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नासिक में संविधान अपमान का आरोप: मंत्री महाजन को घेरा

संविधान अपमान का आरोप

संविधान अपमान का आरोप नासिक के पुलिस परेड ग्राउंड पर आयोजित गणतंत्र दिवस 2026 के आधिकारिक समारोह में उस समय एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई, जब ड्यूटी पर तैनात दो महिला वन अधिकारियों ने सीधे कैबिनेट मंत्री के भाषण को चुनौती दे दी।

नासिक के संरक्षक मंत्री गिरीश महाजन अपना पारंपरिक संबोधन दे रहे थे, तभी वन विभाग की माधवी जाधव और दर्शना सौनपुरे ने उनके भाषण में भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का नाम न लेने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

इस घटना ने देखते ही देखते एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। अब इन दोनों महिला अधिकारियों, माधवी जाधव और दर्शना सौनपुरे को महाराष्ट्र सिविल सर्विस रूल्स (नागरिक सेवा नियम) के तहत नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा रहा है।

डिसिप्लिनरी एक्शन और कानूनी प्रक्रिया का आधार

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस पूरे मामले पर अनुशासनात्मक प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए बताया है कि नियमों के मुताबिक कदम उठाए जा रहे हैं। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट इन अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए औपचारिक नोटिस जारी करेगा। यदि विभाग उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं होता है, तो आगे की कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

यह साफ किया गया है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को बिना उचित प्रक्रिया के सीधे निलंबित नहीं किया जा सकता; प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से ही आगे बढ़ेगी। अधिकारी ने यह भी जोड़ा कि चूंकि वर्तमान में कोई पुलिस केस दर्ज नहीं है, इसलिए फिलहाल उन्हें केवल चेतावनी देकर छोड़ा गया है, लेकिन सेवा नियमों का उल्लंघन एक गंभीर विषय है।

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वन अधिकारियों का साहसी रुख और उनका पक्ष

इस कानूनी कार्रवाई की सुगबुगाहट के बीच, माधवी जाधव ने बेहद निडर रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा, “हम रिपब्लिक डे परेड के बाद छुट्टी पर हैं। हमने कुछ भी गैर-कानूनी नहीं किया है और हमें किसी भी एक्शन का डर नहीं है।”

जाधव का तर्क है कि बाबासाहेब के योगदान को नजरअंदाज करना एक अक्षम्य भूल थी और वह अपना स्टैंड लेने के लिए किसी भी कीमत पर माफी नहीं मांगेंगी। 2011 में वन रक्षक के रूप में भर्ती हुई जाधव ने जोर देकर कहा कि उनकी पहचान और गरिमा डॉ. अंबेडकर द्वारा दिए गए अधिकारों की देन है, और वह इस पर कोई समझौता नहीं करेंगी।

परेड ग्राउंड पर ‘संविधान अपमान का आरोप’ और तीखी बहस

नासिक के परेड ग्राउंड पर जब झंडा फहराने की रस्म पूरी हुई, तब मंत्री महाजन ने अपने भाषण में कई हस्तियों का जिक्र किया, लेकिन डॉ. बी. आर. अंबेडकर का नाम नहीं लिया। इसी बिंदु पर जाधव और सौनपुरे ने ‘संविधान अपमान का आरोप’ लगाते हुए कार्यक्रम को बीच में ही टोक दिया।

उन्होंने मंच पर मौजूद महिला एंकर और मंत्री से सीधे सवाल किया कि रिपब्लिक डे के वास्तविक प्रतीक और संविधान के वास्तुकार को छोड़कर अन्य लोगों का जिक्र क्यों किया गया?

जाधव ने गुस्से में कहा, “मैडम, आप और मंत्री महोदय, दोनों ही इस संविधान की वजह से इन पदों पर हैं। जिस व्यक्ति ने बराबरी कायम की और लोकतंत्र की नींव रखी, उनका नाम न लेना अपमानजनक है।”

पुलिस हिरासत और समर्थकों का भारी जमावड़ा

जैसे ही परेड ग्राउंड पर हंगामा बढ़ा, वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने दोनों महिला अधिकारियों को हिरासत में लिया और सरकार वाडा पुलिस स्टेशन ले गई। इस खबर के फैलते ही अंबेडकरवादी समर्थकों का एक बड़ा हुजूम पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हो गया और मंत्री के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

हालांकि पुलिस ने उन्हें मौखिक चेतावनी देकर छोड़ दिया, लेकिन इस घटना ने शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया। इसी बीच माधवी जाधव ने मंत्री के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई।

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मंत्री गिरीश महाजन की सफाई और खेद व्यक्त करना

विवाद को बढ़ता देख जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने मीडिया के सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर का नाम न लेना पूरी तरह से एक अनजाने में हुई चूक थी और उनका कोई गलत इरादा नहीं था। महाजन ने कहा, “मैंने ‘भारत माता की जय’ और ‘छत्रपति शिवाजी महाराज की जय’ के नारे लगाए, मेरा इरादा बाबासाहेब का नाम छोड़ने का कभी नहीं हो सकता।

” उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर भी पोस्ट किया कि भाजपा की परंपरा बाबासाहेब की सोच को सहेजने की है और वह पिछले 40 वर्षों से व्यक्तिगत रूप से अंबेडकर जयंती मनाते आ रहे हैं। उन्होंने अनजाने में हुई इस चूक के लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्ष ने घेरा

इस घटना पर ‘संविधान अपमान का आरोप’ लगाते हुए विपक्ष ने सरकार पर तीखे हमले किए हैं। वंचित बहुजन अघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश अंबेडकर ने इसे अंबेडकर की विरासत को कमजोर करने की भाजपा-आरएसएस की साजिश बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि संविधान निर्माता का नाम हटाना एक दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

वहीं, मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने इसे ‘महाराष्ट्र विरोधी सोच’ करार देते हुए कहा कि सत्ता के नशे में चूर मंत्री उन महापुरुषों को भूल रहे हैं जिन्होंने देश बनाया है। उन्होंने माधवी जाधव के साहस की सराहना करते हुए इसे हर स्वाभिमानी मराठी नागरिक की भावना बताया।

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उपमुख्यमंत्री फडणवीस का संबोधन और भविष्य के संकेत

उधर दादर में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने डॉ. बी. आर. अंबेडकर और संविधान सभा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारत आज जो कुछ भी है, वह संविधान की बदौलत है। उन्होंने संविधान को भारत की अर्थव्यवस्था और विकास की रीढ़ बताया।

हालांकि, नासिक की घटना ने एक स्थानीय कार्यक्रम को बड़े सामाजिक-राजनीतिक युद्ध में बदल दिया है। ‘संविधान अपमान का आरोप’ लगने के बाद अब जनता और विभिन्न संगठन इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि प्रशासन इन महिला अधिकारियों के खिलाफ क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में यह विवाद क्या नया मोड़ लेता है।

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