राहुल गांधी बनाम राजनाथ सिंह: संसद में चीन विवाद पर भारी घमासान
संसद के निचले सदन में सोमवार को राहुल गांधी बनाम राजनाथ सिंह के बीच जबरदस्त वैचारिक और कानूनी युद्ध देखने को मिला। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक ‘अप्रकाशित’ (Unpublished) किताब के अंशों का हवाला देते हुए मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की।
राहुल गांधी ने डोकलाम और गलवान गतिरोध का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने सीमा पर स्थिति को सही ढंग से नहीं संभाला।
जैसे ही उन्होंने जनरल नरवणे के संस्मरणों के आधार पर शीर्ष नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठाए, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने मोर्चा संभाल लिया। सत्ता पक्ष का स्पष्ट तर्क था कि जो दस्तावेज आधिकारिक रूप से प्रकाशित या प्रमाणित नहीं है, उसे सदन की कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।
जनरल नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब पर छिड़ा सियासी संग्राम
राहुल गांधी ने सदन में जनरल नरवणे की उन यादों का बार-बार जिक्र किया जो अभी तक सार्वजनिक रूप से बाजार में नहीं आई हैं। उन्होंने एक न्यूज़ मैगजीन में छपे आर्टिकल के आधार पर दावा किया कि 2020 की झड़पों के दौरान सेना को ‘नीचा दिखाने’ का प्रयास किया गया था।
इस पर हस्तक्षेप करते हुए रक्षा मंत्री सिंह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताई। राजनाथ सिंह ने सीधे सवाल किया कि अगर इस किताब के प्रकाशन को रोका जा रहा था, तो जनरल नरवणे ने अदालत का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया?
बीजेपी सांसदों ने आरोप लगाया कि गांधी बिना किसी ‘असली सोर्स’ के देश को गुमराह कर रहे हैं। इस विवाद के कारण सदन की गरिमा पर सवाल उठे और हंगामा इतना बढ़ गया कि कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा।
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‘एक इंच जमीन नहीं गई’: बीजेपी ने नरवणे के पुराने वीडियो से दिया जवाब
सदन के भीतर चल रही बहस के बीच बीजेपी ने बाहर मोर्चा संभालते हुए जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का ही एक पुराना वीडियो साझा कर राहुल गांधी के दावों की हवा निकाल दी। इस वीडियो में पूर्व आर्मी चीफ स्पष्ट रूप से कह रहे हैं, “एक इंच भी जमीन नहीं गई है। हम ठीक वहीं हैं जहां पहले थे।
” बीजेपी ने इस वीडियो के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि राहुल गांधी के आरोप निराधार हैं और सेना प्रमुख स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि भारतीय क्षेत्र सुरक्षित है। राहुल गांधी बनाम राजनाथ सिंह की इस जंग में बीजेपी ने तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने और सशस्त्र बलों को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप कांग्रेस पर मढ़ा।
अमित शाह की दखल और संसदीय नियमों का हवाला
जब राहुल गांधी जनरल नरवणे की किताब के कथित अंश पढ़ने पर अड़े रहे, तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हस्तक्षेप करते हुए नियमों की याद दिलाई। शाह ने कड़े लहजे में पूछा, “जब किताब पब्लिश ही नहीं हुई है, तो वह उससे कोट कैसे कर सकते हैं?
” उन्होंने स्पष्ट किया कि अखबार की कटिंग या अप्रमाणित सामग्री को संसदीय रिकॉर्ड में संदर्भ के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
शाह ने राहुल गांधी से बिना किसी ऑथेंटिकेशन वाले सोर्स का जिक्र किए अपना भाषण जारी रखने का अनुरोध किया। हालांकि, गांधी ने दावा किया कि उनके पास मौजूद दस्तावेज ऑथेंटिकेटेड हैं और उन्हें बोलने का हक है। इस टकराव ने सदन के भीतर गतिरोध को और गहरा कर दिया।
राहुल गांधी के गंभीर आरोप: सरकार की ‘नाकाबिलियत’ का डर
सदन स्थगित होने के बाद मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि उन्हें बोलने से इसलिए रोका जा रहा है क्योंकि सरकार डरी हुई है। गांधी के अनुसार, पूर्व सेना प्रमुख की किताब में प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री पर 2020 की चीन झड़प के दौरान सेना के मनोबल को प्रभावित करने के आरोप हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ‘नाकाबिलियत का सच’ सामने आने के डर से ही इस किताब के प्रकाशन को रोका जा रहा है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है और सरकार की असहजता ही उनके माइक को बंद करने और कार्यवाही रोकने का असली कारण है।
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कांग्रेस का पलटवार: ’21वीं सदी का फासीवाद’
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया। खड़गे ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बीजेपी का राष्ट्रवाद ‘नकली’ है और मोदी सरकार तथ्यों को छिपाने के लिए डरपोक रवैया अपना रही है। वहीं, वेणुगोपाल ने इसे ’21वीं सदी के फासीवाद’ का टेक्स्टबुक केस करार दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बनाम राजनाथ सिंह की इस बहस में सरकार ने वरिष्ठ मंत्रियों के एक ‘झुंड’ को केवल विपक्ष की आवाज दबाने के लिए तैनात किया था। कांग्रेस का दावा है कि नियमों की गलत व्याख्या करके लोगों को चीन के खिलाफ हुई गलतियों के बारे में जानने से रोका जा रहा है।
रविशंकर प्रसाद और बीजेपी सांसदों की तीखी प्रतिक्रिया
पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी के व्यवहार की निंदा करते हुए कहा कि सेना को बदनाम करना गांधी की आदत बन गई है। उन्होंने याद दिलाया कि यही जनरल नरवणे थे जिन्होंने चीन को ‘गुंडा’ कहा था और भारत के करारे जवाब की सराहना की थी।
प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी केवल वही हिस्सा चुन रहे हैं जो उनके नैरेटिव में फिट बैठता है। बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या और यदुवीर वाडियार ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह एक ऐसी खबर पर राजनीति कर रहे हैं जिसकी कोई सच्चाई नहीं है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि राहुल गांधी खुद को नियमों से ऊपर समझते हैं, जबकि उन्हें सदन की गरिमा का सम्मान करना चाहिए।
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सदन की कार्यवाही स्थगित और भविष्य का गतिरोध
पूरे दिन चले ड्रामे के बाद, जब राहुल गांधी शाम 4 बजे दोबारा शुरू हुई कार्यवाही में भी अपनी बात पर अड़े रहे, तो चेयरपर्सन पैनल के सदस्य जगदंबिका पाल ने सदन को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया।
राहुल गांधी बनाम राजनाथ सिंह के इस टकराव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में चीन सीमा और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा संसद में और भी गर्म रहने वाला है।
विपक्षी दलों, जिनमें समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी शामिल थे, ने गांधी का समर्थन किया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे सेना के अपमान और समय की बर्बादी करार दिया। वर्तमान स्थिति में यह बहस केवल एक किताब तक सीमित न रहकर देश की संप्रभुता और राजनीतिक जवाबदेही का बड़ा केंद्र बन गई है।
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