तीसरे विश्व युद्ध आहट: ट्रंप की सनक और वेनेजुएला पर अमेरिकी कब्जा
दुनिया के राजनीतिक पटल पर इस वक्त तीसरे विश्व युद्ध की आहट साफ सुनाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का व्यवहार अब एक पागल हाथी से कम नहीं रहा, जो पूरी दुनिया को अराजकता और संभावित महायुद्ध की कगार पर ला खड़ा कर रहा है।
3 जनवरी 2026 को अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने “ऑपरेशन अब्सोल्यूट रिजॉल्व” के तहत वेनेजुएला पर भीषण हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मदुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया। यह ऑपरेशन महीनों की गुप्त प्लानिंग का नतीजा था, जिसमें CIA की इंटेलिजेंस, हाई-टेक ड्रोन सर्विलांस और स्पेशल फोर्सेस शामिल थे।
मदुरो को उनके बेडरूम से उस वक्त उठाया गया, जब वे एक सुरक्षित कमरे (Safe Room) में भागने की कोशिश कर रहे थे। उन्हें तत्काल USS Iwo Jima पर ले जाया गया और वहां से न्यूयॉर्क भेज दिया गया। ट्रंप ने खुद इस दुस्साहस की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका अब वेनेजुएला को “रन” करेगा और वहां के तेल संसाधनों पर पूर्ण नियंत्रण रखेगा।
संप्रभुता का चीरहरण और तेल बाज़ार पर अमेरिकी डाका
ट्रंप की इस सैन्य कार्रवाई में कम से कम 80 लोग मारे गए हैं, जिनमें निर्दोष नागरिक और सैन्य कर्मी दोनों शामिल हैं। इसे एक संप्रभु राष्ट्र पर आधुनिक इतिहास का सबसे क्रूर हमला माना जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन है। ट्रंप ने खुलेआम तेल की बिक्री को कंट्रोल करने का ऐलान किया है और कहा है कि वे 50 मिलियन बैरल तक तेल बेचकर उसके प्रोसीड्स (मुनाफे) का फैसला करेंगे।
यह कदम न केवल रूस और चीन जैसे देशों को भड़का रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में तीसरे विश्व युद्ध की आहट को और तेज कर रहा है। ट्रंप की यह नीति साफ तौर पर अमेरिकी साम्राज्यवाद की एक नई और डरावनी मिसाल है, जहाँ वह तेल पर अपना एकाधिकार थोपना चाहता है।
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समुद्री डकैती और रूसी टैंकरों की जब्ती से भड़का मॉस्को
अमेरिकी आक्रामकता केवल जमीन तक सीमित नहीं रही; 7 जनवरी 2026 को अमेरिकी फोर्सेस ने नॉर्थ अटलांटिक में रूसी फ्लैग वाले ऑयल टैंकर ‘मैरीनेरा’ (पुराना नाम बेला-1) को जब्त कर लिया। यह जहाज “घोस्ट फ्लीट” का हिस्सा बताया जा रहा था, जो सैंक्शंस से बचने के लिए नाम बदलता रहता था। यूएस कोस्ट गार्ड कटर ‘मुनरो’ और यूके की मदद से इसे आइसलैंड के पास हफ्तों के पीछा करने के बाद पकड़ा गया।
इसके क्रू में रूसी और यूक्रेनी सदस्य शामिल हैं जिन्हें हिरासत में लिया गया है। रूस ने इसे सीधे तौर पर ‘समुद्री डकैती’ करार दिया है। इसी दिन कैरिबियन में एक और टैंकर एम/टी सोफिया को भी जब्त किया गया। ये घटनाएं वैश्विक सप्लाई चेन में अस्थिरता पैदा कर रही हैं और रूस-चीन गठबंधन को अमेरिका के खिलाफ और मजबूत कर रही हैं।
पीएम मोदी पर व्यक्तिगत हमला और भारत की गरिमा पर प्रहार
इसी बीच, ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार तीखे व्यक्तिगत हमले शुरू कर दिए हैं। 7 जनवरी 2026 को ट्रंप ने अपमानजनक दावा किया कि पीएम मोदी अपाचे हेलीकॉप्टर डील के लिए उनसे गिड़गिड़ाए थे।
ट्रंप के शब्दों में, मोदी ने कहा— “सर, क्या मैं आपसे मिल सकता हूं?”। ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री को एक “कमजोर और याचक नेता” (Pleading Leader) बताते हुए दावा किया कि भारत रूसी तेल आयात रोकने के लिए अब मजबूर है।
ट्रंप द्वारा भारत की गरिमा पर किए गए इस प्रहार ने देश के भीतर भी राजनीतिक उबाल पैदा कर दिया है। कांग्रेस ने मोदी की चुप्पी को ‘कायरतापूर्ण’ करार दिया है और राहुल गांधी ने इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए मोदी के “56 इंच की छाती” वाले दावों पर कड़े सवाल उठाए हैं।
