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पाकिस्तान सेना-आतंकवादी सांठगांठ का पर्दाफाश, वीडियो से बड़ा खुलासा

पाकिस्तान सेना-आतंकवादी सांठगांठ

हाल ही में सामने आए कुछ वीडियो संदेशों ने पाकिस्तान सेना-आतंकवादी सांठगांठ आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के दोहरे रवैये की पोल खोल दी है। इन वीडियो में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के शीर्ष कमांडर भारत के खिलाफ जिहाद की बात करते और भारतीय सेना के हमलों के बाद हुए नुकसान को स्वीकारते नजर आ रहे हैं।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने इन वीडियो को आतंकवादियों और पाकिस्तानी राज्य के बीच की पाकिस्तान सेना-आतंकवादी सांठगांठ को उजागर करने वाला बताया है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दुनिया इस सांठगांठ से अच्छी तरह वाकिफ है, और ये वीडियो इसे और भी स्पष्ट करते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर का कहर और पाकिस्तानी सेना की भूमिका

इन वीडियो में जैश-ए-मोहम्मद के नेता पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में भारत द्वारा किए गए सैन्य हमलों, जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया था, के प्रभाव के बारे में बात करते दिखाई दे रहे हैं। जैश कमांडर मसूद इलियास कश्मीरी ने एक वायरल वीडियो में कबूल किया कि 7 मई को बहावलपुर में उनके मुख्य अड्डे पर हुए भारतीय हमलों में जैश प्रमुख मसूद अजहर के परिवार के सदस्यों की मौत हुई।

उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने अपने शीर्ष सैन्य अधिकारियों को भारतीय सैन्य हमलों में मारे गए आतंकवादियों के अंतिम संस्कार में शामिल होने का निर्देश दिया था। कश्मीरी ने कहा, “इधर जीएचक्यू से आर्मी चीफ का आदेश जारी है, इनके ताबूतों को सलामी दी जाए।”

इसके अलावा, पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी को भी बीबीसी के साथ एक साक्षात्कार में मारे गए आतंकवादियों के अंतिम संस्कार में पाकिस्तानी सेना के जवानों की मौजूदगी को सही ठहराते हुए सुना जा सकता है। यह बयान पाकिस्तान सेना-आतंकवादी सांठगांठ को और भी पुख्ता करता है।

मुरीदके का सच: लश्कर के अड्डे का पुनर्निर्माण

वहीं, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कमांडर कासिम ने एक अन्य वीडियो में मुरीदके स्थित मरकज़ तैयबा के प्रशिक्षण केंद्र की तबाही को स्वीकार किया, जिसे भारत के सटीक मिसाइल हमलों ने भारी नुकसान पहुंचाया था। कासिम ने बताया, “मैं मुरीदके में मरकज तैयबा के खंडहरों पर खड़ा हूं, जो हमले में नष्ट हो गया था।

इसके पुनर्निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। ईश्वर की कृपा से यह मस्जिद पहले से भी बड़ी बनेगी।” उसने पाकिस्तानी युवाओं से मरकज़ तैयबा में ‘दौरा-ए-सुफ्फा’ नामक एक आतंकी प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह भी किया। लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख सैफुल्लाह कसूरी ने तो यहां तक स्वीकार किया कि पाकिस्तान सरकार और सेना मुरीदके मुख्यालय के पुनर्निर्माण के लिए धन मुहैया करा रही है।

यह सीधे तौर पर पाकिस्तान सरकार के इस दावे का खंडन करता है कि नष्ट किया गया शिविर अब लश्कर-ए-तैयबा द्वारा इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। यह एक और ठोस सबूत है जो पाकिस्तान सेना-आतंकवादी सांठगांठ की पुष्टि करता है।

तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का कोई स्थान नहीं: भारत का स्पष्ट रुख

जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अल-जज़ीरा को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच ‘संघर्ष विराम’ के संबंध में संपर्क किया था, तो भारत ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत-पाकिस्तान के मुद्दों में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के लिए कोई जगह नहीं है।

उन्होंने कहा, “भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस्लामाबाद के साथ किसी भी बातचीत में इसकी कोई गुंजिश नहीं है।” यह बयान इस बात को पुष्ट करता है कि भारत अपने मुद्दों को द्विपक्षीय रूप से हल करने में विश्वास रखता है, और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा।

यह भी सामने आया कि भारतीय अधिकारियों का कहना है कि 10 मई को हुए सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के लिए हुए समझौते में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी, जो पाकिस्तान के दावे से अलग है।

पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि

ऑपरेशन सिंदूर 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया था, जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। आतंकवादियों ने हिंदुओं को चुन-चुनकर उनकी पत्नी, बच्चों और माता-पिता के सामने गोली मार दी थी।

इस बर्बर हमले के बाद, भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी शिविरों को निशाना बनाकर एक समन्वित हमला किया, जिसमें बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख ठिकाने, मुरीदके और बरनाला में लश्कर-ए-तैयबा के शिविर और सियालकोट में हिजबुल मुजाहिदीन का मुख्यालय शामिल थे।

जब पाकिस्तान ने इसका जवाब दिया, तो भारत ने उसके कई महत्वपूर्ण हवाई ठिकानों पर बमबारी की, जिससे उसके वायु रक्षा ढांचे को भी नुकसान पहुंचा। ये सारे घटनाक्रम इस बात की पुष्टि करते हैं कि पाकिस्तान सेना-आतंकवादी सांठगांठ अभी भी जारी है और यह क्षेत्र में अस्थिरता का एक बड़ा कारण है।

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