कर्नाटक में बस हड़ताल से बस सेवा ठप रही, कोर्ट ने ‘जताई नाराज़गी’
कर्नाटक में मंगलवार को परिवहन कर्मियों की हड़ताल के चलते बस सेवा ठप रही, जिससे आमजन को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। हालांकि बेंगलुरु शहर पर इसका प्रभाव सीमित रहा, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति बेहद खराब रही।
हड़ताल राज्य सड़क परिवहन निगमों (RTC) की संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) द्वारा वेतन मुद्दों को लेकर बुलाई गई थी। कर्नाटक उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद यह हड़ताल फिलहाल स्थगित कर दी गई है।
राज्यभर में अलग-अलग रहा असर
- बीएमटीसी (Bangalore Metropolitan Transport Corporation) ने करीब 100% परिचालन बनाए रखा।
- केएसआरटीसी, एनडब्ल्यूकेएसआरटीसी और एनईकेआरटीसी की संयुक्त संचालन दर शाम 6 बजे तक 71.9% रही।
- ग्रामीण और आंतरिक क्षेत्रों में बसें बंद होने से यात्री खासे परेशान दिखे।
- लंबी दूरी की बसें सीमित मात्रा में चलती रहीं।
वेतन विवाद की पृष्ठभूमि
इस हड़ताल का मूल कारण 38 महीने के बकाया वेतन की मांग थी, जिसे यूनियनों ने 2020 से 2023 के बीच लंबित बताया।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि सरकार केवल 14 महीनों के वेतन का भुगतान कर सकती है, जो श्रीनिवासमूर्ति समिति की सिफारिशों के अनुरूप है।
यूनियनों की मांगें:
- जनवरी 2020 से फरवरी 2023 तक पूरा बकाया
- जनवरी 2024 से वेतन पुनरीक्षण
- “शक्ति योजना” में योगदान के एवज में उचित वेतन
सरकार और यूनियनों के बीच दो घंटे की बातचीत विफल रही। इसके बाद यूनियनों ने हड़ताल की घोषणा की।
उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणी
हड़ताल पर कर्नाटक हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और कहा कि “Essential Services Maintenance Act (ESMA)” लागू होने के बावजूद हड़ताल जारी रहना अवमानना की श्रेणी में आता है।
कोर्ट के निर्देश:
- यूनियन नेताओं को अवमानना नोटिस की चेतावनी
- हड़ताल स्थगित करने का आदेश
- अंतरिम रोक आदेश को दो दिन के लिए बढ़ाया
- यूनियनों से बुधवार तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
इसके बाद, केएसआरटीसी यूनियन प्रमुख एच.वी. अनंत सुब्बाराव ने सभी कर्मचारियों से ड्यूटी पर लौटने की अपील की।🧑🤝🧑 यात्रियों और निजी ऑपरेटरों की चुनौती
बस सेवा ठप रही तो यात्रियों को निजी साधनों का सहारा लेना पड़ा।
यात्रियों की समस्याएं:
- बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा बस स्टेशन पर यात्रियों की संख्या घटी
- जंबूसावरी दिन्ने के यात्री जीवन कुमार को 45 मिनट इंतजार करना पड़ा
- जयदेव नाइक जैसे यात्रियों को भ्रमित जानकारी से असुविधा
निजी वाहनों की भूमिका:
- कर्नाटक राज्य निजी परिवहन महासंघ ने अतिरिक्त बसें चलाईं
- कॉर्पोरेट व स्कूल बसों को भी सार्वजनिक परिवहन में शामिल किया गया
- जिला प्रशासन ने विकल्प तैयार रखने के आदेश पहले ही जारी किए थे
राजनीतिक प्रतिक्रिया और प्रशासनिक पहल
परिवहन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि निजी ऑपरेटरों की सहायता से हड़ताल के प्रभाव को कम किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों के बीच गुटबाज़ी से सेवा बाधित होती है, और सहयोग से ही समाधान निकलेगा।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
- कर्नाटक में परिवहन हड़तालें कोई नई बात नहीं हैं।
- इससे पहले भी 2021 में बड़ी हड़ताल हुई थी, जिसमें कई दिनों तक सेवा प्रभावित रही थी।
- “शक्ति योजना” के सफल कार्यान्वयन में कर्मियों की भूमिका पहले भी चर्चा में रही है।
कर्नाटक बस हड़ताल ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि संवादहीनता और प्रशासनिक अनदेखी कितनी जल्दी आम जनजीवन को ठप कर सकती है। न्यायालय के हस्तक्षेप से बस सेवा ठप रही स्थिति में सुधार तो आया है, लेकिन जब तक वेतन विवाद का समाधान नहीं होता, संकट की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।



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