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TVK प्रमुख विजय को करूर भगदड़ मामले में CBI का समन, दिल्ली बुलाये गये

TVK प्रमुख विजय को CBI का समन

तमिलनाडु की राजनीति और फिल्म जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने TVK प्रमुख विजय को करूर भगदड़ मामले में पूछताछ के लिए 12 जनवरी को दिल्ली स्थित एजेंसी मुख्यालय में पेश होने का समन जारी किया है। यह मामला 27 सितंबर 2025 को करूर जिले के वेलुस्वामीपुरम में तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) की एक विशाल राजनीतिक रैली के दौरान हुई उस भयावह घटना से जुड़ा है, जिसमें भारी भीड़ और कथित कुप्रबंधन के कारण 41 लोगों की जान चली गई थी और 110 से अधिक लोग घायल हो गए थे। एक वरिष्ठ पत्रकार के नजरिए से देखें तो यह समन ऐसे समय में आया है जब विजय अपनी आखिरी फिल्म ‘जना नायकन’ की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, जिसके बाद वे पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय होने वाले हैं।

करूर भगदड़ की दर्दनाक दास्तां और जांच का घटनाक्रम

27 सितंबर 2025 का दिन तमिलनाडु के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब TVK प्रमुख विजय के भाषण को सुनने के लिए वेलुस्वामीपुरम में समर्थकों का सैलाब उमड़ पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 10,000 लोगों की क्षमता वाली जगह पर करीब 30,000 लोग जमा हो गए थे, जबकि कुछ पुलिस अनुमानों ने यह संख्या 27,000 बताई थी। इस त्रासदी में 41 लोगों की मौत हो गई और कम से कम 60 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। जांच में सामने आया कि रैली स्थल पर सुरक्षा दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया गया था और भोजन व पानी की उचित व्यवस्था नहीं थी। पुलिस ने घटना के लिए विजय के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने में हुई सात घंटे की देरी को भी एक कारक माना था।

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सुप्रीम कोर्ट का दखल और CBI को जांच का हस्तांतरण

शुरुआत में तमिलनाडु सरकार ने इस घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था और CBI जांच का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है। हालांकि, TVK प्रमुख विजय की पार्टी द्वारा स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंप दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस घटना ने “राष्ट्रीय विवेक को झकझोर दिया है”। कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय समिति भी गठित की है जो CBI जांच की निगरानी कर रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष रहे।

TVK पदाधिकारियों से पूछताछ और अब तक की कार्यवाही

CBI ने 26 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर SIT से मामला अपने हाथ में लेने के बाद से जांच तेज कर दी है। एजेंसी अब तक TVK के कई शीर्ष पदाधिकारियों के बयान दर्ज कर चुकी है, जिनमें राज्य महासचिव बुस्सी आनंद, संयुक्त सचिव निर्मल कुमार, अधव अर्जुन और करूर पश्चिम जिला सचिव मथियाझगन शामिल हैं। अब TVK प्रमुख विजय को 12 जनवरी के लिए नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि विजय से पूछताछ के बाद एजेंसी इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने पर अंतिम फैसला ले सकती है। जांच का मुख्य केंद्र कार्यक्रम के लिए दी गई अनुमतियां, भीड़ प्रबंधन के उपाय, पुलिस तैनाती और आपातकालीन प्रतिक्रिया की कमियां हैं।

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करूर मरियम्मन मंदिर त्रासदी और आदि उत्सव का विवाद

करूर भगदड़ के साथ-साथ एक और दुखद घटना चर्चा में रही है, जो जुलाई 2025 में आदि उत्सव के दौरान करूर मरियम्मन मंदिर में हुई थी। वहां भगदड़ के कारण 18 श्रद्धालुओं की जान चली गई थी। CBI इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या TVK के सोशल मीडिया अभियानों के कारण वहां अनधिकृत भीड़ जुटी थी। तमिलनाडु सरकार ने “अनधिकृत राजनीतिक भीड़ जुटाने” को दोषी ठहराया, जबकि TVK ने इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया। CBI ने इस मामले में भी लापरवाही और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत FIR दर्ज की है और 10 जनवरी को विजय से प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा है।

पीड़ितों की मदद और विजय की राजनीतिक प्रतिक्रिया

हादसे के एक महीने बाद, विजय ने महाबलीपुरम के एक रिसॉर्ट में पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की थी। पार्टी ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 20 लाख रुपये (कुल 7.8 करोड़ रुपये) और घायलों को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है। विजय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि उनका दिल टूट गया है और वह “अवर्णनीय दर्द” से गुजर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह नोटिस उन्हें 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक रूप से “परेशान” करने की एक कोशिश है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की थी।

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मद्रास हाई कोर्ट का आदेश और भविष्य के लिए SOP

इस त्रासदी के बाद मद्रास हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए तमिलनाडु सरकार को राजनीतिक रैलियों, सार्वजनिक सभाओं और रोड शो को विनियमित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश एम.एम. श्रीवास्तव और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की बेंच ने सरकार को निर्देश दिया कि वह 5 जनवरी, 2026 तक सभी दलों के विचारों को सुनकर इस SOP को अधिसूचित करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक बैठकों में सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार अनिवार्य है ताकि भविष्य में ऐसी जानलेवा घटनाओं को रोका जा सके।

राजनीतिक घमासान और 2026 का चुनावी समीकरण

विजय की नई पार्टी TVK की बढ़ती लोकप्रियता ने DMK और BJP दोनों को सतर्क कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के चुनावों में विजय एक ‘डार्क हॉर्स’ साबित हो सकते हैं। जहां सत्तारूढ़ DMK इसे राजनीतिक मकसद बता रही है, वहीं विपक्ष इसे प्रशासनिक चूक मान रहा है। TVK का दावा है कि उन्होंने जांच एजेंसी को वीडियो सबूत सौंपे हैं जो पुलिस और प्रशासन की कमियों को उजागर करते हैं। अब सबकी नजरें 12 जनवरी पर टिकी हैं, जब विजय दिल्ली में CBI के सामने पेश होंगे और उनके बयानों से इस मामले में नई दिशा मिल सकती है।

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