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TTD लड्डू घोटाला: SIT की फाइनल चार्जशीट में 36 आरोपी नामजद

SIT की फाइनल चार्जशीट

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के विश्व प्रसिद्ध ‘श्रीवारी लड्डू’ प्रसादम की पवित्रता से खिलवाड़ करने वाले बड़े सिंडिकेट का अब पूरी तरह पर्दाफाश हो चुका है। करीब 15 महीनों की लंबी और गहन जांच के बाद, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की अगुवाई वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने नेल्लोर की एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) कोर्ट के समक्ष अपनी SIT की फाइनल चार्जशीट पेश कर दी है।

इस चार्जशीट ने न केवल मंदिर प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि करोड़ों भक्तों की आस्था को ठेस पहुँचाने वाली उस गहरी साज़िश की परतें भी खोल दी हैं, जिसमें ₹250 करोड़ का वारा-न्यारा किया गया था। जांच के दौरान पाया गया कि मंदिर की रसोई तक पहुँचने वाला घी शुद्ध दूध से नहीं, बल्कि सिंथेटिक तरीके से तैयार किया गया था।

उत्तराखंड की भोले बाबा डेयरी और 36 आरोपियों पर कसा शिकंजा

इस सनसनीखेज घोटाले के केंद्र में उत्तराखंड की ‘भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी’ का नाम प्रमुखता से उभरा है। SIT की फाइनल चार्जशीट के मुताबिक, इस डेयरी के डायरेक्टर पोमिल जैन और विपिन जैन को इस पूरे जालसाजी का मुख्य मास्टरमाइंड माना गया है।

चार्जशीट में कुल 36 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें डेयरी मालिकों के साथ-साथ बिचौलिए और TTD के भ्रष्ट कर्मचारी भी शामिल हैं। इनके अलावा, वैष्णवी डेयरी के अपूर्व विनयकांत चावड़ा, एआर डेयरी के आर राजशेखरन और दिल्ली के कारोबारी अजय कुमार सुगंध के नाम भी मुख्य आरोपियों की सूची में दर्ज हैं। इन सभी पर धोखाधड़ी और मिलावट की इस बड़ी साज़िश को अंजाम देने का गंभीर आरोप है।

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₹250 करोड़ का स्कैम और 68 लाख किलोग्राम नकली घी की सप्लाई

जांच रिपोर्ट के आँकड़े चौंकाने वाले हैं। वर्ष 2021 से 2024 के बीच, जब राज्य में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की सरकार थी, तब मंदिर प्रबंधन को लगभग 68 लाख किलोग्राम नकली घी सप्लाई किया गया। इस घी की कुल कीमत करीब ₹250 करोड़ आंकी गई है।

रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यह कथित ‘घी’ असली दूध की एक बूंद खरीदे बिना ही तैयार कर लिया गया था। यह TTD के इतिहास के सबसे बड़े खरीद घोटालों में से एक है। SIT की फाइनल चार्जशीट के अनुसार, इस नकली घी को पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और खतरनाक केमिकल एडिटिव्स के मिश्रण से तैयार किया गया था, जिसे बाद में लड्डू प्रसादम बनाने में इस्तेमाल किया गया।

क्वालिटी चेक को बायपास करने के लिए अधिकारियों से मिलीभगत

यह घोटाला इतना लंबा सिर्फ इसलिए खिंचा क्योंकि इसमें अंदरूनी मदद शामिल थी। जांच में पाया गया कि आरोपियों ने TTD के प्रोक्योरमेंट विभाग के अधिकारियों और बाहरी डेयरी एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर एक मजबूत साठगांठ बना रखी थी। पूर्व जनरल मैनेजर (प्रोक्योरमेंट) प्रलय कावेरी मुरली कृष्णा, पूर्व प्रोक्योरमेंट जीएम आरएसएसवीआर सुब्रह्मण्यम और पूर्व चेयरमैन वाईवी सुब्बा रेड्डी के पीए चिन्ना अप्पन्ना पर इस साज़िश में मदद करने का आरोप है।

