सुखोई मार्क 1: ऑपरेशन सिंदूर में भारत की स्वदेशी शक्ति
‘सुखोई मार्क 1′, ब्रह्मोस और आकाशतीर जैसी स्वदेशी प्रणालियों ने ऑपरेशन सिंदूर में भारत की निर्णायक जीत में अहम भूमिका निभाई। डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने खुलासा किया कि इन उन्नत तकनीकों ने किस तरह भारत को पाकिस्तान पर रणनीतिक बढ़त दिलाई। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी इस बात की पुष्टि की कि इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने कम से कम छह पाकिस्तानी विमानों को मार गिराया। डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (DIAT) के दीक्षांत समारोह में डॉ. कामत ने इन महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया। यह ऑपरेशन आत्मनिर्भरता, रणनीतिक दूरदर्शिता और स्वदेशी तकनीकी ताकत का प्रमाण था।
- सुखोई मार्क 1 प्लेटफॉर्म से ब्रह्मोस मिसाइल को लॉन्च किया गया था।
- आकाशतीर प्रणाली और एमआरएसएएम का इस्तेमाल रक्षात्मक हथियारों के रूप में हुआ था।
- इन प्रणालियों ने भारत को अपनी सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम बनाया।
ब्रह्मोस और आकाशतीर ने दिखाया अपना दम
डीआरडीओ प्रमुख ने बताया कि ब्रह्मोस मिसाइल एक आक्रामक हथियार के रूप में इस्तेमाल हुई। इसे विशेष रूप से सुखोई मार्क 1 लड़ाकू विमानों से दागा गया था। आकाशतीर प्रणाली का उपयोग रक्षात्मक हथियार के रूप में किया गया। इस प्रणाली ने भारतीय बलों को भारत की ओर आने वाले खतरों की पहचान करने में मदद की। एकम एपी सिंह ने बताया कि भारतीय सेना ने चार दिनों तक चले संघर्ष में कम से कम पाँच लड़ाकू विमान और एक अवाक्स (एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) विमान मार गिराए। यह अब तक का सबसे बड़ा सतह से हवा में मार गिराने का रिकॉर्ड है, जिसकी दूरी लगभग 300 किलोमीटर थी।
- आकाशतीर ने आने वाले खतरों की पहचान करने में मदद की थी।
- डिफेंस टेक्नोलॉजी ने भारत को अपनी सीमाओं की रक्षा में सक्षम बनाया।
- ऑपरेशन सिंदूर भारत की स्वदेशी तकनीकी ताकत का प्रतीक था।
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का राज
पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। भारत ने पाकिस्तान और पीओके (पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर) में नौ आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद चार दिनों तक संघर्ष चला। जिसमें भारतीय सेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पाकिस्तानी हवाई ठिकानों पर हमला किया। डीआरडीओ अध्यक्ष ने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल एक बहुमुखी और दुर्जेय हथियार है, जिसे ज़मीन, हवा और समुद्र से दागा जा सकता है। यह भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है।
- लश्कर से जुड़े आतंकवादियों ने पहलगाम में हमला किया था।
- इस ऑपरेशन में कम से कम 100 आतंकवादी मारे गए थे।
- भारतीय सेना ने 7 मई को यह ऑपरेशन शुरू किया था।
भारत का बढ़ता रक्षा निर्यात लक्ष्य
डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने कहा कि भारत 2028-29 तक 50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात लक्ष्य हासिल कर लेगा। उन्होंने कहा कि पिनाका, एटीएजीएस, ब्रह्मोस और आकाश में काफी दिलचस्पी है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में हमारी प्रणालियों की सफलता से रक्षा निर्यात और भी बढ़ेगा। आने वाले दो से तीन वर्षों में यह निर्यात दोगुना हो सकता है।
- यह लक्ष्य रक्षा मंत्री द्वारा भी डीआरडीओ को दिया गया था।
- भारत का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 में ₹23,622 करोड़ था।
- दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के देश दिलचस्पी ले रहे हैं।
ब्रह्मोस-एनजी: अगली पीढ़ी का हथियार
ब्रह्मोस-एनजी (नेक्स्ट जनरेशन) ब्रह्मोस का एक छोटा संस्करण है। इसे कई प्लेटफार्मों पर लगाया जा सकता है। वर्तमान में, ब्रह्मोस को सिर्फ सुखोई मार्क 1 पर ही लगाया जा सकता है। डॉ. कामत ने डीआईएटी के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि वे क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के माध्यम से देश की रक्षा क्षमता का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अग्रणी बन जाएगा।
लेख का सारांश
इस लेख में हमने देखा कि किस तरह ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने अपनी स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का सफल उपयोग किया। से सुखोई मार्क 1 लॉन्च की गई ब्रह्मोस और आकाशतीर जैसी प्रणालियों ने भारत को पाकिस्तान पर स्पष्ट बढ़त दिलाई। यह भारत की आत्मनिर्भरता और रणनीतिक दूरदर्शिता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। डीआरडीओ प्रमुख ने यह भी बताया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद भारत का रक्षा निर्यात तेजी से बढ़ेगा। भारत 2028-29 तक 50,000 करोड़ रुपये का निर्यात लक्ष्य हासिल करेगा।
- इस ऑपरेशन ने भारत की स्वदेशी तकनीकी शक्ति को दिखाया।
- ब्रह्मोस मिसाइलें भारत की लंबी दूरी की मारक क्षमता का प्रमाण थीं।
- आकाशतीर ने पाकिस्तानी मिसाइलों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



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