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ट्रंप का परमाणु दावा: क्या भारत-पाक में सचमुच होने वाला था युद्ध?

ट्रंप का परमाणु दावा

ट्रंप का परमाणु दावा इस समय पूरी दुनिया की हेडलाइंस में छाया हुआ है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन के दौरान एक ऐसी बात कह दी है जिसने कूटनीतिज्ञों को हैरान कर दिया है। बुधवार, 25 फरवरी 2026 को अमेरिकी संसद को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि उनके व्यक्तिगत हस्तक्षेप के बिना भारत और पाकिस्तान के बीच एक विनाशकारी परमाणु युद्ध छिड़ गया होता।

ट्रंप ने अपनी चिर-परिचित शैली में कहा कि अगर वे बीच में न आते तो आज दक्षिण एशिया का नक्शा कुछ और ही होता। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या वाकई 2024-25 के दौरान स्थितियां इतनी बिगड़ गई थीं या यह ट्रंप का महज एक चुनावी चुनावी जुमला है।

पाक पीएम मर जाते: ट्रंप की जुबान फिसली या कोई गहरा कूटनीतिक रहस्य?

अपने भाषण के दौरान ट्रंप का परमाणु दावा तब और भी विवादास्पद हो गया जब उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री “मेरे बिना मर गए होते”। हालांकि, बाद में टाइम्स ऑफ इंडिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने विश्लेषण किया कि शायद ट्रंप की जुबान फिसल गई थी।

दरअसल, वे यह कहना चाहते थे कि “पाकिस्तान (एक देश के रूप में) खत्म हो गया होता” या शायद वे उन 3.5 करोड़ लोगों की बात कर रहे थे जो एक संभावित परमाणु युद्ध में अपनी जान गंवा सकते थे।

लेकिन ट्रंप के “पीएम वुड हैव डाइड” वाले बयान ने सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ ला दी है। आलोचक इसे ट्रंप का बड़बोलापन कह रहे हैं, जबकि उनके समर्थक इसे उनकी ‘मजबूत विदेश नीति’ का प्रमाण मान रहे हैं।

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ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र: जब ट्रंप ने ली भारत-पाक संघर्ष को खत्म करने की जिम्मेदारी

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने संबोधन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र किया, जो हाल के दिनों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का केंद्र रहा है। ट्रंप का परमाणु दावा इसी ऑपरेशन के इर्द-गिर्द घूमता है। ट्रंप ने कहा कि जब दोनों देश एक-दूसरे पर मिसाइलें दागने के लिए तैयार थे, तब उन्होंने सीधे दोनों देशों के नेतृत्व से बात की और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर किया।

उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के नेतृत्व ने खुद उनसे कहा था कि अगर अमेरिका बीच-बचाव नहीं करता, तो करोड़ों लोग मारे जाते। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय या पाकिस्तान की ओर से इस दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है, जिससे यह मामला और भी रहस्यमयी हो गया है।

युद्ध रुकवाने का क्रेडिट: क्या वाकई भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर ट्रंप की देन है?

द हिंदू द्वारा साझा किए गए वीडियो में ट्रंप को यह कहते सुना जा सकता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच वर्तमान में जारी सीजफायर उनकी ‘आर्ट ऑफ द डील’ का परिणाम है। ट्रंप का परमाणु दावा इस तर्क पर आधारित है कि दक्षिण एशिया में शांति केवल अमेरिकी दबाव के कारण बनी हुई है।

ट्रंप ने खुद को एक ‘शांतिदूत’ के रूप में पेश करते हुए कहा कि ओबामा या बाइडन के दौर में ऐसा होना नामुमकिन था। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप इस बयान के जरिए घरेलू वोटरों को यह दिखाना चाहते हैं कि वे दुनिया के सबसे खतरनाक संघर्षों को सुलझाने की क्षमता रखते हैं। लेकिन भारत के कूटनीतिक हलकों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि ट्रंप द्विपक्षीय मसलों में अपनी भूमिका को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं।

जेन-जी और सोशल मीडिया आउटरेज: ‘सेवियर कॉम्प्लेक्स’ या ग्लोबल लीडरशिप?