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भारत को 500% टैरिफ की धमकी और ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025’
ट्रंप का “अमेरिका फर्स्ट” अब दुनिया के लिए खतरा बन चुका है। उन्होंने भारत पर 500% टैरिफ लगाने की सीधी धमकी दी है, क्योंकि भारत अपनी जरूरतों के लिए रूसी तेल खरीदना जारी रखे हुए है। यह पूरा विवाद ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025’ से जुड़ा है, जिसे ट्रंप ने खुद “ग्रीनलाइट” किया है।
सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने स्पष्ट किया है कि यह बिल भारत, चीन और ब्राजील जैसे उन तमाम देशों को सजा देने के लिए है जो रूस के साथ व्यापारिक संबंध बनाए हुए हैं। यह आर्थिक साम्राज्यवाद की वह नई रणनीति है, जिससे ट्रंप खुद को दुनिया का “ऑयल मैनेजर” बनाना चाहता है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को कुचलने पर आमादा है।
भारतीय शेयर बाजार में कोहराम और 8 लाख करोड़ की तबाही
ट्रंप की इन धमकियों और वैश्विक अस्थिरता का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखना शुरू हो गया है। 8 जनवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी अफरा-तफरी मची और सेंसेक्स 780 पॉइंट्स तक लुढ़क गया। निफ्टी भी 26,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया।
इस गिरावट के कारण निवेशकों ने एक ही झटके में 8 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाया। यह बाजार में गिरावट का लगातार चौथा दिन था। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के आउटफ्लो, आईटी और मेटल सेक्टर्स में भारी बिकवाली देखी गई। जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार की निष्क्रियता ने निवेशकों के मन में डर को और बढ़ा दिया है, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की अनदेखी को दर्शाता है।
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रूस-चीन गठबंधन और महायुद्ध का मुहाना
ट्रंप की सनक ने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आहट के बीच गंभीर खतरे में डाल दिया है। वेनेजुएला पर कब्जा और रूसी संपत्तियों की जब्ती रूस के हितों पर सीधा प्रहार है। रूस पहले ही यूक्रेन युद्ध में अमेरिका से सीधे टकराव की स्थिति में है, और अब यह नई कार्रवाई आग में घी डालने का काम कर रही है।
यदि रूस ने जवाबी कार्रवाई की या चीन ने उसे खुला सैन्य समर्थन दिया, तो तीसरा विश्व युद्ध अपरिहार्य हो जाएगा। एक अमेरिकी लैंड माफिया से राष्ट्रपति बने व्यक्ति की सनक ने वैश्विक शांति को दांव पर लगा दिया है, जहां कूटनीति की जगह केवल धमकियां और सैन्य बल ले चुका है।
विश्वगुरु की खामोशी और राष्ट्रीय स्वाभिमान का सवाल
अंत में, प्रधानमंत्री मोदी की रहस्यमयी खामोशी अब स्वाभिमानी भारतीयों के लिए असहनीय होती जा रही है। “विश्वगुरु” का दावा करने वाले देश का प्रधानमंत्री अमेरिका की गोद में बैठकर इस अपमान को कैसे बर्दाश्त कर सकता है? ट्रंप द्वारा दी जा रही धमकियां और व्यक्तिगत अपमान राष्ट्रीय गरिमा का मजाक उड़ा रहे हैं।
इतिहास गवाह है कि एक मजबूत नेता जवाब देता है, चुप रहकर जहर नहीं पीता। यदि भारत सरकार ने अभी अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी, तो देश न केवल आर्थिक गर्त में जाएगा बल्कि तीसरे विश्व युद्ध की आहट के बीच युद्ध की आग में भी झुलस सकता है। समय आ गया है कि मोदी सरकार इस कायरतापूर्ण चुप्पी को तोड़े, वरना इतिहास उन्हें एक डरपोक नेतृत्व के रूप में याद रखेगा।
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