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मुंबई मेयर: मराठी अस्मिता पर छिड़ा संग्राम, फडणवीस और मलिक के बड़े दावे

मुंबई मेयर मराठी अस्मिता

मुंबई की राजनीति में भाषाई पहचान और स्थानीय गौरव का मुद्दा एक बार फिर ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ा है। मुंबई मेयर: मराठी अस्मिता के सवाल ने चुनावी माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। शिवसेना (UBT) नेता अखिल चित्रे ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा है कि मुंबई जैसे शहर के लिए एक गैर-मराठी डिप्टी मेयर की नियुक्ति क्यों की गई?

चित्रे का यह तीखा सवाल न केवल BJP की रणनीतियों पर चोट करता है, बल्कि आगामी बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों के लिए एक नई वैचारिक लड़ाई की नींव भी रखता है।

सोशल मीडिया पर एक ट्वीट के जरिए उन्होंने BJP की कड़ी आलोचना की और स्पष्ट किया कि शिवसेना ने आज तक जितने भी मेयर दिए हैं, वे सभी मराठी रहे हैं और भविष्य में भी मुंबई का मेयर केवल मराठी ही होगा।

डिप्टी मेयर की नियुक्ति पर शिवसेना का तीखा प्रहार

अखिल चित्रे के बयानों ने महाराष्ट्र की राजधानी में एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस शहर के विकास और संस्कृति में मराठी मानस का खून-पसीना लगा है, वहां प्रशासन के शीर्ष पदों पर गैर-मराठी चेहरे क्यों थोपे जा रहे हैं?

चित्रे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर मराठी लोगों की भावनाओं को नजरअंदाज कर फैसले लिए गए, तो शिवसेना चुप नहीं बैठेगी। उनका कहना है कि शिवसेना हमेशा से मराठी अधिकारों के लिए लड़ती आई है और यह लड़ाई भविष्य में और भी तीव्रता से जारी रहेगी।

इस मुद्दे पर शिवसैनिकों का भारी समर्थन मिल रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि मुंबई मेयर: मराठी अस्मिता का नारा आने वाले निगम चुनावों में वोटिंग का मुख्य आधार बन सकता है।

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नवाब मलिक का बड़ा दावा: NCP के बिना मेयर संभव नहीं

दूसरी ओर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दिग्गज नेता नवाब मलिक ने एक अलग मोर्चा खोल दिया है। करीब साढ़े तीन साल बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मलिक ने स्पष्ट किया कि BMC में NCP के समर्थन के बिना किसी भी पार्टी का मेयर बनना नामुमकिन है।

उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि पार्टी ने मुंबई के 94 वार्डों में अपने उम्मीदवार उतारे हैं। मलिक ने झारखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वहां एक सीट से सरकार बन सकती है, तो मुंबई में 30 सीटों के साथ NCP निश्चित रूप से मेयर पद पर अपना दावा पेश करेगी। उन्होंने घोषणा की कि 16 जनवरी को होने वाले चुनावों में NCP की असली ताकत सबके सामने आ जाएगी।

उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक और क्षेत्रीय विविधता

NCP चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नवाब मलिक ने बताया कि पार्टी ने टिकट वितरण में ‘भूमिपुत्रों’, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और शिक्षित पेशेवरों जैसे डॉक्टर, इंजीनियर और वकीलों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि कई पार्टियां उत्तर भारतीयों को अपना ‘बंधुआ वोटर’ मानती हैं, लेकिन NCP ने इस बार सबसे ज्यादा टिकट उत्तर भारतीयों को दिए हैं।

मलिक के अनुसार, “शहर में रहने वाला हर व्यक्ति मराठी है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी ने महिलाओं को सबसे अधिक प्रतिनिधित्व दिया है और धारावी व रमाबाई अंबेडकर नगर जैसे क्षेत्रों में स्वतंत्र उम्मीदवारों का समर्थन किया है।

सीएम फडणवीस का पलटवार: हिंदू और मराठी होगा मेयर

विवाद तब और गहरा गया जब मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित सातम ने बयान दिया कि उनकी पार्टी किसी भी “खान” को मुंबई का मेयर नहीं बनने देगी। इस बयान पर शिवसेना (UBT) और MNS की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। अब इस बहस में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी कूद पड़े हैं।

एक न्यूज़ चैनल के ‘महाचवड़ी’ कार्यक्रम में अंडरग्राउंड मेट्रो में सफर करते हुए सीएम फडणवीस ने स्पष्ट किया कि “मुंबई का मेयर महायुति से होगा और वह एक हिंदू और मराठी व्यक्ति ही होगा।” मुख्यमंत्री ने इस बयान से BJP के रुख को और मजबूती प्रदान की है, जिससे चुनावी ध्रुवीकरण की संभावना बढ़ गई है।

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कृपाशंकर सिंह के बयान पर मुख्यमंत्री की सफाई

उत्तर भारतीय वोट बैंक को लेकर चल रही खींचतान के बीच, पूर्व मंत्री कृपाशंकर सिंह की कथित टिप्पणियों पर भी स्पष्टीकरण आया है। सिंह ने मीरा भायंदर नगर निगम में “उत्तर भारतीय और हिंदी भाषी” मेयर बनाने की बात कही थी।

इस पर सीएम फडणवीस ने साफ किया कि सिंह ने यह टिप्पणी मुंबई के संदर्भ में नहीं की थी और वे पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता भी नहीं हैं। फडणवीस का यह स्पष्टीकरण मुंबई मेयर: मराठी अस्मिता को लेकर उठ रहे सवालों को शांत करने और मराठी वोटरों को साधने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

चुनाव आयोग और धांधली के गंभीर आरोप

नवाब मलिक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कुछ चुनाव अधिकारियों पर मनमानी करने और नामांकन पत्रों की जांच में अनियमितता बरतने का आरोप लगाया। मलिक ने दावा किया कि अयोग्य उम्मीदवारों के नामांकन स्वीकार किए गए, जिनमें एक नगर निगम विक्रेता और अवैध निर्माण में संलिप्त व्यक्ति शामिल हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि इन गंभीर अनियमितताओं के खिलाफ NCP कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। मलिक ने विशेष रूप से M-वार्ड, विक्रोली और S-वार्ड के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त की है।

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15 जनवरी को मतदान: राज ठाकरे और उद्धव की एकजुटता

मुंबई की राजनीति का पारा उस समय और बढ़ गया जब चचेरे भाई उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच एक नई राजनीतिक समझ देखने को मिली। MNS प्रमुख राज ठाकरे ने भी हुंकार भरते हुए कहा है कि “मुंबई का मेयर मराठी होगा, और वह हमारा होगा।

” 29 नगर निगमों के लिए 15 जनवरी को होने वाले मतदान और 16 जनवरी को होने वाली मतगणना से पहले, मुंबई मेयर: मराठी अस्मिता का मुद्दा सबसे ऊपर है। चाहे वह महायुति हो, शिवसेना (UBT) हो या NCP, हर कोई खुद को मुंबई के असली रक्षक के रूप में पेश कर रहा है। अब 16 जनवरी को ही साफ होगा कि मुंबई की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगती है।

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