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कानपुर लैंबॉर्गिनी क्रैश: 4 दिन बाद शिवम मिश्रा गिरफ्तार, चंद घंटों में मिली बेल!

शिवम मिश्रा गिरफ्तार

शिवम मिश्रा गिरफ्तार कर लिए गए हैं, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि हाई-प्रोफाइल लैंबॉर्गिनी क्रैश के चार दिन बाद हुई इस गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद उन्हें जमानत भी मिल गई। कानपुर पुलिस ने गुरुवार को तंबाकू टाइकून केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को इस हादसे के सिलसिले में पकड़ा था। पुलिस ने कोर्ट में शिवम की 14 दिन की ज्यूडिशियल रिमांड मांगी थी और दलील दी कि उन्हें जांच में सहयोग न करने और पुलिस से बचने के कारण गिरफ्तार करना पड़ा।

हालांकि, एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) की कोर्ट ने रिमांड देने से इनकार कर दिया और शिवम को 20,000 रुपये के पर्सनल बॉन्ड और इतनी ही राशि के अंडरटेकिंग पर रिहा कर दिया। उनके वकील नरेश चंद्र त्रिपाठी और अनंत शर्मा ने आरोप लगाया कि पुलिस सरकार के दबाव में काम कर रही थी और गिरफ्तारी पूरी तरह से गलत थी।

हाई-स्पीड लैंबॉर्गिनी का कहर और वीआईपी रोड पर मची चीख-पुकार

यह भीषण हादसा रविवार को रिंग वाला चौराहा के पास वीआईपी रोड पर दोपहर करीब 3.15 बजे हुआ था। 10 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाली इटैलियन लग्जरी स्पोर्ट्स कार ‘लैंबॉर्गिनी रेवुएल्टो’ ने रेव-3 मॉल के पास पॉश ग्वालटोली इलाके में पैदल चलने वालों और गाड़ियों को रौंद दिया।

चश्मदीदों के मुताबिक, तेज रफ्तार कार ने पहले एक ऑटोरिक्शा को टक्कर मारी, फिर एक खड़ी रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल को टक्कर मारी जिससे सवार 10 फीट हवा में उछल गया।

इस हादसे में ऑटोरिक्शा ड्राइवर तौसीफ अहमद (मोहम्मद तौफीक), विशाल और सोनू त्रिपाठी सहित करीब छह लोग घायल हुए। कई घायलों के पैरों में गंभीर फ्रैक्चर और चोटें आईं, जिसके बाद गुस्साए स्थानीय लोग पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हो गए।

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आरोपी को बचाने के लिए बाउंसरों का ड्रामा और घटनास्थल पर हाथापाई

हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि दूसरी गाड़ी में सवार बाउंसर तुरंत वहां पहुंचे और लैंबॉर्गिनी की खिड़की तोड़कर शिवम मिश्रा को बाहर निकाला। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्राइवेट सिक्योरिटी वालों ने भीड़ को पीछे धकेलने के लिए बदसलूकी की और शिवम को मौके से अस्पताल ले जाने की कोशिश की, जिससे वहां हाथापाई की स्थिति बन गई।

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने पुष्टि की कि शिवम मिश्रा गिरफ्तार होने से पहले एक्सीडेंट के समय खुद गाड़ी चला रहे थे और उनके बाउंसरों ने ही उन्हें कार से बाहर निकाला था। शुरुआती FIR “अज्ञात ड्राइवर” के खिलाफ दर्ज की गई थी, लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और जांच के बाद शिवम का नाम आरोपी के रूप में जोड़ा गया।

ड्राइवर का ‘फर्जी’ सरेंडर और कोर्ट का सख्त रुख

बुधवार को इस मामले में तब नया मोड़ आया जब मोहन नाम के एक व्यक्ति ने कोर्ट में खुद को ड्राइवर बताते हुए सरेंडर करने की कोशिश की। मोहन ने दावा किया कि एक्सीडेंट के समय वह गाड़ी चला रहा था और बगल में बैठे शिवम को मिर्गी का दौरा पड़ने के कारण वह उन पर गिर पड़े, जिससे कार अनियंत्रित हो गई।

