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अमेरिका फर्स्ट नीति: ट्रम्प ने मानवाधिकार रिपोर्टिंग गेटवे हटाया

अमेरिका फर्स्ट नीति

अमेरिका फर्स्ट नीति के नाम पर डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन द्वारा उठाया गया एक विवादास्पद कदम अब वैश्विक मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए एक गंभीर और बहुआयामी झटका साबित हो रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा ह्यूमन राइट्स रिपोर्टिंग गेटवे (HRG) पोर्टल को स्थायी रूप से हटाने का फैसला न केवल लीही लॉ के प्रावधानों की अवहेलना करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी सैन्य सहायता के दुरुपयोग को भी बढ़ावा देता है।

यह पोर्टल, जिसे 2022 में स्थापित किया गया था, लीही लॉ के 2011 संशोधन के तहत अमेरिकी हथियारों से लैस विदेशी सैन्य इकाइयों द्वारा किए गए गंभीर उल्लंघनों, जैसे अतिरिक्त-न्यायिक हत्याएं, यातनाएं, बलात्कार, जबरन गायब करना और यौन हिंसा की रिपोर्टिंग का एक सुरक्षित, गुमनाम और प्रत्यक्ष माध्यम प्रदान करता था।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इसकी स्थापना लगातार प्रशासनों पर दबाव के बाद हुई थी, ताकि अमेरिकी सरकार को सूचनाओं की “प्राप्ति सुविधाजनक” करना सुनिश्चित हो सके, विशेष रूप से उन मामलों में जहां एनजीओ और व्यक्तिगत गवाह जोखिम भरे क्षेत्रों से सूचना साझा करते थे।

लेकिन 2025 में ट्रम्प प्रशासन के तहत इसे स्थायी रूप से हटाने से, पीड़ितों और गवाहों के लिए आवाज उठाना और भी कठिन हो गया है, जो वैश्विक मानवाधिकार ढांचे को कमजोर करता है।

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लीही लॉ का स्पष्ट उल्लंघन और जवाबदेही पर आघात

डेमोक्रेसी एडवोकेसी सेंटर (DAWN) के अनुसार, इस पोर्टल की बंदी से विभाग को महत्वपूर्ण सूचनाओं तक पहुंच कम हो गई है, जो अन्यथा प्राप्त नहीं होतीं, और यह कार्य सिविल सोसाइटियों को अलग-थलग कर देता है। यह कदम लीही लॉ का स्पष्ट उल्लंघन है, जो 1997 से अमेरिकी सहायता प्राप्त विदेशी सुरक्षा बलों को मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए अयोग्य ठहराने का प्रावधान करता है, और जिसमें राज्य विभाग तथा पेंटागन दोनों के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं।

पूर्व सीनेटर पैट्रिक लीही के वरिष्ठ सहायक टिम रीसियर ने बीबीसी को बताया कि पोर्टल को हटाना “कानून की स्पष्ट अवहेलना” है, क्योंकि यह सूचना संग्रह का अनिवार्य तंत्र था, जो “क्रेडिबल इंफॉर्मेशन” जुटाने के लिए आवश्यक था। डिमसम डेली की रिपोर्ट में उल्लेख है कि यह पोर्टल एनजीओ और व्यक्तियों को विश्व स्तर पर रिपोर्ट जमा करने की अनुमति देता था, जो लीही वेटिंग प्रक्रिया को मजबूत बनाता था, और 2024-2025 में इसकी फंडिंग में वृद्धि हुई थी।

लेकिन अब इसकी अनदेखी से अमेरिकी सैन्य सहायता के दुरुपयोग को रोकने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे अमेरिका की वैश्विक विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

इजरायल लीही वेटिंग फोरम की अपारदर्शिता

प्रो-पब्लिका की जांच से पता चलता है कि इजरायल के लिए विशेष “इजरायल लीही वेटिंग फोरम” (ILVF) जैसी प्रक्रियाएं पहले से ही लीही लॉ को कमजोर कर रही थीं, जहां उल्लंघनों की रिपोर्टों को महीनों तक लंबित रखा जाता था, और अब एचआरजी की अनुपस्थिति से यह प्रक्रिया और भी अपारदर्शी हो गई है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल यूएसए ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है और पुष्टि की कि वे अमेरिकी हथियारों से लैस इजरायली इकाइयों द्वारा वेस्ट बैंक में 2023 के अक्टूबर-नवंबर में 20 फिलिस्तीनियों की हत्याओं पर रिपोर्ट जमा करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन पोर्टल हटने से यह संभव नहीं हो सका।

वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्टों से महत्वपूर्ण सेक्शन गायब

ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने 2025 की अपनी रिपोर्ट में कहा कि ट्रम्प प्रशासन द्वारा वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्टों से महत्वपूर्ण सेक्शन हटाने से, जैसे महिलाओं, LGBTQ+, विकलांगों और भ्रष्टाचार पर, पीड़ितों की सुरक्षा कमजोर हो रही है। फ्रीडम हाउस और जस्ट सिक्योरिटी जैसी संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि वैकल्पिक माध्यमों की कमी से रिपोर्टिंग में देरी और असुरक्षा बढ़ेगी, जो पहले से ही जोखिम भरे क्षेत्रों में काम करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए खतरा है।

जस्ट सिक्योरिटी के अनुसार, एचआरजी को दुनिया भर में प्रचारित करने की बजाय इसे हटाना कांग्रेस की बढ़ती फंडिंग को व्यर्थ करता है। HRW की 2025 रिपोर्ट में उल्लेख है कि इस बंदी से शरणार्थी मामलों और कूटनीतिक निर्णय प्रभावित होंगे।

X (पूर्व ट्विटर) पर DAWN ने 18 अगस्त 2025 को पोस्ट किया कि यह बंदी सिविल सोसायटियों को उनकी आवाज से वंचित करती है, जबकि बीबीसी के पत्रकार टॉम बैटमैन ने 22 अक्टूबर को वीडियो के साथ पुष्टि की कि यह दुनिया का एकमात्र सार्वजनिक चैनल था। यह संगठनों की आवाज को दबाने जैसा है, जो लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्षरत हैं।

दमनकारी देशों को खुली छूट: कोलंबिया, इजरायल, मिस्र का उदाहरण

इस पोर्टल का बंद होना उन देशों की जवाबदेही को सीधे प्रभावित करता है जहां अमेरिकी सैन्य सहायता का उपयोग दमनकारी तरीके से हो रहा है। 2024-2025 के आंकड़े इसे और स्पष्ट करते हैं। उदाहरणस्वरूप, कोलंबिया में 2021 के एंटी-गवर्नमेंट विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग की रिपोर्ट एचआरजी के माध्यम से जमा की गई थी, जिसमें कम से कम 47 मौतें हुईं, और UNHCR के अनुसार, यह विस्थापन का प्रमुख कारण बना, विशेष रूप से अफ्रो-कोलंबियन और स्वदेशी समुदायों को प्रभावित करते हुए।

इजरायल के कब्जे वाले क्षेत्रों में आईडीएफ की कार्रवाइयों पर भी इसी तरह की रिपोर्टें लंबित थीं, जहां 2024 में पांच इजरायली इकाइयों को गंभीर उल्लंघनों जैसे यातना, बलात्कार और न्यायेतर हत्याओं के लिए दोषी पाया गया, लेकिन सहायता पर कोई रोक नहीं लगी।

मिस्र में, जहां अमेरिकी सहायता प्रति वर्ष 1.3 बिलियन डॉलर है, 2024 में सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर दमन बढ़ा, जिसमें टॉर्चर और जबरन गायब करने की 500 से अधिक घटनाएं दर्ज हुईं, जैसा कि HRW की रिपोर्ट में उल्लेख है।

एनपीआर और अल जजीरा की रिपोर्टों से पता चलता है कि ट्रम्प प्रशासन के तहत मानवाधिकार रिपोर्टों को छोटा किया गया है, जिसमें LGBTQ अधिकारों, महिलाओं के मुद्दों और जेल स्थितियों को नजरअंदाज किया गया, जो सहयोगी देशों जैसे इजरायल, मिस्र और कोलंबिया को लाभ पहुंचाता है।

बच्चों के खिलाफ उल्लंघन और कार्रवाई की अनुपस्थिति

UN की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल/फिलिस्तीन में बच्चों के खिलाफ उल्लंघन 2024 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे, जिसमें 41,370 मामले सत्यापित हुए, लेकिन लीही लॉ के तहत कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे विदेशी सेनाओं को बिना किसी डर के उल्लंघन जारी रखने की छूट मिल जाती है।

विदेश विभाग का दावा है कि लीही लॉ का पालन जारी रहेगा और शिकायतें “वैकल्पिक माध्यमों” से स्वीकार की जाएंगी, लेकिन पूर्व स्टेट डिपार्टमेंट के सिक्योरिटी एंड ह्यूमन राइट्स ऑफिस के डायरेक्टर चार्ल्स ब्लाहा ने कहा कि अब क्षेत्र में लोगों के पास “कोई स्थापित चैनल” नहीं बचा, और DAWN के अनुसार, यह पोर्टल बंदी सूचना प्रवाह को पूरी तरह अवरुद्ध कर देती है।

