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राज्यसभा में कमल हासन की एंट्री पर सियासी हलचल

राज्यसभा में कमल हासन

तमिलनाडु की राजनीति में इस समय सबसे बड़ी चर्चा है – राज्यसभा में कमल हासन की एंट्री। अभिनेता से नेता बने हासन अब संसद के उच्च सदन में डीएमके की मदद से प्रवेश कर रहे हैं। लेकिन यह फैसला सिर्फ एक सीट भर नहीं है — इसके पीछे गठबंधन की मजबूती, भविष्य की रणनीति और क्षेत्रीय दलों के समीकरणों की बड़ी कहानी छिपी है।

  • डीएमके ने राज्यसभा चुनाव के लिए चार उम्मीदवार घोषित किए।
  • कमल हासन की पार्टी मक्कल निधि मय्यम को एक सीट दी गई।
  • यह समझौता लोकसभा चुनाव से पहले हुआ था।

गठबंधन राजनीति का संतुलन

डीएमके ने जिन चार लोगों को उम्मीदवार बनाया है, उनमें वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन, कवयित्री सलमा, पूर्व मंत्री एस.आर. शिवलिंगम और मक्कल निधि मय्यम के संस्थापक कमल हासन शामिल हैं। राज्यसभा में कमल हासन को भेजना इस गठबंधन के प्रति विश्वास और राजनीतिक संतुलन दिखाने वाला कदम है।

  • हासन ने लोकसभा चुनाव लड़ने से इंकार कर राज्यसभा में रुचि दिखाई थी।
  • एम.के. स्टालिन ने वादा निभाते हुए यह सीट दी।
  • डीएमके के पास विधानसभा में इतनी ताकत है कि वह 4 सीटें आराम से जीत सकती है।

कमल हासन: सिनेमाई छवि से राजनीतिक मंच तक

कमल हासन की राजनीतिक यात्रा 2018 में शुरू हुई थी जब उन्होंने मक्कल निधि मय्यम (MNM) की स्थापना की। शुरुआत में उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी और वैकल्पिक राजनीति की बात की। लेकिन जनता का समर्थन सीमित रहा। इस बार डीएमके के साथ गठबंधन ने उन्हें नई राजनीतिक ऊंचाई दी है।

  • MNM का जनाधार सीमित लेकिन शहरी वर्ग में पहचान है।
  • हासन की छवि अब सिर्फ अभिनेता की नहीं, एक गंभीर राजनेता की बन रही है।

भाषा विवाद से सियासी तूफान

हाल ही में हासन ने एक बयान में कहा था कि “कन्नड़ तमिल से जन्मी भाषा है।” यह बयान उन्होंने फिल्म ‘ठग लाइफ’ के प्रमोशन के दौरान दिया था। बयान ने कर्नाटक की राजनीति में हलचल मचा दी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने इसे 6.5 करोड़ कन्नड़वासियों का अपमान बताया।

  • यह विवाद डीएमके के लिए असहज स्थिति बनाता है।
  • भाषा और पहचान पर दक्षिण भारत में राजनीति अक्सर उग्र हो जाती है।
  • बयान से कमल हासन की राजनीतिक समझ पर सवाल भी उठे।

रणनीति: एक सीट, कई इशारे

राजनीति में राज्यसभा की एक सीट कई बार लोकसभा से भी ज़्यादा अहम हो सकती है। यह उन नेताओं को मंच देती है जो चुनावी राजनीति से दूर रहते हैं लेकिन जिनकी वैचारिक भूमिका बड़ी होती है।

  • डीएमके इस सीट के ज़रिये MNM को अपने साथ मजबूती से जोड़े रखना चाहती है।
  • विपक्ष में BJP और AIADMK, दोनों इस गठजोड़ पर पैनी निगाह रखे हुए हैं।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और भविष्य की रणनीति

AIADMK और BJP ने इस समझौते को मौकापरस्ती बताया है। उनके अनुसार कमल हासन ने वैकल्पिक राजनीति का दावा किया था, लेकिन अब सत्ता में साझेदारी कर रहे हैं। हालांकि हासन के समर्थकों का कहना है कि यह फैसला उन्हें वैचारिक मंच देने के लिए है, न कि सत्ता की भूख के लिए।

  • भाजपा ने बयान पर माफी की मांग की है।
  • AIADMK ने MNM को “पक्ष-विपक्ष के बीच झूलती पार्टी” बताया।

राज्यसभा की छह सीटों पर लड़ाई

24 जुलाई 2025 को तमिलनाडु से राज्यसभा की 6 सीटें खाली हो रही हैं। इनमें पीएमके के अंबुमणि रामदास और एमडीएमके के वाइको भी शामिल हैं। विधानसभा में डीएमके और उसके सहयोगी 4 सीटें आराम से जीत सकते हैं, जबकि विपक्ष के हिस्से दो सीटें आने की संभावना है।

  • DMK: 4 सीटें (एक MNM को दी गई)
  • AIADMK-BJP: 2 सीटों की संभावित दावेदारी

जनभावना और राजनीतिक संकेत

राज्यसभा में कमल हासन को भेजने का संकेत सिर्फ सीट तक सीमित नहीं है। यह डीएमके की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका बढ़ाने की कोशिश भी है। हासन को राज्यसभा में बोलने का मंच मिलने से राष्ट्रीय मुद्दों पर दक्षिण भारत की आवाज़ को ताकत मिल सकती है।

  • तमिल अस्मिता, भाषा नीति और क्षेत्रीय न्याय जैसे मुद्दों पर हासन संसद में मुखर हो सकते हैं।
  • इससे डीएमके और उसके गठबंधन की आवाज़ को विविधता मिलेगी।

सत्ता, संतुलन और सियासत

कमल हासन की राज्यसभा में एंट्री किसी व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं बड़ी राजनीतिक कहानी है। यह एक नई किस्म की राजनीति का आगाज़ भी हो सकता है, जहाँ गठबंधन के भीतर विचारशील नेताओं को मंच देने की परंपरा शुरू हो। भाषा विवाद के बावजूद, अगर हासन अपने भाषण और दृष्टिकोण से उच्च सदन में गंभीरता दिखाते हैं, तो यह सीट डीएमके और MNM दोनों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

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