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नौकरी AI का डर: डेक्सियन रिपोर्ट में वर्कप्लेस बदलाव का खुलासा

नौकरी AI का डर

नौकरी और AI का डर वर्तमान वर्कप्लेस में एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, जिसे डेक्सियन की नवीनतम रिसर्च ने विस्तार से उजागर किया है। मैकलीन, वर्जीनिया से 9 फरवरी, 2026 को जारी डेक्सियन की ‘2026 वर्क फ्यूचर्स स्टडी’ से पता चलता है कि कर्मचारियों का भरोसा कम होने के बावजूद ऑर्गनाइज़ेशन में AI के लिए तैयारी बढ़ रही है।

डेटा के अनुसार, जहाँ AI अपनाने में एम्प्लॉयर का भरोसा बढ़ रहा है, वहीं स्किल्स, ट्रांसपेरेंसी और समान करियर नतीजों के लिए कर्मचारियों की उम्मीदें भी तेजी से बदल रही हैं।

डेक्सियन की यह नई रिसर्च काम के भविष्य में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है: जैसे-जैसे ऑर्गनाइज़ेशन अपनी AI तैयारी को लेकर ज़्यादा भरोसेमंद हो रहे हैं, कर्मचारी इस बात पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं कि इन बदलावों को कैसे मैनेज किया जाए — खासकर जब स्किल्स डेवलपमेंट, फ्लेक्सिबिलिटी और भरोसे की बात हो।

एक्सपेरिमेंट से एग्ज़िक्यूशन की ओर बढ़ता AI का प्रभाव

डेक्सियन की 2026 वर्क फ्यूचर्स रिपोर्ट का डेटा पिछले साल की इस अनिश्चितता से एक बड़ा बदलाव दिखाता है कि क्या AI वर्कप्लेस को नया आकार देगा। अब यह एक ज़्यादा ज़रूरी और प्रैक्टिकल मामला बन गया है, जिसमें सवाल यह है कि इसे ज़िम्मेदारी से और बड़े पैमाने पर कैसे इस्तेमाल किया जाए।

दिसंबर 2025 में 500 सी-सूट लीडर्स और 1,000 फुल-टाइम कर्मचारियों से इकट्ठा किए गए डेटा के आधार पर, 2026 में 51% एम्प्लॉयर कहते हैं कि वे टेक्नोलॉजी में हो रही तरक्की को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

यह भरोसा असर में भी बदल रहा है, क्योंकि 46% का कहना है कि उन्होंने AI से होने वाली प्रोडक्टिविटी में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी काफी हद तक महसूस की है। कहानी अब सिर्फ प्रयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे क्रियान्वयन की ओर बढ़ रही है।

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ट्रांसपेरेंसी का अंतर और कर्मचारियों के बीच अविश्वास की स्थिति

डेक्सियन के CEO मारूफ़ अहमद का मानना है कि जब ऑर्गनाइज़ेशन स्किल बनाने और भरोसा जीतने के लिए AI को जानबूझकर वर्कफ़ोर्स डिज़ाइन के साथ जोड़ते हैं, तो टेक्नोलॉजी मौके बढ़ा सकती है। हालांकि, कर्मचारियों के जवाब बताते हैं कि टेक्नोलॉजी में भरोसा अपने आप नतीजों में भरोसे में नहीं बदलता है।

जहाँ 82% एम्प्लॉयर ऑटोमेशन और रोल में बदलाव के बारे में खुद को ट्रांसपेरेंट बताते हैं, वहीं वास्तविकता कुछ और ही है। नौकरी और AI का डर कर्मचारियों के मन में गहरा है; सिर्फ़ 21% कर्मचारी अपने एम्प्लॉयर पर AI को सही तरीके से संभालने का भरोसा करते हैं।

इसके अलावा, 69% वर्कर इस बात को लेकर परेशान हैं कि ऑटोमेशन उनकी जॉब सिक्योरिटी या करियर की संभावनाओं पर बुरा असर डालेगा। मारूफ़ अहमद कहते हैं कि अगर इंसानी बातों को किनारे रखा गया, तो वही टूल अनिश्चितता और अलगाव पैदा कर सकते हैं।

स्किल-फर्स्ट स्ट्रैटेजी और टैलेंट डेवलपमेंट पर नया फोकस

रिपोर्ट से पता चलता है कि अब एम्प्लॉयर और एम्प्लॉई के बीच तालमेल का एक नया एरिया उभर रहा है। अब कंपनियां पारंपरिक क्रेडेंशियल (डिग्री) के बजाय स्किल और पोटेंशियल को ज़्यादा प्राथमिकता दे रही हैं।

डेटा के अनुसार, 56% फ़ैसले लेने वालों का कहना है कि यह उनका मुख्य फ़ोकस होगा, जबकि 52% इंटरनल टैलेंट डेवलपमेंट और मोबिलिटी में इन्वेस्ट करने की योजना बना रहे हैं। कर्मचारी भी इस दिशा को सही मानते हैं; 47% का कहना है कि स्किल और पोटेंशियल पर फ़ोकस करने से हायरिंग की चुनौतियां हल होंगी।

