द वायर की वेबसाइट ब्लॉक
भारत सरकार ने शुक्रवार को द वायर की अंग्रेजी वेबसाइट ब्लॉक कर दी। यह कदम “संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन” बताया जा रहा है। इंटरनेट सेवा प्रदाताओं ने आईटी अधिनियम, 2000 के तहत मंत्रालय के आदेश का हवाला दिया। समाचार आउटलेट ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए इस मनमानी को चुनौती देने का ऐलान किया।
इसके साथ ही, प्रेस की स्वतंत्रता पर हमले की आशंका बढ़ गई है। द वायर ने कहा, “सत्यनिष्ठ आवाज़ें भारत की संपत्ति हैं।” उन्होंने सरकारी सेंसरशिप के खिलाफ कानूनी लड़ाई की तैयारी मंसा जताई।
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चार अन्य पोर्टल्स भी प्रभावित
गुरुवार को मकतूब मीडिया, द कश्मीरियत, फ्री प्रेस कश्मीर और मुस्लिम के सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक हुए। एक्स और इंस्टाग्राम ने सरकारी अनुरोध को कारण बताया। हालांकि, इनकी वेबसाइटें अभी भी सुलभ हैं।
इस कार्रवाई ने प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला के बहस को तेज कर दिया। डिजीपब ने इसे “लोकतंत्र के लिए खतरा” बताते हुए तुरंत बहाली की मांग की।
पत्रकार संगठनों ने उठाए सवाल
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने ब्लॉकिंग की निंदा की। उन्होंने कहा, “उचित प्रक्रिया और न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी है।” डिजीपब ने जोर देकर कहा, “युद्ध के बहाने पत्रकारिता को न दबाएं।”
इस बीच, प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला को लेकर स्वतंत्र मीडिया के समर्थन में आवाजें उठनी शुरू हो गई हैं। संगठनों ने सरकार से पारदर्शिता बनाए रखने का आग्रह किया।
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कश्मीरी मीडिया प्लेटफॉर्म्स की दुविधा
मकतूब मीडिया के संपादक असलाह कयालक्कथ ने कहा, “कार्रवाई का कोई तर्क नहीं है।” कश्मीरियत की टीम ने इसे “ईमानदार पत्रकारिता पर प्रहार” बताया। मुस्लिम के संस्थापक ने पश्चिमी मीडिया के प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाए।
इसी क्रम में, 6 मई को पुण्य प्रसून वाजपेयी का यूट्यूब चैनल बंद हुआ। कारण स्पष्ट नहीं है। पहले भी 4 PM यूट्यूब चैनल केंद्र सरकार के इशारे पर तथा IT एक्ट के उल्लंघन का हवाला देकर ब्लॉक किया गया था। मामले में 4 PM के संजय शर्मा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
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प्रेस की स्वतंत्रता बनाए रखना जरूरी
प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। सरकार और मीडिया के बीच संवाद जरूरी है। नागरिकों को सटीक जानकारी का अधिकार है। बिना पक्षपात के, तथ्यों को प्रस्तुत करना पत्रकारिता का धर्म है।
इस संकट में, स्वतंत्र मीडिया का समर्थन और नीतिगत सुधारों पर ध्यान देना आवश्यक है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पारदर्शी तंत्र बनाया जाए।
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