आज की डिजिटल पीढ़ी यानी जेन-जी इस खबर को ‘सेवियर कॉम्प्लेक्स’ (सबको बचाने वाला मसीहा) के नजरिए से देख रही है। इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर ट्रंप के भाषण के क्लिप्स वायरल हो रहे हैं, जहाँ युवा यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या ट्रंप हर बड़ी घटना का क्रेडिट खुद लेना चाहते हैं?

#TrumpSOTU और #IndiaPakWar हैशटैग के साथ लोग ट्रंप की अतिशयोक्ति पर चुटकी ले रहे हैं। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह तरीका भले ही अजीब हो, लेकिन इसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान फिर से कश्मीर और दक्षिण एशिया के परमाणु खतरे की ओर खींच लिया है। युवाओं के बीच यह बहस छिड़ी हुई है कि क्या वाकई एक व्यक्ति परमाणु युद्ध रोक सकता है या यह पूरी तरह से कूटनीतिक प्रोटोकॉल का हिस्सा था।

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3.5 करोड़ मौतों का आंकड़ा: ट्रंप के डरावने आंकड़ों के पीछे का सच क्या है?

ट्रंप ने अपने भाषण में एक डरावना आंकड़ा पेश किया कि अगर वे हस्तक्षेप नहीं करते तो 35 मिलियन यानी 3.5 करोड़ लोग मारे जाते। यह संख्या किसी भी युद्ध के लिहाज से भयावह है। विशेषज्ञों का कहना है कि परमाणु युद्ध की स्थिति में यह आंकड़ा शायद इससे भी बड़ा हो सकता था, लेकिन ट्रंप द्वारा इस विशिष्ट संख्या का जिक्र करना यह दर्शाता है कि उन्हें शायद किसी खुफिया ब्रीफिंग में संभावित हताहतों का अनुमान दिया गया था।

भारत और पाकिस्तान दोनों ही परमाणु संपन्न देश हैं और उनके बीच किसी भी बड़े संघर्ष का असर केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह ‘न्यूक्लियर विंटर’ जैसी स्थिति पैदा कर सकता है जो पूरी दुनिया के लिए खतरा है।

कूटनीतिक असर: भारत और पाकिस्तान के संबंधों पर ट्रंप के बयान का क्या प्रभाव होगा?

ट्रंप के इस सनसनीखेज बयान के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में एक नई तरह की असहजता पैदा हो गई है। भारत हमेशा से यह कहता आया है कि पाकिस्तान के साथ उसका कोई भी विवाद द्विपक्षीय है और इसमें किसी तीसरे पक्ष (Third Party) के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

ट्रंप का यह दावा भारत की इस नीति को चुनौती देता है। वहीं, पाकिस्तान के लिए यह बयान एक अजीब स्थिति पैदा करता है क्योंकि ट्रंप ने वहां के पीएम को ‘बचाए जाने’ की बात कही है, जो किसी भी संप्रभु देश के नेता के लिए अपमानजनक हो सकता है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि ट्रंप के इस दावे को कितनी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

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डोनाल्ड ट्रंप की शैली और कूटनीति के बीच का धुंधला सच

अंततः, डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान उनके व्यक्तित्व की तरह ही विशाल और विवादित है। वे एक ऐसे नेता हैं जो अपनी उपलब्धियों को शानदार तरीके से पेश करना जानते हैं, चाहे उसमें कितनी भी अतिशयोक्ति क्यों न हो। भारत और पाकिस्तान के बीच शांति बनी रहना दुनिया के हित में है, लेकिन इसका पूरा श्रेय किसी एक व्यक्ति को देना ऐतिहासिक तथ्यों के साथ न्याय नहीं होगा।

यह सच है कि अमेरिका ने समय-समय पर दोनों देशों के बीच तनाव कम करने में भूमिका निभाई है, लेकिन वास्तविक शांति दोनों देशों के नेतृत्व और जनता की इच्छाशक्ति पर निर्भर करती है।

ट्रंप का यह दावा भविष्य में उनकी विदेश नीति के प्रचार का हिस्सा बना रहेगा, लेकिन इतिहास इसे एक ‘चुनावी स्टंट’ के रूप में याद रखेगा या ‘महान कूटनीति’ के रूप में, यह अभी भविष्य के गर्भ में है।

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