ट्रंप की चेतावनी: 50% ड्यूटी के बाद क्या टैरिफ की नई मार झेलेगा भारत?
टैरिफ की नई मार का खतरा एक बार फिर भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों पर मंडराने लगा है, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल के निरंतर आयात को लेकर भारत पर नए और कड़े टैरिफ लगाने की सीधी चेतावनी दी है। रविवार को फ्लोरिडा से वाशिंगटन डी.सी. जाते समय एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे भारत द्वारा रूस से तेल खरीदे जाने से “खुश नहीं” थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी बातचीत का हवाला देते हुए इसे अपनी व्यक्तिगत निराशा बताया और संकेत दिया कि नई दिल्ली को मास्को के साथ अपने ऊर्जा संबंधों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर करने हेतु वाशिंगटन व्यापार दबाव का इस्तेमाल कर सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी को मेरी नाराजगी का पता था: ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी इस बात से अच्छी तरह वाकिफ थे कि रूसी तेल की खरीद अमेरिका को रास नहीं आ रही है। ट्रंप के शब्दों में, “प्रधानमंत्री मोदी जानते थे कि मैं खुश नहीं था। वे मुझे खुश करना चाहते थे। वे हमारे साथ बहुत व्यापार करते हैं, और टैरिफ बहुत तेज़ी से बढ़ सकते हैं।” यह बयान अमेरिका-भारत संबंधों में एक नए तनाव को दर्शाता है, जहाँ वाशिंगटन अपने रणनीतिक साझेदारों पर रूस के साथ आर्थिक जुड़ाव कम करने का दबाव बना रहा है। ट्रंप ने मोदी को “बहुत अच्छा आदमी” और “एक अच्छा इंसान” बताते हुए यह भी कहा कि भारत जानता है कि उन्हें खुश रखना उनके व्यापारिक हितों के लिए कितना महत्वपूर्ण है।
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रूसी तेल आयात पर 50% ड्यूटी का भारी बोझ
वर्तमान में, भारतीय सामान पहले से ही अमेरिका को निर्यात किए जाने पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ का सामना कर रहे हैं। इसमें 25 प्रतिशत व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए ‘रेसिप्रोकल ड्यूटी’ और 25 प्रतिशत रूसी तेल खरीदने से जुड़ी अतिरिक्त ‘लेवी’ शामिल है, जिसे अगस्त 2025 में लगाया गया था। टैरिफ की नई मार की चेतावनी तब आई है जब भारत पहले से ही इस भारी शुल्क के नीचे दबा हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जब तक रूसी तेल आयात में और कमी नहीं आती और अमेरिकी अदालत का फैसला नहीं आ जाता, तब तक ये शुल्क बने रह सकते हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर वाशिंगटन असंतुष्ट रहा, तो यह शुल्क और भी “जल्द” बढ़ाया जा सकता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बुरा होगा।
सीनेटर लिंडसे ग्राहम का 500% टैरिफ वाला कड़ा विधेयक
ट्रंप के साथ मौजूद दक्षिण कैरोलिना के सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है। ग्राहम ‘2025 प्रतिबंध रूस अधिनियम’ (Restricting Russia Act of 2025) नामक एक कानून को प्रायोजित कर रहे हैं, जो राष्ट्रपति को रूसी तेल, गैस या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक के ‘सेकेंडरी टैरिफ’ लगाने की व्यापक शक्तियां प्रदान करेगा। ग्राहम का तर्क है कि पुतिन के युद्ध वित्तपोषण को रोकने के लिए उनके ग्राहकों पर भारी दबाव डालना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भारतीय राजदूत ने उनसे मुलाकात कर टैरिफ में राहत की मांग की थी, जिस पर ग्राहम ने स्पष्ट किया कि टैरिफ की नई मार से बचने का एकमात्र रास्ता रूसी तेल की खरीद में कटौती करना है।
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भारत की ऊर्जा रणनीति और अमेरिकी दबाव का असर
भारत ने लगातार यह तर्क दिया है कि रूस के साथ उसके संबंध राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित हैं, न कि राजनीतिक गठबंधन पर। नई दिल्ली का कहना है कि 1.4 अरब की आबादी के लिए ऊर्जा की सामर्थ्य और उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण है। हालांकि, अमेरिकी दबाव का असर अब आंकड़ों में दिखने लगा है। इंडस्ट्री अनुमानों के अनुसार, दिसंबर में भारत का रूसी तेल आयात गिरकर 1.2 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया है, जो तीन साल का सबसे निचला स्तर है। यह 2025 के मध्य के उच्चतम स्तर से 40 प्रतिशत कम है। इसी समय, भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल की खरीद में रिकॉर्ड वृद्धि की है, जो नवंबर में भारत के कुल आयात का 13.19% रहा।
भारतीय शेयर बाजार और निवेशकों में बढ़ी बेचैनी
ट्रंप की इस नई चेतावनी का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला। टेक्नोलॉजी और निर्यात पर केंद्रित कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को डर है कि भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार के साथ बढ़ता तनाव निर्यात को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। टैरिफ की नई मार की आशंका के बीच निफ्टी और बैंक निफ्टी जैसे सूचकांकों में सावधानी देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टैरिफ और बढ़ते हैं, तो भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहना मुश्किल हो जाएगा, जिससे विकास दर प्रभावित हो सकती है।
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द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर अटकी निगाहें
भारत और अमेरिका पिछले साल मार्च से एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत कर रहे हैं। अब तक छह दौर की उच्च-स्तरीय बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। भारतीय पक्ष पहले चरण में मौजूदा अतिरिक्त टैरिफ में राहत चाहता है, जबकि अमेरिका चाहता है कि भारत पहले रूसी तेल पर अपनी निर्भरता पूरी तरह कम करे। 9-10 दिसंबर को नई दिल्ली में हुई अंतिम बातचीत भी बेनतीजा रही थी। ट्रंप प्रशासन द्वारा व्यापार नीति को भू-राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग करने से भारत के लिए रूस और अमेरिका के बीच संतुलन बनाए रखना एक ‘नाजुक संतुलन’ (Delicate Balance) बन गया है।
भविष्य की चुनौतियां और रणनीतिक विकल्प
दिसंबर 2025 के अंत में रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों ने प्रतिबंधों के डर से कुछ रूसी तेल खरीद बंद करने की घोषणा की है। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय या वाणिज्य मंत्रालय ने ट्रंप की नवीनतम टिप्पणियों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। ट्रंप का यह कहना कि टैरिफ “बहुत जल्दी” बढ़ सकते हैं, संकेत देता है कि आने वाले महीनों में वाशिंगटन अपनी व्यापारिक शर्तों को और कड़ा करेगा। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए सस्ता कच्चा तेल भी सुनिश्चित करे और अमेरिका जैसे प्रमुख निर्यात बाजार पर टैरिफ की नई मार से भी खुद को बचाए रखे।
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