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कर्नाटक जाति जनगणना: तकनीकी दिक्कतें खत्म, गणना कार्य में तेज़ी

गणना कार्य में तेज़ी

बेंगलुरु, 26 सितंबर, 2025: कर्नाटक के बहुचर्चित सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण, जिसे व्यापक रूप से “जाति जनगणना” कहा जाता है, में आ रही तकनीकी बाधाएँ अब लगभग खत्म हो गई हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को घोषणा की कि तकनीकी समस्याएँ “लगभग सुलझ गई हैं” और अब सर्वेक्षण पूरी तरह से आगे बढ़ेगा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि गणना कार्य में तेज़ी लानी होगी, और यह सर्वेक्षण निर्धारित समय सीमा यानी 7 अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा और इस बात पर ज़ोर दिया कि इसमें कोई विस्तार नहीं होगा।

राज्य भर में 22 सितंबर से शुरू हुए इस सर्वेक्षण की धीमी गति को लेकर चिंताएँ जताई गई थीं, क्योंकि तकनीकी गड़बड़ियाँ और सर्वर की समस्याएँ डेटा संग्रह को प्रभावित कर रही थीं। शुरुआत के चार दिनों के सर्वेक्षण कार्य के बाद भी, समस्याएँ अनसुलझी थीं, जिससे 7 अक्टूबर की निर्धारित समय सीमा तक सर्वेक्षण पूरा करना मुश्किल हो रहा था।

मुख्यमंत्री ने ली महत्वपूर्ण बैठक: लापरवाह अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

इन समस्याओं के समाधान और सर्वेक्षण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार सुबह 11:30 बजे राज्य भर के जिला अधिकारियों (डीसी) और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ एक महत्वपूर्ण वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग बैठक की अध्यक्षता की।

इस बैठक में, सिद्धारमैया ने मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, और पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष मधुसूदन आर नाइक के साथ प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी डीसी और सीईओ को निर्देश दिया कि वे सर्वेक्षण को “बहुत गंभीरता से” लें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह समय सीमा के भीतर पूरा हो जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, सर्वेक्षण अवधि बढ़ाने का कोई सवाल ही नहीं है।”

राज्य मंत्रिमंडल ने इससे पहले सर्वेक्षण को प्रभावित करने वाली तकनीकी और परिचालन संबंधी खामियों पर चर्चा की थी और मंत्रियों ने सामाजिक और शैक्षिक दोनों सर्वेक्षणों में अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को मंजूरी दी है। बेंगलुरु में, ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण को लापरवाह कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है।

तकनीकी बाधाएँ दूर, अब 90 प्रतिशत काम हुआ ठीक

मुख्यमंत्री ने बताया कि शुरुआती तकनीकी गड़बड़ियों, जिनकी वजह से चार दिनों तक काम धीमा रहा, को “90 प्रतिशत हल” कर लिया गया है और बाकी समस्याओं को दिन के अंत तक ठीक कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “सर्वेक्षण कार्य 22 सितंबर को शुरू हुआ था और 7 अक्टूबर तक पूरा हो जाएगा। कुछ तकनीकी समस्याएँ हैं, जिनका समाधान किया जाना है। वे लगभग सुलझ गई हैं। इसलिए, सर्वेक्षण कार्य आज से पूरी तरह से शुरू होगा।”

सिद्धारमैया ने अधिकारियों से कहा, “आज से, हमारे अनुमानों के अनुसार, सर्वेक्षण कार्य तेज़ कर दिया जाएगा।” उन्होंने सभी 1.43 करोड़ परिवारों को कवर करने के लिए कम से कम 10 प्रतिशत की दैनिक प्रगति का आग्रह किया। अधिकारियों के अनुसार, अब तक केवल 2.76 लाख परिवारों का ही सर्वेक्षण किया गया है। बेंगलुरु पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहाँ आज से बीबीएमपी सीमा के भीतर लगभग 50 लाख परिवारों को शामिल करते हुए गणना शुरू हो रही है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “राज्य के हर एक परिवार का सर्वेक्षण किया जाना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी घर छूट न जाए।”

गणनाकार शिक्षकों को सख्त चेतावनी, हाईकोर्ट की शर्तों का होगा पालन

इस सर्वेक्षण में लगभग 1.75 लाख गणनाकर्ता शामिल होंगे, जिनमें ज़्यादातर सरकारी स्कूल के शिक्षक हैं, जो राज्य भर के लगभग 2 करोड़ घरों के लगभग 7 करोड़ लोगों को कवर करेंगे। इन गणनाकर्ताओं को कई जगहों पर सर्वेक्षण ऐप में तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। अधिकारियों ने बताया कि सर्वर की समस्या, ओटीपी जनरेट करने में विफलता और नेटवर्क में व्यवधान के कारण आँकड़ा संग्रह प्रभावित हुआ है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 1.2 लाख से ज़्यादा शिक्षकों को गणनाकार के रूप में तैनात किया गया है और लापरवाही बरतने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। साथ ही, उन्होंने आश्वासन दिया कि उनका मानदेय जारी कर दिया गया है। पहाड़ी इलाकों में, सर्वेक्षण केंद्र स्कूलों से संचालित होंगे और गणनाकार बंद घरों का फिर से दौरा करेंगे।

सिद्धारमैया ने स्थानीय आईटी कर्मचारियों को तकनीकी समस्याओं का समाधान करने का निर्देश दिया और हर तालुका के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया। क्षेत्रीय आयुक्तों को 7 अक्टूबर की समय सीमा तक सर्वेक्षण पूरा करने के लिए प्रतिदिन प्रगति की निगरानी करने को कहा गया है।

सर्वेक्षण की लागत और न्यायिक स्थिति

कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा किया जा रहा यह सर्वेक्षण 420 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जा रहा है और इसमें 60 प्रश्नों वाली प्रश्नावली का उपयोग किया जा रहा है, जिसे “वैज्ञानिक रूप से” किया जा रहा है। आयोग द्वारा दिसंबर तक सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने की उम्मीद है।

इस बीच, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गुरुवार को सर्वेक्षण रोकने से इनकार कर दिया, लेकिन राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को एकत्रित आँकड़ों की गोपनीयता बनाए रखने और नागरिकों की स्वैच्छिक भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया, “न्यायालय द्वारा लगाई गई सभी शर्तों का पालन किया जाएगा।”

मंत्री एच.के. पाटिल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की बैठक में समाधान खोजने और अधिकारियों को उचित मार्गदर्शन सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, साथ ही जहाँ भी आवश्यक हो, ज़िला स्तर पर सख्त कदम उठाए जाएँगे ताकि गणना कार्य में तेज़ी लाई जा सके।

अधिकारियों के अनुसार अगले चरण में भी गणना कार्य में तेज़ी बनाए रखने की पूरी तैयारी है।

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