मुकेश अंबानी को US परमिट मिलने से रिलायंस खरीदेगी वेनेजुएला का तेल
भारतीय कॉर्पोरेट जगत और वैश्विक ऊर्जा बाजार से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के चेयरमैन मुकेश अंबानी को US परमिट मिल गया है, जिसके तहत यूनाइटेड स्टेट्स सरकार ने कंपनी को एक ‘जनरल लाइसेंस’ जारी किया है। इस ऐतिहासिक अनुमति के बाद अब रिलायंस बिना किसी अमेरिकी पाबंदी का उल्लंघन किए सीधे वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद कर सकेगी।
यह कदम न केवल रिलायंस के लिए फायदेमंद है, बल्कि इससे वैश्विक तेल आपूर्ति के समीकरण भी बदल सकते हैं।
गुजरात के जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल-साइट रिफाइनरी चलाने वाली इस कंपनी ने पिछले महीने ही इस परमिट के लिए आवेदन किया था, जिसे अब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग से हरी झंडी मिल गई है।
प्रतिबंधों में ढील और वेनेजुएला के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव
वॉशिंगटन द्वारा वेनेजुएला के एनर्जी सेक्टर पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने का यह फैसला वहां के अंदरूनी राजनीतिक बदलावों के बाद लिया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की स्थिति में आए बदलावों के बाद, U.S. अधिकारियों ने कहा कि वेनेजुएला की तेल इंडस्ट्री के लिए $100 बिलियन के बड़े रिकंस्ट्रक्शन प्लान और $2 बिलियन की तेल सप्लाई डील को आसान बनाने के लिए पाबंदियां कम की जा रही हैं।
यह जनरल लाइसेंस वेनेजुएला के उस तेल की खरीद, एक्सपोर्ट और बिक्री को मंज़ूरी देता है जिसे पहले ही निकाला जा चुका है। इसमें ऐसे तेल की रिफाइनिंग भी शामिल है, जिससे रिलायंस को सीधे तौर पर बड़ा लाभ होने की उम्मीद है।
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रूसी तेल की जगह लेगा वेनेजुएला का सस्ता क्रूड ऑयल
वैश्विक कूटनीति के लिहाज से यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। एक सूत्र के अनुसार, मुकेश अंबानी को US परमिट मिलने से रिलायंस को रूसी तेल को कॉस्ट-इफेक्टिव तरीके से बदलने में मदद मिलेगी।
चूंकि काराकास (वेनेजुएला) से हेवी क्रूड ऑयल भारी डिस्काउंट पर मिलता है, इसलिए रिलायंस की रिफाइनिंग लागत में बड़ी कमी आएगी।
रिफाइनिंग और ट्रेड सूत्रों का कहना है कि रिलायंस समेत भारतीय रिफाइनर फिलहाल रूस से तेल खरीदने से बच रहे हैं, जिससे नई दिल्ली को वॉशिंगटन के साथ ट्रेड समझौता करने में मदद मिल सकती है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में भारत पर से 25% प्यूनिटिव टैरिफ हटाते हुए संकेत दिया था कि भारत अब अमेरिका और शायद वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदेगा।
जामनगर रिफाइनरी की क्षमता और वेनेजुएला के तेल का पुराना रिश्ता
रिलायंस इंडस्ट्रीज वेनेजुएला के कच्चे तेल की पुरानी और अहम ग्राहक रही है।
2025 की शुरुआत में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इसे खरीदना बंद करने से पहले, रिलायंस अपने एडवांस्ड रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के लिए नियमित रूप से वहां से तेल मंगाती थी। कंपनी के पास दो रिफाइनरियां हैं जिनकी कुल क्षमता लगभग 1.4 मिलियन बैरल प्रति दिन है।
मुकेश अंबानी को US परमिट जारी होने से जामनगर रिफाइनरी की ‘कॉम्पिटिटिव एज’ और बढ़ जाएगी। 2012 में रिलायंस ने पेट्रोलियोस डी वेनेजुएला SA के साथ हर दिन 400,000 बैरल तेल के लिए टर्म डील की थी और 2019 में कंपनी वेनेजुएला के कुल तेल निर्यात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा खरीद रही थी।
