मुंबई पुलिस रिश्वत कांड: कुरार पुलिस स्टेशन में ACB का बड़ा एक्शन!
मुंबई पुलिस रिश्वत कांड ने एक बार फिर महानगर के पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है, जब एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने कुरार पुलिस स्टेशन के दो वरिष्ठ अधिकारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। 18 फरवरी 2026 की शाम को हुई इस कार्रवाई में सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर संजीव बलिराम तावड़े और पुलिस सब-इन्स्पेक्टर (PSI) ज्ञानेश्वर गोविंदराव जुन्ने को ₹1 लाख की रिश्वत स्वीकार करते हुए पकड़ा गया।
यह कार्रवाई उस समय हुई जब भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान तेज है। आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस गिरफ्तारी ने न केवल कुरार इलाके में बल्कि पूरी मुंबई पुलिस फोर्स में डर और चर्चा का माहौल पैदा कर दिया है, क्योंकि गिरफ्तार अधिकारी काफी अनुभवी माने जाते थे।
धोखाधड़ी और यौन शोषण के केस को रफा-दफा करने की थी साजिश: क्या था पूरा मामला?
इस मुंबई पुलिस रिश्वत कांड की जड़ें एक पुराने विवाद में छिपी हैं। शिकायतकर्ता के खिलाफ कुरार पुलिस स्टेशन में वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Fraud) की एक शिकायत दर्ज थी। इसके साथ ही, 22 जनवरी 2026 को शिकायतकर्ता के भाई के खिलाफ यौन शोषण का एक मौखिक आरोप भी लगाया गया था।
इन दोनों ही मामलों में कानूनी कार्रवाई से बचने और केस को रफा-दफा करने के बदले में आरोपी अधिकारियों ने भारी रकम की मांग की थी।
सीनियर इंस्पेक्टर तावड़े ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता को पुलिस स्टेशन बुलाया और दबाव बनाया कि यदि वह जेल नहीं जाना चाहता, तो उसे कीमत चुकानी होगी। यह सीधे तौर पर पद का दुरुपयोग और आम जनता को डराकर वसूली करने का क्लासिक मामला बनकर उभरा है।
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₹3 लाख की डिमांड और ₹2 लाख की पहली किश्त: कैसे बुना गया भ्रष्टाचार का जाल?
ACB की जांच में सामने आया कि मुंबई पुलिस रिश्वत कांड के इन मुख्य किरदारों ने कुल ₹3 लाख की रिश्वत मांगी थी। इसमें से ₹2 लाख की राशि शिकायतकर्ता पहले ही दे चुका था, लेकिन अधिकारियों की भूख यहीं खत्म नहीं हुई। वे बाकी बचे ₹1 लाख के लिए लगातार दबाव बना रहे थे।
2 फरवरी को PSI जुन्ने ने शिकायतकर्ता के प्रतिनिधि के माध्यम से संपर्क किया और अंतिम भुगतान की मांग की। बार-बार की जा रही इस डिमांड से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने 3 फरवरी 2026 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) का दरवाजा खटखटाया। ACB ने तुरंत मामले की गंभीरता को समझा और जाल बिछाने की तैयारी शुरू कर दी ताकि इन ‘वर्दीधारी अपराधियों’ को कानून के शिकंजे में लाया जा सके।
ACB का जाल और रंगे हाथों गिरफ्तारी: कुरार पुलिस स्टेशन में ‘वो’ आखिरी एक लाख रुपये
शिकायत मिलने के बाद, ACB की टीम ने 4 और 16 फरवरी को स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में रिश्वत की मांग का सत्यापन (Verification) किया। पुष्टि होने के बाद, 18 फरवरी की शाम को कुरार पुलिस स्टेशन में जाल बिछाया गया। जैसे ही PSI ज्ञानेश्वर जुन्ने ने ₹1 लाख की नकद राशि स्वीकार की, पहले से तैनात ACB टीम ने उन्हें दबोच लिया।
इसके तुरंत बाद सीनियर इंस्पेक्टर संजीव तावड़े को भी हिरासत में ले लिया गया। मुंबई पुलिस रिश्वत कांड की इस कार्रवाई के दौरान पुलिस स्टेशन के भीतर ही सन्नाटा पसर गया। ACB के अधिकारियों ने मौके पर ही पंचनामा किया और रिश्वत की रकम को जब्त कर लिया, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ एक निर्णायक जीत साबित हुई।
केबिन से मिले ₹6.34 लाख कैश: सीनियर इंस्पेक्टर तावड़े के दफ्तर में नोटों का अंबार?
