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इंडिगो फ्लाइट भारी देरी: चेन्नई एयरपोर्ट पर 5 घंटे फंसे रहे 200 यात्री

इंडिगो फ्लाइट भारी देरी

इंडिगो फ्लाइट भारी देरी का एक और शर्मनाक अध्याय बुधवार, 25 फरवरी 2026 को चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लिखा गया, जहाँ सिंगापुर जाने वाले 200 से अधिक यात्रियों को एक ‘लॉक्ड’ विमान के भीतर घंटों नरकीय स्थिति का सामना करना पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार, यात्रियों को समय पर विमान में बैठा दिया गया था, लेकिन टेक-ऑफ के बजाय उन्हें बिना किसी स्पष्ट स्पष्टीकरण के पांच घंटे तक केबिन के भीतर इंतजार करने के लिए मजबूर किया गया।

विमान के भीतर हवा की कमी और बढ़ते तापमान ने बच्चों और बुजुर्गों की हालत बिगाड़ दी। यह घटना दर्शाती है कि एयरलाइंस अक्सर तकनीकी खराबी या परिचालन संबंधी समस्याओं का बोझ सीधे यात्रियों के कंधों पर डाल देती हैं, बिना उनकी बुनियादी जरूरतों और गरिमा का ख्याल रखे।

सिंगापुर की उड़ान और वो खौफनाक इंतजार: बंद केबिन में जब उखड़ने लगीं सांसें

चेन्नई से सिंगापुर जाने वाली इस उड़ान में सवार यात्रियों के लिए यह यात्रा किसी बुरे सपने में तब्दील हो गई। इंडिगो फ्लाइट भारी देरी के चलते यात्री विमान के भीतर ही कैद होकर रह गए क्योंकि एयरलाइन ने उन्हें वापस टर्मिनल पर उतारने से इनकार कर दिया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, विमान के भीतर एयर कंडीशनिंग सिस्टम भी ठीक से काम नहीं कर रहा था, जिससे यात्रियों को घुटन महसूस होने लगी। पांच घंटों के उस लंबे इंतजार में पानी और खाने की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। यात्रियों ने जब क्रू मेंबर्स से सवाल किए, तो उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं मिला, जिससे केबिन के भीतर तनाव और बढ़ गया।

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क्रू पर भड़के यात्री: वायरल वीडियो में दिखा चेन्नई एयरपोर्ट का हंगामा

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में इस इंडिगो फ्लाइट भारी देरी का असली दर्द साफ देखा जा सकता है। वीडियो में परेशान यात्री विमान के स्टाफ से बहस करते और उन्हें अपनी तकलीफ बताते हुए नजर आ रहे हैं। यात्रियों का आरोप है कि उन्हें ‘जमीन पर बंधक’ बनाकर रखा गया था।

एक वीडियो में एक महिला यात्री को चिल्लाते हुए सुना जा सकता है कि उनके बच्चे भूखे हैं और वे विमान के भीतर और अधिक समय तक नहीं रह सकते। इन वायरल दृश्यों ने नेटिजन्स के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है, जो इंडिगो की सर्विस क्वालिटी और संकट के समय उनके रिस्पांस सिस्टम पर तीखे सवाल उठा रहे हैं।

बिना किसी स्पष्टीकरण के टलती रही उड़ान: एविएशन नियमों की उड़ाई गई धज्जियां

इस इंडिगो फ्लाइट भारी देरी के पीछे का कारण एयरलाइन ने आधिकारिक तौर पर बहुत देर से साझा किया। शुरुआती घंटों में यात्रियों को केवल ‘तकनीकी खराबी’ (Technical Snag) का हवाला दिया गया, लेकिन विमान को खाली न करना और यात्रियों को बंद केबिन में रखना नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के नियमों का उल्लंघन प्रतीत होता है।

नियमों के अनुसार, यदि विमान में लंबे समय तक देरी होती है, तो एयरलाइंस को यात्रियों के आराम और जलपान की व्यवस्था करनी होती है और एक निश्चित समय के बाद उन्हें विमान से उतारने का विकल्प देना होता है। इस मामले में इंडिगो की चुप्पी ने न केवल यात्रियों को परेशान किया बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी संदेह पैदा किया।

एविएशन इंडस्ट्री में बढ़ता तनाव: क्या एयरलाइंस के लिए केवल मुनाफा ही प्राथमिकता है?

