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सिद्धारमैया का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: कर्नाटक के सबसे लंबे समय के CM बने

सिद्धारमैया का ऐतिहासिक रिकॉर्ड अब आधिकारिक तौर पर दर्ज हो गया है क्योंकि वे कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता बन गए हैं। 77 वर्षीय कद्दावर नेता सिद्धारमैया ने सामाजिक न्याय और भूमि सुधारों के प्रतीक माने जाने वाले दिवंगत देवराज उर्स के दशकों पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है। अपने दूसरे कार्यकाल में सेवा दे रहे सिद्धारमैया ने 6 जनवरी को उर्स के 2,792 दिनों के कार्यकाल की बराबरी की थी और 7 जनवरी को वह इस आंकड़े को पार कर राज्य के निर्विवाद ‘रिकॉर्ड होल्डर’ बन गए। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस उपलब्धि को स्वीकार करते हुए उन्हें “शुभकामनाएं” दीं। मुख्यमंत्री ने इसे लोगों का आशीर्वाद और एक सुखद इत्तेफाक बताया है।

देवराज उर्स के दो कार्यकालों का आंकड़ा पीछे छूटा

कर्नाटक के राजनीतिक इतिहास में देवराज उर्स का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। उर्स ने दो अलग-अलग कार्यकालों में मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था। उनका पहला कार्यकाल 20 मार्च, 1972 से 31 दिसंबर, 1977 तक रहा, जो कुल 2,113 दिनों का था। इसके बाद वह 28 फरवरी, 1978 से 7 जनवरी, 1980 तक दोबारा मुख्यमंत्री रहे, जिसमें उन्होंने 679 दिन पूरे किए। इस प्रकार उनका कुल कार्यकाल 2,792 दिनों का रहा था। सिद्धारमैया ने अब इस आंकड़े को पार कर लिया है। सिद्धारमैया उर्स के बाद राज्य के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री भी हैं जिन्होंने अपना पांच साल का पूरा कार्यकाल सफलतापूर्वक संपन्न किया है।

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पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले इकलौते आधुनिक नेता

सिद्धारमैया की राजनीतिक यात्रा स्थिरता की मिसाल रही है। 13 मई, 2013 से 15 मई, 2018 तक अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने 1,829 दिनों तक मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा की। इसके बाद, 20 मई, 2023 को उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली और तब से अब तक उन्होंने 963 दिन पूरे कर लिए हैं। इन दोनों कार्यकालों को मिलाकर सिद्धारमैया का ऐतिहासिक सफर अब कर्नाटक के किसी भी अन्य नेता से लंबा हो गया है। यह उपलब्धि सत्ताधारी कांग्रेस के लिए एक संवेदनशील समय पर आई है, क्योंकि सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा पड़ाव पार कर लिया है।

सत्ता-साझेदारी की अटकलों के बीच ‘गुड लक’ और हाईकमान का रुख

इस ऐतिहासिक मील के पत्थर के समय ही कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन और डीके शिवकुमार के साथ संभावित सत्ता-साझेदारी समझौते को लेकर अटकलें तेज हैं। जब उपमुख्यमंत्री शिवकुमार से सिद्धारमैया की इस उपलब्धि पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छी चीजें हों। मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। गुड लक।” हालांकि, उन्होंने मीडिया पर भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी के भीतर कोई मतभेद नहीं है। वहीं, सिद्धारमैया ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि वह अपना कार्यकाल पूरा करने की उम्मीद रखते हैं, लेकिन अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान का होगा। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि हाईकमान कब फैसला करेगा, लेकिन मुझे भरोसा है।”

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बीजेपी का तीखा हमला: ‘अचीवमेंट नहीं, कुशासन का रिकॉर्ड’

