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सत्ता-पैसा और नेक्सस: अनिल अंबानी और सेक्स ट्रैफिकर एपस्टीन की गंदी चैट

सत्ता-पैसा और नेक्सस

सत्ता-पैसा और नेक्सस का एक ऐसा घिनौना चेहरा सामने आया है जिसने भारतीय कॉर्पोरेट जगत और राजनीति की सबसे गंदी सच्चाई को बेनकाब कर दिया है। साल 2017 में, जब जेफरी एपस्टीन 2008 के नाबालिगों से जुड़े यौन अपराधों का दोषी ठहर चुका था और सेक्स ट्रैफिकिंग के संगीन आरोपों में फंसा हुआ था, तब भी वह दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों के साथ “फन” वाली मुलाकातें अरेंज कर रहा था।

US जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) द्वारा जारी 3.5 मिलियन से ज्यादा पन्नों के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ब्लूमबर्ग ने खुलासा किया है कि 9 मार्च 2017 की एक टेक्स्ट एक्सचेंज में अनिल अंबानी ने एपस्टीन से पूछा, “K. Who do u suggest?” (किसे सजेस्ट करूं?)।

इसके जवाब में एपस्टीन ने तुरंत लिखा, “a tall swedish blonde woman, to make it fun to visit”। अंबानी की ओर से महज 20 सेकंड के भीतर जवाब आया: “Arrange that”। यह कोई हल्की-फुल्की बातचीत नहीं, बल्कि एक कन्विक्टेड सेक्स ऑफेंडर के साथ एक दिग्गज भारतीय उद्योगपति की खुली डीलिंग है।

अमीर उद्योगपति और कुख्यात सेक्स ऑफेंडर की जुगलबंदी

दस्तावेजों से साफ है कि अनिल अंबानी और जेफरी एपस्टीन के बीच यह रिश्ता महज एक इकलौता वाकया नहीं था। 2017 से 2019 तक दोनों के बीच नियमित संपर्क बना रहा, जिसमें बिजनेस डील्स, वैश्विक मुद्दे, महिलाओं की “अरेंजमेंट” और व्यक्तिगत मुलाकातों की गहरी प्लानिंग शामिल थी।

दस्तावेज बताते हैं कि इन दोनों ने 2017 में पेरिस में एक गुप्त बैठक की कोशिश की थी, जो अंतिम समय में मिस हो गई। इसके बाद जनवरी 2018 में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (दावोस) में तत्कालीन राष्ट्रपति ट्रंप की प्रतिक्रिया पर चर्चा की गई। मई 2019 में न्यूयॉर्क में एपस्टीन के मैनहैटन (अपर ईस्ट साइड) घर पर उनकी एक कन्फर्म मुलाकात हुई।

एपस्टीन ने अंबानी को “शांत” (quiet) मीटिंग्स का ऑफर दिया था और उसके सहायकों ने इस मुलाकात की पुष्टि की थी। यह सत्ता-पैसा और नेक्सस की पराकाष्ठा है कि एपस्टीन ने अंबानी को अपने विवादित प्राइवेट आइलैंड (US Virgin Islands) पर भी आमंत्रित किया था।

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राजनीतिक कनेक्शन: दिल्ली की ‘लीडरशिप’ के लिए बैकचैनल डिप्लोमेसी

इस पूरे खुलासे का सबसे खतरनाक हिस्सा वह राजनीतिक कनेक्शन है, जो सीधे दिल्ली की सत्ता की ओर इशारा करता है। दस्तावेजों के अनुसार, अंबानी एपस्टीन के जरिए “लीडरशिप” (मोदी सरकार) की तरफ से मदद मांग रहे थे।

मार्च 2017 में अंबानी ने एपस्टीन को मैसेज किया, “Leadership wld like ur help for me to meet jared and bannon asap”। यह मांग ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और सलाहकार स्टीव बैनन से मिलने के लिए थी, ताकि जून 2017 में पीएम मोदी की US विजिट और इजराइल यात्रा से पहले बैकचैनल डिप्लोमेसी के रास्ते तैयार किए जा सकें।

एपस्टीन ने अंबानी को खुलेआम प्रधानमंत्री मोदी का “guy” बताया था और बैनन को मैसेज किया था कि वह “मोदी के प्रतिनिधि” से मिला है। उसने यह भी दावा किया कि मोदी शिकायत कर रहे हैं कि वॉशिंगटन में उनसे कोई बात नहीं कर रहा है।

नैतिक पतन की मिसाल: ‘Arrange that’ और स्कारलेट जोहानसन का जिक्र

अनिल अंबानी, जो रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन हैं और मोदी सरकार के बेहद करीबी माने जाते हैं, उनका एक सेक्स ट्रैफिकर से इस कदर गहरे रिश्ते रखना भारतीय अमीरों की नैतिक गिरावट की पराकाष्ठा है। चैट्स में महिलाओं की “अरेंजमेंट” करना एपस्टीन का ट्रेडमार्क था और अंबानी का उस पर तुरंत “Arrange that” कहना सवाल खड़ा करता है कि क्या यह सब उनके लिए रूटीन था?