चेन्नई की यह घटना कोई पहली बार नहीं है जब यात्रियों को इस तरह की परेशानी उठानी पड़ी हो। हाल के महीनों में इंडिगो फ्लाइट भारी देरी और अन्य एयरलाइंस की लापरवाही की खबरें लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइंस अक्सर अपनी टर्नअराउंड टाइम (TAT) को बचाने और लागत कम करने के चक्कर में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा से समझौता करती हैं।

विमान में यात्रियों को बैठाए रखने का एक मुख्य कारण यह भी होता है कि यदि उन्हें उतारा गया, तो दोबारा सुरक्षा जांच और बोर्डिंग में और अधिक समय लगेगा, जिससे फ्लाइट स्लॉट मिस हो सकता है। लेकिन क्या एक स्लॉट की कीमत यात्रियों की सेहत और मानसिक शांति से बढ़कर है?

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जेन-जी और सोशल मीडिया एक्टिविज्म: एयरलाइंस के लिए बड़ा सबक

आज की डिजिटल पीढ़ी यानी जेन-जी इस तरह की लापरवाही को बर्दाश्त करने वाली नहीं है। जैसे ही यह खबर आई, एक्स (X) और इंस्टाग्राम पर इंडिगो को टैग करके हजारों ट्वीट्स किए गए। यात्रियों ने विमान के भीतर से लाइव स्ट्रीमिंग शुरू कर दी, जिससे एयरलाइन को अपनी गलती छुपाने का मौका नहीं मिला।

यह ‘सोशल मीडिया एक्टिविज्म’ ही है जो आज के दौर में कॉर्पोरेट जवाबदेही सुनिश्चित करता है। युवा यात्रियों का मानना है कि महंगी टिकटें खरीदने के बाद भी अगर उन्हें इस तरह का बर्ताव मिलता है, तो वे एयरलाइंस को सार्वजनिक रूप से कटघरे में खड़ा करने से पीछे नहीं हटेंगे। इंडिगो के लिए यह घटना उनकी ब्रांड इमेज पर एक बड़ा दाग है।

यात्रियों के अधिकार और मुआवजे की मांग: क्या होगा एयरलाइन पर एक्शन?

इस घटना के बाद अब यात्री मुआवजे और एयरलाइन पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इंडिगो फ्लाइट भारी देरी के शिकार हुए लोगों का कहना है कि उन्हें न केवल उनके समय की भरपाई चाहिए, बल्कि उस मानसिक प्रताड़ना का हर्जाना भी मिलना चाहिए जो उन्होंने उस बंद विमान में झेली।

डीजीसीए ने इस मामले का संज्ञान लिया है और इंडिगो से रिपोर्ट तलब की है। यदि यह साबित होता है कि एयरलाइन ने जानबूझकर यात्रियों को विमान से नहीं उतारा या उनकी बुनियादी जरूरतों की अनदेखी की, तो एयरलाइन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। यह मामला भारत में यात्री अधिकारों के संरक्षण के लिए एक नजीर बन सकता है।

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हवाई यात्रा में भरोसे और सुरक्षा का बढ़ता संकट

अंततः, चेन्नई एयरपोर्ट की यह घटना हमें याद दिलाती है कि तकनीक और आधुनिकता के इस युग में भी हम एक मानवीय और जिम्मेदार सेवा प्रणाली बनाने में विफल रहे हैं।

एक वरिष्ठ पत्रकार के रूप में मेरा मानना है कि जब तक एयरलाइंस को उनकी गलतियों के लिए गंभीर आर्थिक और कानूनी परिणाम नहीं भुगतने पड़ेंगे, तब तक यात्रियों को इसी तरह ‘बंधक’ बनाया जाता रहेगा।

हवाई यात्रा केवल ए से बी तक पहुँचने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक भरोसे का रिश्ता है जिसे इंडिगो ने इस बार बुरी तरह तोड़ा है। हमें उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े सुधार किए जाएंगे और यात्रियों की सुरक्षा को मुनाफे से ऊपर रखा जाएगा।

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