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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त को जापान और चीन की चार दिवसीय यात्रा पर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान चीन यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने के अंत में जापान और चीन की चार दिवसीय यात्रा पर निकल रहे हैं, जो भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। यह यात्रा व्यापार, रक्षा, और बहुपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से की जा रही है, जिससे भारत की वैश्विक स्थिति और भी मजबूत होगी। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार, 22 अगस्त को इस बहुप्रतीक्षित दौरे की घोषणा की, जिसके तहत प्रधानमंत्री मोदी दो प्रमुख शिखर सम्मेलनों में भाग लेंगे और कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएँ करेंगे।

जापान यात्रा: साझेदारी की नई इबारत

जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के निमंत्रण पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29-30 अगस्त तक जापान का दौरा करेंगे। यह उनकी जापान की आठवीं यात्रा होगी और प्रधानमंत्री इशिबा के साथ उनकी पहली शिखर वार्ता होगी। यह तथ्य टोक्यो के साथ भारत की बढ़ती निकटता को दर्शाता है, जो एक राजनीतिक और आर्थिक साझेदार के रूप में तेजी से उभर रहा है।

इस दौरे का मुख्य उद्देश्य 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेना है। इस दौरान, दोनों नेता भारत और जापान के बीच “विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी” की गहन समीक्षा करेंगे। चर्चा के प्रमुख विषयों में रक्षा और सुरक्षा, व्यापार और अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और नवाचार, और लोगों के बीच आदान-प्रदान शामिल होंगे। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक मित्रता की पुष्टि करते हुए क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। इस यात्रा से टोक्यो के साथ भारत के रक्षा, व्यापार और सुरक्षा संबंधों पर प्रकाश पड़ने की उम्मीद है, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग और भी गहरा होगा।

एससीओ शिखर सम्मेलन: चीन में कूटनीतिक संतुलन

जापान के बाद, अपनी यात्रा के दूसरे चरण में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। चीन ने इस शिखर सम्मेलन को इस संगठन के इतिहास का सबसे बड़ा आयोजन बताया है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी सहित 20 विश्व नेताओं के भाग लेने की उम्मीद है।

शिखर सम्मेलन से इतर, प्रधानमंत्री मोदी के कई प्रतिभागी नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने की उम्मीद है। यह दौरा चीन के साथ संबंधों में आई नरमी का भी परीक्षण करेगा। पिछली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2018 में वुहान में शी जिनपिंग के साथ एक अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए चीन गए थे। 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद संबंधों में भारी गिरावट आई थी, जिसके कारण दोनों देशों के संबंध छह दशकों में सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए थे। हालांकि, अक्टूबर 2024 में सीमा गतिरोध को समाप्त करने के लिए हुए समझौते और बाद में रूस के कज़ान में हुई मुलाकात के बाद संबंधों को स्थिर करने पर सहमति बनी थी। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी चीन सीमा पर शांति बनाए रखने के महत्व पर ज़ोर देंगे।

भारत 2017 से एससीओ का सदस्य है और उसने 2022-23 के दौरान इस समूह के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की अध्यक्षता भी की थी। यह महत्वपूर्ण है कि इस सप्ताह की शुरुआत में, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए औपचारिक रूप से निमंत्रण दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

यह यात्रा भारत की विदेश नीति के संतुलन को दर्शाती है, जहाँ एक ओर वह अपने रणनीतिक साझेदार जापान के साथ संबंधों को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन जैसे जटिल पड़ोसी के साथ बहुपक्षीय मंच पर संवाद भी स्थापित कर रहा है।

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