डेक्सियन के चीफ़ मार्केटिंग ऑफ़िसर किप हैवेल के अनुसार, अब बातचीत डर से आगे बढ़कर काम करने की तरफ़ बढ़ रही है, जहाँ इंसान और AI मिलकर इनोवेशन लाएंगे।

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तीन तरीके जिनसे AI आपकी नौकरी पर संकट बन सकता है

AI वर्कप्लेस में कैसे असर डालता है, इसे बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट में तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है। पहला है ‘AI ने मेरी नौकरी ले ली’—हालांकि यह अभी सबसे कम आम है, लेकिन यह उन क्षेत्रों में प्रभावी है जहाँ AI इंसान का पूरा काम कर सकता है।

दूसरा तरीका है ‘AI मेरे काम को आसान बनाता है’—यह लगभग सभी पर लागू होता है। अगर AI आपको कम संसाधनों में ज़्यादा काम करने के काबिल बनाता है, तो कंपनियां कर्मचारियों की संख्या कम करने का मौका ढूंढ सकती हैं।

तीसरा तरीका सबसे निराशाजनक है—’AI के लिए पेमेंट करना’—जहाँ कंपनियां महंगे AI टूल्स के बिल भरने के लिए कर्मचारियों की छंटनी करके लागत कम करती हैं। इन स्थितियों के कारण नौकरी और AI का डर लगातार बना हुआ है।

Amazon और टेक दिग्गजों के छंटनी दावों की कड़वी हकीकत

कंपनियां अक्सर यह स्वीकार करने से हिचकिचाती हैं कि छंटनी का असली कारण AI है। जब अमेज़न (Amazon) ने पिछले साल बड़े पैमाने पर छंटनी की, तो कई लोगों ने अनुमान लगाया कि यह AI की वजह से है। हालांकि, CEO एंडी जेसी ने इसे “कल्चर” से जुड़ा फैसला बताया, न कि AI या लागत से।

जैकब ज़िंकुला द्वारा दर्जनों नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों (जैसे इयान कार्टर, जेम्स ह्वांग और जो फ्रेंड) से की गई बातचीत यह दिखाती है कि कर्मचारी अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी नौकरी जाने में AI का क्या रोल था।

यह अनिश्चितता कर्मचारियों को अपने अगले करियर कदम के लिए सतर्क कर रही है, क्योंकि जनवरी 2026 में 2009 के बाद से सबसे ज़्यादा छंटनी देखी गई है।

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बदलती उम्मीदें: सैलरी, फ्लेक्सिबिलिटी और वर्कप्लेस कल्चर

भविष्य का वर्क मॉडल इस बात पर निर्भर करेगा कि ऑर्गनाइज़ेशन टेक्नोलॉजी को लोगों के साथ कैसे जोड़ते हैं। रिसर्च के नतीजे कम्पेनसेशन, फ़्लेक्सिबिलिटी और वर्कप्लेस कल्चर को लेकर बदलती उम्मीदों पर रोशनी डालते हैं। कॉम्पिटिटिव सैलरी, प्रोफ़ेशनल डेवलपमेंट और फ़्लेक्सिबल काम के ऑप्शन अभी भी अट्रैक्शन और रिटेंशन के सबसे मज़बूत ड्राइवर बने हुए हैं।

कर्मचारी अब साफ़ करियर पाथ और ज़्यादा ट्रांसपेरेंसी की उम्मीद कर रहे हैं। नौकरी और AI का डर कम करने का एकमात्र रास्ता यही है कि स्किल्स-फ़र्स्ट स्ट्रैटेजी और साफ़ कम्युनिकेशन के जरिए एम्प्लॉयर-एम्प्लॉई के रिश्ते को मज़बूत किया जाए, न कि उस पर दबाव डाला जाए।

डेक्सियन की विशेषज्ञता और भविष्य की वर्कफोर्स का खाका

डेक्सियन, जो टैलेंट और टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस में सबसे आगे है, 70 से ज़्यादा जगहों पर 10,000 प्रोफेशनल्स के साथ इस बदलाव को करीब से देख रही है। 30 सालों की इंडस्ट्री एक्सपर्टाइज़ के साथ डेक्सियन सही टैलेंट को सही टेक्नोलॉजी से जोड़ने का काम कर रही है।

कंपनी का मानना है कि जो ऑर्गनाइज़ेशन इस समय को ट्रांसपेरेंसी और नई टेक्नोलॉजी के ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल के साथ देखेंगे, वही अगली पीढ़ी के वर्कफ़ोर्स मॉडल को आकार दे पाएंगे। 2026 की यह स्टडी दिखाती है कि भविष्य में सिर्फ वही कंपनियां सफल होंगी जो AI के साथ-साथ मानवीय महत्वाकांक्षाओं और लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेंगी।

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