आगे की चैट्स में जब एपस्टीन ने पूछा कि “is there an actress?”, तो अंबानी ने जवाब दिया, “better taste my friend, Our next movie is with Scarlett Johansson” (घोस्ट इन द शेल फिल्म का संदर्भ)।

इस पर एपस्टीन ने टिप्पणी की, “I am glad you prefer young blondes to old ones”। यह दर्शाता है कि इस सत्ता-पैसा और नेक्सस के खेल में नैतिकता के लिए कोई स्थान नहीं बचा है।

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2026 में एपस्टीन फाइल्स का विस्फोट और राफेल डील पर सवाल

यद्यपि एपस्टीन की मौत 2019 में हो गई थी, लेकिन उसकी फाइल्स अब 2026 में भारत की राजनीति को जड़ से हिला रही हैं। अनिल अंबानी जैसे बड़े नाम, जो डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर डील्स में मोदी सरकार के साथ जुड़े रहे हैं, अब एपस्टीन के ट्रैफिकिंग नेटवर्क में फंसे हुए दिखाई दे रहे हैं।

विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है और कांग्रेस सहित अन्य पार्टियां पूछ रही हैं कि क्या एपस्टीन जैसे अपराधी से संबंध सरकार की जानकारी में थे?

2017-19 का यह वही दौर था जब अंबानी की कंपनियां राफेल ऑफसेट और अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स में शामिल थीं और एपस्टीन के जरिए US के राजनीतिक गलियारों तक पहुंच बनाई जा रही थी। अल जजीरा और द हिंदू की रिपोर्ट बताती हैं कि एपस्टीन खुद को भारतीय हितों का पैरोकार बताकर अमेरिकी राजनेताओं से डीलिंग कर रहा था।

विदेश मंत्रालय का इनकार और दस्तावेजों की प्रामाणिकता

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इन खुलासों को “trashy ruminations” (कचरा सोच) कहकर खारिज कर दिया है, लेकिन जारी किए गए दस्तावेज और टेक्स्ट मैसेज पूरी तरह प्रामाणिक हैं और सीधे US डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DOJ) द्वारा सार्वजनिक किए गए हैं। इन दस्तावेजों की सत्यता पर कोई संदेह नहीं रह जाता।

अंबानी के प्रतिनिधि ने इस पर चुप्पी साध रखी है, जो खुद में कई सवाल खड़े करती है। जनता अब पूछ रही है कि क्या इसी तरह की बैकडोर डिप्लोमेसी से भारत की छवि ‘विश्व गुरु’ के रूप में बन रही है? सत्ता-पैसा और नेक्सस का यह घिनौना मिश्रण क्रोनी कैपिटलिज्म के सबसे काले अध्याय को बयां करता है, जहां निजी स्वार्थों के लिए अपराधियों का सहारा लिया गया।

भारतीय समाज के लिए शर्मिंदगी और सिस्टम की सड़ांध

यह खुलासा भारतीय समाज के लिए एक गहरी शर्मिंदगी का विषय है, जहां अमीरों के लिए कानून के मायने अलग होते हैं। एपस्टीन का नेटवर्क बिल क्लिंटन, डोनाल्ड ट्रंप, बिल गेट्स और ब्रेंडे (WEF CEO) जैसे रसूखदार नामों से भरा था और अब इसमें एक प्रमुख भारतीय नाम का जुड़ना सिस्टम की सड़ांध को दिखाता है।

यह सिर्फ एक चैट का मामला नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र की पोल खोलता है जहां ताकतवर लोग अपनी हवस और लालच के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं। नैतिकता की बातें केवल भाषणों तक सीमित रह गई हैं, जबकि हकीकत में सत्ता के गलियारों में अपराधियों के साथ बैठकर सौदेबाजी की जा रही है।

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प्रधानमंत्री के दावों और हकीकत के बीच की खाई

अनिल अंबानी का “Arrange that” कहना आज मोदी राज की “ट्रांसपेरेंसी” और “अच्छे दिन” के दावों पर सबसे बड़ा हमला बन गया है। जब प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि ‘सेना के जवानों से अधिक रिस्क देश के व्यापारी लेते हैं’, तो क्या उनका तात्पर्य इसी तरह के जोखिमों से था?

यह घटनाक्रम एक जोरदार चेतावनी है कि सत्ता और पैसे के नशे में डूबे लोगों के लिए नैतिकता की कोई जगह नहीं बची है। यदि इन खुलासों पर जवाबदेही तय नहीं हुई, तो यह सत्ता-पैसा और नेक्सस की आग भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को और कमजोर करेगी। जनता अब जवाब मांग रही है कि आखिर कितने और ऐसे नाम इस गंदी फाइल में छिपे हुए हैं।

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