कनाडा के आरोप खारिज करते हुए बोले भारतीय दूत दिनेश पटनायक
कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का पक्ष मजबूती से रखते हुए कनाडा के आरोप खारिज कर दिए हैं। सितंबर 2025 में कार्यभार संभालने वाले श्री पटनायक ने स्पष्ट किया कि सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से नई दिल्ली को जोड़ने वाले ओटावा के दावे पूरी तरह निराधार हैं।
मंगलवार (14 जनवरी, 2026) को CBC न्यूज़ को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने दो टूक कहा कि यह कानूनी मामला चार व्यक्तियों के खिलाफ है, न कि भारत सरकार के खिलाफ। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत सरकार इस तरह की गतिविधियों में कभी शामिल नहीं होती और ओटावा के पास अपने दावों को पुख्ता करने के लिए कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है।
एयर इंडिया बमबारी की जांच पर सवाल और 40 साल की विफलता
भारतीय उच्चायुक्त ने कनाडा की कानून व्यवस्था और उसकी आतंकवाद विरोधी नीति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि जून 1985 में हुए एयर इंडिया ‘कनिष्क’ बम धमाके की जांच से अभी तक कुछ भी ठोस हासिल नहीं हुआ है।
इस आतंकवादी हमले में 329 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर कनाडाई नागरिक थे, लेकिन आज चार दशक बीत जाने के बाद भी किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया गया है।
श्री पटनायक ने कहा कि नई दिल्ली पिछले 40 सालों से कनाडा को उसकी धरती पर पनप रहे आतंकवाद के बारे में चेतावनी दे रही है, लेकिन कनाडाई अधिकारियों ने जमीन पर कुछ भी नहीं किया है।
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सबूत बनाम जानकारी: पटनायक ने ओटावा की कूटनीति को घेरा
इंटरव्यू के दौरान जब CBC एंकर ने पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा लगाए गए “विश्वसनीय जानकारी” के आरोपों पर सवाल पूछा, तो पटनायक ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “ठीक है, सबूत कहाँ है? आप हर बार कहते रहते हैं कि विश्वसनीय जानकारी है, जो ठीक है, लेकिन हमने हमेशा कहा है कि यह बेतुका और बकवास है।
” उन्होंने ओटावा की इस कार्यशैली की आलोचना की कि जब कनाडा आरोप लगाता है, तो उसे सबूत देने की जरूरत नहीं होती, लेकिन जब भारत आतंकवाद पर जानकारी देता है, तो उसे अपर्याप्त बता दिया जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मेरे आरोपों को सबूत चाहिए, आपके आरोपों को सबूत नहीं चाहिए?”
निज्जर मामला: भारत सरकार के खिलाफ नहीं, चार व्यक्तियों पर है केस
हरदीप सिंह निज्जर, जिसे भारत ने 2020 में आतंकवादी घोषित किया था, की हत्या के संदर्भ में पटनायक ने कानूनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में जो मामला चल रहा है, वह बहुत साफ तौर पर चार व्यक्तियों के खिलाफ है।
उन्होंने कनाडाई नेतृत्व द्वारा कनाडा के आरोप खारिज करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भारत सरकार के खिलाफ कोई मामला मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक पूर्व प्रधानमंत्री और उनकी टीम द्वारा दिए गए बयान हैं, जिनका समर्थन करना उनकी मजबूरी थी, लेकिन वास्तविक धरातल पर भारत को कहीं भी नहीं फंसाया गया है।
कनाडा की धरती पर खालिस्तानी चरमपंथ और खुफिया एजेंसी की स्वीकारोक्ति
यह टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब कनाडा की शीर्ष खुफिया एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि खालिस्तानी चरमपंथी उसकी सीमाओं के भीतर सक्रिय हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये समूह कनाडा से अलगाववाद को बढ़ावा दे रहे हैं, फंड जुटा रहे हैं और भारत में हिंसक वारदातों की योजना बना रहे हैं।
इसके बावजूद, ओटावा नई दिल्ली पर दखलअंदाज़ी और जासूसी का आरोप लगाता रहा है। पटनायक ने ओटावा की इस दोहरी नीति की आलोचना करते हुए कहा कि कनाडा अपनी धरती पर आतंकवाद पर लगाम लगाने में पूरी तरह नाकाम रहा है और भारत को निशाना बनाने वाली हिंसा के लिए एक अनुकूल माहौल बनाने की अनुमति दी है।
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सुधरते संबंधों के बीच साक्ष्यों पर आधारित कार्रवाई की मांग
वर्तमान में नई दिल्ली और ओटावा के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबे की भारत यात्रा और सितंबर 2025 में मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की उम्मीद जगी है।
इस बीच कनाडा के आरोप खारिज करते हुए भारतीय दूत ने दोहराया कि भारत सक्षम है और वह कार्रवाई करने के लिए तैयार है, बशर्ते कनाडा केवल “जानकारी” देने के बजाय “सबूत” पेश करे। उन्होंने स्पष्ट किया, “हमें उस पर कार्रवाई करने के लिए आपकी ज़रूरत नहीं है। हमें बस इतना चाहिए कि आप हमें सबूत दें ताकि हम कार्रवाई कर सकें।”
अभिव्यक्ति की आजादी और नफरत के बीच का अंतर
दिनेश पटनायक अपने बेबाक और स्पष्टवादी रवैये के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पिछले इंटरव्यूज में भी यह बात साफ की थी कि अभिव्यक्ति की आज़ादी और नफ़रत फैलाने की आज़ादी (Hate Speech) के बीच एक बहुत बारीक लेकिन महत्वपूर्ण अंतर होता है, जिसे अक्सर कनाडा में अनदेखा किया जाता है।
उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि आरोप लगाना आसान है, लेकिन उन्हें साबित करना कठिन। भारत ने हमेशा इन दावों को “राजनीति से प्रेरित” बताया है और ओटावा को सलाह दी है कि वह अपनी धरती पर पनप रहे उग्रवाद पर ध्यान दे।
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भविष्य की राह: बिना साक्ष्य के आरोपों का दौर खत्म करने की अपील
अंततः भारतीय राजदूत ने ओटावा को यह कड़ा संदेश दिया कि कनाडा के आरोप खारिज किए बिना और बिना ठोस सबूतों के भारत सरकार को निशाना बनाना बंद किया जाना चाहिए। पटनायक ने कहा कि यदि भारत सरकार में ऐसे लोग हैं जिन्होंने कुछ गलत किया है और कनाडा उसके सबूत देता है, तो भारत निश्चित रूप से कार्रवाई करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि “आप यह नहीं कह सकते कि मैं आप पर आरोप लगाता हूँ, और अब आपको खुद को सही साबित करना होगा।” अब गेंद कनाडा के पाले में है कि वह संबंधों को सुधारने के लिए सहयोग का रास्ता चुनता है या बिना साक्ष्यों के आरोप लगाने की नीति पर कायम रहता है।
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