाल देना ही समझदारी होगी।

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