शिवम के परिवार और वकील मृत्युंजय कुमार ने भी दावा किया कि उनके क्लाइंट को मिर्गी की बीमारी है। हालांकि, कोर्ट ने मोहन की सरेंडर एप्लीकेशन को खारिज कर दिया क्योंकि पुलिस ने CCTV फुटेज और चश्मदीदों के आधार पर साबित किया कि गाड़ी शिवम ही चला रहे थे। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह सिस्टम को धोखा देने की एक नाकाम कोशिश थी।

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कानपुर पुलिस का पांच टीमों वाला सर्च ऑपरेशन और मेडिकल चेकअप

शिवम मिश्रा गिरफ्तार करने के लिए कानपुर पुलिस ने शहर में उनकी मौजूदगी के इनपुट मिलने के बाद पांच टीमें गठित की थीं। DCP सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शिवम को ट्रैक करने के लिए पुलिस ने कड़ी मशक्कत की क्योंकि वह पूछताछ के लिए पेश नहीं हो रहे थे।

गिरफ्तारी के बाद शिवम को रूटीन मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया गया, जहाँ के विजुअल्स में वह लंगड़ाते हुए और पुलिसकर्मियों के सहारे चलते हुए दिखे। हालांकि, इससे पहले खबरें आई थीं कि उन्हें दिल्ली के किसी अस्पताल से पकड़ा गया है, लेकिन बाद में पुलिस ने कानपुर से गिरफ्तारी की पुष्टि की। पुलिस अब शिवम की किसी भी अंदरूनी मेडिकल कंडीशन के दावों की सच्चाई का पता लगा रही है।

प्रोसीजरल कमियों पर पुलिस अधिकारी की गाज और महकमे में हड़कंप

इस केस में जांच के दौरान कथित प्रक्रियागत कमियों (Procedural Lapses) के लिए पुलिस ने सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की। ग्वालटोली के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) संतोष गौड़ को उनके पद से हटा दिया गया। उन पर आरोप थे कि उन्होंने शुरू में केस दर्ज करने में देरी की और रसूखदार परिवार के दबाव में नरम रुख अपनाया।

स्थानीय लोगों ने भी आरोप लगाया था कि पुलिस परिवार के असर की वजह से समझौते के लिए दबाव बना रही थी। SHO को हटाए जाने के एक दिन बाद ही पुलिस ने शिवम मिश्रा गिरफ्तार करने में सफलता पाई, जिससे स्पष्ट हुआ कि विभाग पर भी इस मामले को सुलझाने का भारी दबाव था।

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इनकम टैक्स रडार पर ‘बंशीधर एक्सपोर्ट्स’ और लग्जरी गाड़ियों का जखीरा

शिवम मिश्रा, बंशीधर एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक केके मिश्रा के बेटे हैं। यह परिवार पहले से ही सरकारी एजेंसियों के रडार पर है। मार्च 2024 में, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने केके मिश्रा की दिल्ली और कानपुर की संपत्तियों पर छापेमारी की थी, जहाँ से 4.5 करोड़ रुपये कैश और करोड़ों की लग्जरी गाड़ियाँ मिली थीं।

इन गाड़ियों में रोल्स-रॉयस फैंटम, मैकलारेन और पोर्श के अलावा वह लैंबॉर्गिनी भी शामिल थी जो इस हादसे का शिकार हुई। केके मिश्रा की फर्म इलाके में गुटखा निर्माताओं को तंबाकू सप्लाई करती है। इस एक्सीडेंट के बाद शहर में अमीर और प्रभावशाली लोगों की लापरवाही से गाड़ी चलाने को लेकर भारी आक्रोश फैल गया है।

कानूनी लड़ाई और रसूख बनाम न्याय की जंग

भले ही शिवम मिश्रा गिरफ्तार होने के कुछ ही घंटों बाद रिहा हो गए, लेकिन पुलिस ने उनके खिलाफ IPC (भारतीय न्याय संहिता) और मोटर व्हीकल एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। घायलों का आरोप है कि आरोपी के वकील और परिवार अब भी कानूनी कार्रवाई को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। तौफीक अहमद की शिकायत पर दर्ज इस मामले में अब फोरेंसिक जांच के लिए लैंबॉर्गिनी को जब्त कर लिया गया है।

पुलिस ने साफ किया है कि उनके पास शिवम के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं और वे रिमांड अर्जी खारिज होने के बावजूद अपनी जांच जारी रखेंगे। इस घटना ने एक बार फिर वीआईपी रोड पर ट्रैफिक नियमों की सख्ती और रसूखदारों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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