बाहरी एक्सपर्ट विजया भास्कर रेड्डी ने कथित तौर पर भोले बाबा डेयरी को अच्छी इंस्पेक्शन रिपोर्ट दी, ताकि उनका कॉन्ट्रैक्ट बना रहे। इन अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेजों को स्वीकार किया और जानबूझकर क्वालिटी चेक को दरकिनार कर दिया।

चंद्रबाबू नायडू के आरोपों से शुरू हुआ था सियासी घमासान

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि पिछली जगन मोहन रेड्डी सरकार के दौरान तिरुपति लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने अपने दावों की पुष्टि के लिए एक लैब रिपोर्ट भी जारी की थी।

इस बयान के बाद देश भर में धार्मिक आक्रोश फैल गया था। हालांकि, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित और घिनौना करार दिया था। विवाद के बढ़ते ही मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा, जिसके बाद SIT की फाइनल चार्जशीट दाखिल होने तक का यह सफर शुरू हुआ।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित SIT और 15 महीने की जांच

अक्टूबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक स्वतंत्र जांच का आदेश दिया था। इस टीम में CBI के जेडी वीरेश प्रभु, डीआईजी मुरली रंभा, आंध्र पुलिस के आईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी, डीआईजी गोपीनाथ जट्टी और FSSAI के एक्सपर्ट डॉ. सत्येन पांडा शामिल थे।

फील्ड जांच का जिम्मा तिरुपति के एडिशनल एसपी वेंकट राव की 30 सदस्यीय टीम के पास था। 15 महीनों तक चली इस जांच के दौरान कई दिग्गजों से पूछताछ की गई, जिनमें पूर्व चेयरमैन वाईवी सुब्बा रेड्डी और पूर्व एडिशनल ईओ एवी धर्म रेड्डी शामिल थे। हालांकि, अंतिम रिपोर्ट में इन दोनों को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया गया है।

गिरफ्तारियां और कानूनी कार्यवाही का वर्तमान स्टेटस

इस मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। जांच के दौरान पकड़े गए नौ आरोपियों में से छह फिलहाल जमानत पर बाहर हैं, जबकि तीन मुख्य आरोपी अभी भी जेल की सलाखों के पीछे हैं। जेल में बंद आरोपियों में दिल्ली के केमिकल सप्लायर अजय कुमार सुगंध, चिन्ना अप्पन्ना और पूर्व जीएम सुब्रह्मण्यम शामिल हैं।

SIT की फाइनल चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामला कानूनी ट्रायल की ओर बढ़ गया है। नेल्लोर की एसीबी कोर्ट अब इन आरोपियों के खिलाफ तय किए गए सबूतों और गवाहों के आधार पर सुनवाई करेगी। भक्तों की मांग है कि दोषियों को ऐसी कड़ी सजा मिले जो भविष्य के लिए एक मिसाल बन सके।

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चंद्र ग्रहण के कारण 3 मार्च को 10 घंटे बंद रहेगा मंदिर

इस कानूनी गहमागहमी के बीच, मंदिर प्रशासन ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। आगामी 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण भगवान वेंकटेश्वर का तिरुमाला मंदिर भक्तों के लिए बंद रहेगा। मंदिर सुबह 9 बजे से शाम 7.30 बजे तक, यानी 10 घंटे से अधिक समय के लिए बंद किया जाएगा।

दोपहर 3.20 बजे से शाम 6.47 बजे तक ग्रहण का प्रभाव रहेगा। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर में ‘शुद्धि’ की रस्म निभाई जाएगी और मंदिर को पूरी तरह पवित्र करने के बाद ही रात 8.30 बजे से भक्तों के लिए ऑफलाइन दर्शन फिर से शुरू किए जाएंगे। इस दौरान होने वाले सभी विशेष समारोह रद्द कर दिए गए हैं।

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