पुनर्संरचना और अमेरिकी नैतिक उच्च स्थान का ह्रास

पोलिटिको और गार्जियन की रिपोर्टों में उल्लेख है कि विभाग की पुनर्संरचना में सैकड़ों मानवाधिकार निगरानी कार्यालय बंद किए गए, यह सब अमेरिका फर्स्ट नीति के नाम पर हो रहा है, और 2025 की वार्षिक रिपोर्ट से 20 से अधिक श्रेणियां जैसे भ्रष्टाचार, सभा की स्वतंत्रता और जातीय हिंसा विषय हटा दिए गए।

अब तो यह अमेरिका फर्स्ट नीति का दावा खोखला लगता है, क्योंकि बिना पारदर्शी तंत्र के वैकल्पिक रास्ते अप्रभावी साबित होते हैं, जैसा कि बाइडेन प्रशासन में भी प्रचार की कमी से हुआ, जहां एचआरजी का पायलट फेज पूरा होने के बाद भी इसे पर्याप्त प्रचार नहीं मिला।

X पर जूलिया डेविस ने 19 अप्रैल 2025 को पोस्ट किया कि यह कटौती अमेरिकी सहयोगियों के उल्लंघनों को छिपाती है, जबकि INPR के अनुसार, हंगरी और एल सल्वाडोर जैसे देशों की आलोचना कम हो गई है।

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वैश्विक नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर दबाव

वैश्विक स्तर पर, यह कदम अमेरिकी नेतृत्व को कमजोर करता है और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर दबाव बढ़ाता है। UAB इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन राइट्स ब्लॉग के अनुसार, वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्टों से महत्वपूर्ण सामग्री हटाना दमनकारी शासनों को प्रोत्साहित करता है, जैसे इजरायल में जहां 2024 में गाजा में सामूहिक विस्थापन और भुखमरी को हथियार बनाने की घटनाएं दर्ज हुईं, लेकिन रिपोर्ट में इन्हें नजरअंदाज किया गया।

हंगरी, एल सल्वाडोर और इजरायल जैसे सहयोगी देशों की आलोचना कम करना राजनीतिक पूर्वाग्रह दर्शाता है, जबकि ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे विरोधी देशों पर अधिक जोर, जैसा कि बीबीसी ने 2025 में रिपोर्ट किया। CSIS की रिपोर्ट बताती है कि ये दस्तावेज शरणार्थी मामलों, निवेश निर्णयों और कूटनीति को प्रभावित करते हैं, और बिना मजबूत रिपोर्टिंग के, अमेरिका का नैतिक उच्च स्थान खोना अब लगभग निश्चित है।

UN की विशेष समिति 2025 की रिपोर्ट में उल्लेख है कि इजरायल की एआई-आधारित निगरानी ने गाजा में नागरिक हताहतों को बढ़ाया, लेकिन उस पर लीही लॉ के तहत कोई प्रतिबंध नहीं लगा। X पर इयान ब्रेमर ने 18 अप्रैल 2025 को कहा कि यह रिपोर्ट अब एल सल्वाडोर और हंगरी से अधिक संरेखित है।

मानवाधिकारों के पक्ष में खड़े होने के लिए तत्काल कार्रवाई आवश्यक है, जिसमें अमेरिकी कांग्रेस को लीही लॉ के अनुपालन की जांच करनी चाहिए, दुनिया भर के एनजीओ को मिलकर वैकल्पिक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने चाहिए, और दूतावासों को एचआरजी जैसा तंत्र बहाल करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।

जैसे जस्ट सिक्योरिटी ने सुझाया, और HRW की 2025 रिपोर्ट में जोर दिया गया कि यूके ने इजरायल को हथियार निर्यात रोके हैं, वैसे ही अमेरिका को भी ऐसा करना चाहिए। DAWN के चार्ल्स ब्लाहा ने कहा कि यह पोर्टल बंदी गाजा जैसे संघर्ष क्षेत्रों में नागरिकों को न्याय से वंचित करती है।

यह न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाएगा, बल्कि अमेरिकी मूल्यों को पुनर्स्थापित करेगा। मानवाधिकार सार्वभौमिक हैं, और इन्हें राजनीतिक सुविधा या “अमेरिका फर्स्ट” नीति के नाम पर बलिदान नहीं किया जा सकता; अन्यथा, वैश्विक लोकतंत्र का आधार ही हिल जाएगा।

डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया समीकरण बना दिया। यह नीति राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखती है।

अमेरिका ने व्यापारिक साझेदारियों की समीक्षा की।विदेशी सैन्य खर्चों में कटौती पर ज़ोर दिया गया।मित्र देशों के साथ रक्षा अनुबंधों का पुनर्मूल्यांकन हुआ।

इस नीति के तहत, अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र और नाटो जैसे संगठनों में अपने योगदान पर पुनर्विचार किया। इससे कई यूरोपीय देशों में असंतोष बढ़ा।

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