गिरफ्तारी के बाद जब ACB ने सीनियर इंस्पेक्टर तावड़े के ऑफिस केबिन और उनके वाहन की तलाशी ली, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। अधिकारियों को वहां से ₹6,34,000 की बेहिसाब नकदी बरामद हुई। यह पैसा कहाँ से आया और इसका स्रोत क्या था, इसकी जांच अभी जारी है।
मुंबई पुलिस रिश्वत कांड का यह पहलू संकेत देता है कि यह केवल एक बार की घटना नहीं थी, बल्कि शायद लंबे समय से चल रहे किसी संगठित वसूली रैकेट का हिस्सा थी। तावड़े के दो मोबाइल फोन और जुन्ने का एक फोन भी जब्त किया गया है, ताकि उनके कॉल रिकॉर्ड्स और चैट्स के जरिए अन्य संलिप्त लोगों का पता लगाया जा सके। नोटों की बरामदगी ने मामले को और अधिक संगीन बना दिया है।
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आरोपी संजीव तावड़े का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड: क्या पहले भी रहे हैं विवादों में?
संजीव तावड़े कोई नए अधिकारी नहीं हैं, वे 1992 में पुलिस बल में शामिल हुए थे और दहिसर, कांदिवली जैसे महत्वपूर्ण थानों में सेवा दे चुके हैं। हालांकि, मुंबई पुलिस रिश्वत कांड में उनका नाम आना पहली बार नहीं है। 2020 में दहिसर पुलिस स्टेशन में तैनाती के दौरान उन पर सीबीआई (CBI) ने जमीन हड़पने और फर्जी सबूत गढ़ने के एक मामले में FIR दर्ज की थी।
उस समय उन्हें निलंबित भी किया गया था, लेकिन बाद में वे बहाल हो गए और कुरार में पोस्टिंग पा ली। उनके पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए अब वरिष्ठ अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि उनकी बहाली और पोस्टिंग की प्रक्रिया में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई थी, जो विभाग की छवि के लिए घातक साबित हुई।
कोर्ट ने भेजा 23 फरवरी तक हिरासत में: अब खुलेगा भ्रष्टाचार का पूरा नेटवर्क?
गिरफ्तारी के बाद दोनों अधिकारियों को गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को एसीबी कोर्ट में पेश किया गया। सरकारी वकील ने तर्क दिया कि आरोपियों से पूछताछ करना जरूरी है ताकि यह पता चल सके कि क्या इसमें कोई और बड़ा अधिकारी या बिचौलिया शामिल था।
कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए संजीव तावड़े और ज्ञानेश्वर जुन्ने को 23 फरवरी तक ACB की हिरासत में भेज दिया है। मुंबई पुलिस रिश्वत कांड की इस जांच में अब मनी ट्रेल और पिछले भुगतान के सुराग ढूंढे जा रहे हैं। ACB की टीमें अब आरोपियों के आवासों की भी तलाशी ले रही हैं ताकि अनुपातहीन संपत्ति (Disproportionate Assets) का पता लगाया जा सके।
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खाकी पर बढ़ता दाग और सिस्टम की सफाई की जरूरत
अंततः, मुंबई पुलिस रिश्वत कांड का यह मामला हमें याद दिलाता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें सिस्टम में कितनी गहरी हो सकती हैं। जब रक्षक ही रिश्वत के लालच में भक्षक बन जाएं, तो आम आदमी न्याय के लिए कहाँ जाएगा? कुरार पुलिस स्टेशन की यह घटना मुंबई पुलिस की छवि के लिए एक बड़ा झटका है, लेकिन साथ ही यह ACB की मुस्तैदी को भी दर्शाती है।
हाल के दिनों में वडाला टीटी और शिवाजीनगर पुलिस थानों में भी ऐसी ही कार्रवाइयां हुई हैं, जो बताती हैं कि सफाई का काम जारी है। जनता को जागरूक रहने और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है ताकि खाकी की गरिमा और कानून का शासन बना रहे।
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