जहाँ एक तरफ कांग्रेस खेमा जश्न मना रहा है, वहीं विपक्षी दल बीजेपी ने इस मौके पर सिद्धारमैया पर चौतरफा हमला बोला है। बीजेपी की कर्नाटक इकाई ने ‘X’ पर एक लंबी पोस्ट में सिद्धारमैया को “निवर्तमान मुख्यमंत्री” संबोधित करते हुए कहा कि यह रिकॉर्ड उनकी उपलब्धियों का नहीं बल्कि भ्रष्टाचार और कुशासन का है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया के कार्यकाल में सरकारी स्कूल बंद हुए, किसानों की आत्महत्याएं बढ़ीं और भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित हुए। पार्टी ने लोकायुक्त को कमजोर करने, टीपू जयंती मनाने और राज्य पर भारी कर्ज का बोझ लादने जैसे मुद्दों पर मुख्यमंत्री को घेरते हुए कहा कि कन्नड़ भाषी लोग इस ‘बुरे दौर’ को कभी नहीं भूलेंगे।

भ्रष्टाचार के आरोप और ‘हब्लोट घड़ी’ विवाद का फिर हुआ जिक्र

बीजेपी ने अपने हमले में सिद्धारमैया का ऐतिहासिक कार्यकाल भ्रष्टाचार की ऊंची दरों के लिए याद किए जाने की बात कही। विपक्ष ने मुडा (MUDA) जमीन आवंटन और वाल्मीकि कॉर्पोरेशन के कथित घोटालों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री पर निशाना साधा। राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने तो यहां तक कह दिया कि सिद्धारमैया का कार्यकाल देवराज उर्स की तरह “लगातार” नहीं रहा है, क्योंकि वे 2018 में सत्ता से बाहर हो गए थे और अपनी चामुंडेश्वरी सीट भी हार गए थे। बीजेपी ने पुराने ‘हब्लोट घड़ी’ विवाद और कानून-व्यवस्था में गिरावट का आरोप लगाते हुए कहा कि यह उपलब्धि लिम्का बुक या गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भी योग्य नहीं है।

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वकालत से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक: एक समाजवादी का सफर

सिद्धारमैया की यात्रा एक गरीब किसान परिवार से शुरू होकर मुख्यमंत्री निवास तक पहुंची है। दो दशकों से अधिक समय तक ‘जनता परिवार’ से जुड़े रहने वाले सिद्धारमैया डॉ. राम मनोहर लोहिया के समाजवादी आदर्शों से प्रभावित रहे। एक समय वह कट्टर कांग्रेस विरोधी थे, लेकिन 2005 में देवेगौड़ा की जेडी(एस) से निष्कासन के बाद उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा। नौ बार के विधायक सिद्धारमैया ने 16 बार राज्य का बजट पेश करने का भी रिकॉर्ड बनाया है। सिद्धारमैया का ऐतिहासिक व्यक्तित्व उनके ‘अहिंदा’ (अल्पसंख्यकों, पिछड़ों और दलितों) राजनीति के प्रति समर्पण से बना है। उन्होंने कहा कि उनका मकसद रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि गरीबों और शोषितों को न्याय दिलाना है।

‘नाती कोली’ और जश्न: समर्थकों ने दी सामुदायिक दावतें

इस उपलब्धि का जश्न पूरे राज्य में अनोखे अंदाज में मनाया गया। सिद्धारमैया के समर्थकों ने कई जगहों पर सामुदायिक दावतों का आयोजन किया, जहाँ मुख्यमंत्री का पसंदीदा व्यंजन ‘नाती कोली’ (देसी चिकन) और ‘रागी मुड्डे’ परोसा गया। सिद्धारमैया ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा कि वह एक गांव से आते हैं और उनके गांव में मेहमानों के लिए यही व्यंजन बनाए जाते हैं। उन्होंने कहा, “क्योंकि मैं मुख्यमंत्री हूं, इसलिए इसे पब्लिसिटी मिल रही है।” समर्थकों के बीच इस जश्न ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सिद्धारमैया का ऐतिहासिक नेतृत्व जमीन पर आज भी उतना ही लोकप्रिय है जितना एक दशक पहले था।

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