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मुकेश अंबानी की कंपनी को पहली भारतीय रिफाइनर के रूप में मिली मंजूरी
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे खास बात यह है कि रिलायंस इस कोशिश में अमेरिकी मंजूरी पाने वाली पहली भारतीय रिफाइनर बन गई है। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी पेट्रोलियम कंपनियों से भी लैटिन अमेरिकी देश में अपनी मौजूदगी बढ़ाने को कहा है।
जहां एक तरफ रिलायंस को सीधे खरीद का लाइसेंस मिला है, वहीं भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (IOC, BPCL) से भी अमेरिका और वेनेजुएला से अधिक क्रूड खरीदने पर विचार करने को कहा है।
रिफाइनरी अधिकारियों के अनुसार, अब स्पॉट मार्केट से तेल मांगते समय अमेरिकी ग्रेड और वेनेजुएला के तेल को प्राथमिकता दी जाएगी, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है।
रिफाइनिंग मार्जिन और पेट्रोकेमिकल बिजनेस को मिलेगा बूस्ट
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल (Heavy Crude) रिलायंस के रिफाइनिंग मार्जिन को ऑप्टिमाइज़ करने में गेम-चेंजर साबित होगा। इस तेल को डीजल, केरोसिन और LPG जैसे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स में आसानी से अपग्रेड किया जा सकता है, जिनकी भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है।
इसके अलावा, सस्ते कच्चे तेल तक पहुंच होने से रिलायंस के पेट्रोकेमिकल मार्जिन को भी मजबूती मिलेगी, क्योंकि इसे पॉलिमर और स्पेशलिटी केमिकल्स में बदला जा सकता है। मुकेश अंबानी को US परमिट मिलने का यह फैसला सीधे तौर पर कंपनी के वित्तीय मुनाफे और शेयरधारकों के हितों से जुड़ा हुआ है।
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ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत और अमेरिका का नया तालमेल
यह विकास भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ट्रेड डील का ही परिणाम माना जा रहा है। अमेरिका ने भारतीय सामानों के निर्यात पर से 25 परसेंट टैरिफ इस शर्त पर हटाया था कि नई दिल्ली रूस पर अपनी निर्भरता कम करेगी। इसी महीने रिलायंस ने ट्रेडर विटोल से 2 मिलियन बैरल वेनेजुएला का तेल खरीदा है।
विटोल और ट्रैफिगुरा जैसी कंपनियों को भी मार्केटिंग और बिक्री के लिए अमेरिकी लाइसेंस दिए गए हैं।
यह लाइसेंस रिलायंस की क्रूड ऑयल सोर्सिंग रणनीति को विविधता प्रदान करने की कोशिशों का हिस्सा है, जिससे वह वैश्विक तेल बाजार के उतार-चढ़ाव से खुद को सुरक्षित रख सकेगी।
भविष्य की संभावनाएं और तेल उत्पादन की स्थिति
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि वेनेजुएला जल्द ही बहुत बड़ी मात्रा में क्रूड का उत्पादन शुरू नहीं कर पाएगा, लेकिन रिलायंस जैसी आधुनिक रिफाइनरी के लिए सीमित सप्लाई भी एक बड़ा अवसर है।
रिलायंस के अलावा भारत में नायारा (वडिनार), IOC और HPCL-Mittal Energy Limited (HEML) के पास भी खट्टे और भारी तेल (Sour and Heavy Oil) को प्रोसेस करने की क्षमता है।
लेकिन रिलायंस का एडवांस्ड सेटअप उसे इस क्षेत्र में सबसे आगे रखता है। अंततः, अमेरिका द्वारा दिया गया यह जनरल लाइसेंस वैश्विक तेल बाजार के डायनामिक्स को बदलने और भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों को एक नई दिशा देने में मील का पत्थर साबित होगा।
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