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UGC फर्जी यूनिवर्सिटी लिस्ट: दिल्ली में 12 सहित 32 संस्थान ब्लैकलिस्ट

UGC फर्जी यूनिवर्सिटी लिस्ट

UGC फर्जी यूनिवर्सिटी लिस्ट आज देश के लाखों छात्रों के लिए एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आई है, जब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने शनिवार, 21 फरवरी 2026 को आधिकारिक रूप से 32 फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची जारी कर दी। यूजीसी के ताजा नोटिफिकेशन के अनुसार, ये संस्थान बिना किसी कानूनी मान्यता के डिग्री बांट रहे थे, जिसकी अब कोई कानूनी कीमत नहीं रह गई है।

इस सूची में देश की राजधानी दिल्ली ने एक बार फिर अपना दबदबा बनाए रखा है, जहाँ सबसे ज्यादा 12 फर्जी यूनिवर्सिटी पाई गई हैं। यह लगातार तीसरी बार है जब दिल्ली इस शर्मनाक चार्ट में शीर्ष पर है। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि ये संस्थान ‘विश्वविद्यालय’ शब्द का उपयोग करने के हकदार नहीं हैं और इनके द्वारा दी गई कोई भी डिग्री सरकारी नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए मान्य नहीं होगी।

दिल्ली का डिग्री स्कैम: 12 संस्थानों के साथ राजधानी बनी ‘फेक यूनिवर्सिटी’ का हब

इस UGC फर्जी यूनिवर्सिटी लिस्ट के विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली में फर्जी संस्थानों का जाल बहुत गहरा है। दरियागंज से लेकर मालवीय नगर तक फैले ये संस्थान चकाचौंध वाली वेबसाइटों और बड़े विज्ञापनों के जरिए छात्रों को फंसाते हैं। दिल्ली में स्थित इन 12 संस्थानों में ‘कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड’, ‘यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी’ और ‘एड्रेंटिक सेंट्रिक ज्यूरिडिकल यूनिवर्सिटी’ जैसे भारी-भरकम नाम वाले संस्थान शामिल हैं।

विडंबना यह है कि इनमें से कई संस्थान सालों से सक्रिय हैं और बार-बार ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद नाम बदलकर या छोटे बदलावों के साथ अपना धंधा चला रहे हैं। यूजीसी ने दिल्ली सरकार और स्थानीय पुलिस को इन संस्थानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं ताकि भोले-भाले छात्रों का भविष्य बर्बाद न हो।

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कर्नाटक और पश्चिम बंगाल का हाल: शांति के नाम पर चल रही ‘फेक’ दुकानें

केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि UGC फर्जी यूनिवर्सिटी लिस्ट में दक्षिण और पूर्व भारत के राज्यों के भी नाम प्रमुखता से शामिल हैं। कर्नाटक के बेलगाम में स्थित ‘ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी’ को यूजीसी ने पूरी तरह से फर्जी घोषित किया है। यह संस्थान खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बताकर छात्रों से मोटी फीस वसूल रहा था।

इसी तरह, पश्चिम बंगाल में भी दो संस्थानों को इस सूची में जगह मिली है। यूजीसी ने चेतावनी दी है कि इन राज्यों में सक्रिय ये संस्थान यूजीसी एक्ट, 1956 की धारा 22 का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं। बंगाल और कर्नाटक की राज्य सरकारों से इन संस्थानों को तुरंत बंद करने और इनके बैंक खातों को फ्रीज करने की मांग की गई है ताकि नए सत्र में कोई नया छात्र इनका शिकार न बने।

डिग्री या कागज का टुकड़ा? यूजीसी ने छात्रों को दी ‘बायोमेट्रिक’ सावधानी की सलाह

यूजीसी ने इस UGC फर्जी यूनिवर्सिटी लिस्ट को जारी करते समय छात्रों के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी भी दी है। आयोग ने कहा है कि किसी भी यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने से पहले छात्रों को यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उसकी मान्यता चेक करनी चाहिए।

आयोग ने स्पष्ट किया कि जो यूनिवर्सिटी यूजीसी के सेक्शन 2(f) या 12(B) के तहत पंजीकृत नहीं है, उसे डिग्री देने का कोई अधिकार नहीं है। आजकल कई फर्जी संस्थान विदेशों से संबद्धता (Affiliation) का दावा करते हैं, जो कि पूरी तरह से गलत है।

छात्रों को सलाह दी गई है कि वे केवल विज्ञापनों पर भरोसा न करें और संस्थान के कैंपस, संकाय और पिछले रिकॉर्ड की भौतिक जांच जरूर करें। यदि कोई संस्थान कम समय में या बिना परीक्षा के डिग्री देने का वादा करता है, तो समझ लीजिए कि वह फर्जी है।

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उत्तर प्रदेश और ओडिशा का डेटा: छोटे शहरों में भी फैला ‘नकली’ शिक्षा का जहर

उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में भी UGC फर्जी यूनिवर्सिटी लिस्ट के तहत कई संस्थानों को चिन्हित किया गया है। उत्तर प्रदेश में ‘गांधी हिंदी विद्यापीठ’ और ‘भारतीय शिक्षा परिषद’ जैसे नाम सालों से विवादों में रहे हैं। ओडिशा में भी ‘नवभारत शिक्षा परिषद’ जैसे संस्थान बिना किसी अनुमति के अपनी शाखाएं फैला रहे हैं।

यूजीसी की रिपोर्ट बताती है कि ये संस्थान अक्सर ऐसे नाम चुनते हैं जो किसी प्रतिष्ठित सरकारी संस्था या महापुरुष के नाम से मिलते-जुलते हों, ताकि छात्रों को गुमराह किया जा सके।

ग्रामीण इलाकों के छात्र अक्सर इन ‘नामों’ के चक्कर में आकर अपनी मेहनत की कमाई लुटा देते हैं। यूजीसी अब इन संस्थानों के खिलाफ ‘पब्लिक नोटिस’ के साथ-साथ ‘डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट’ स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित कर रहा है।

जेन-जी और मिलेनियल्स के लिए करियर अलर्ट: फेक डिग्री का डिजिटल फुटप्रिंट है खतरनाक

आज के डिजिटल युग में जहाँ बैकग्राउंड वेरिफिकेशन (BGV) एआई टूल्स के जरिए किया जाता है, UGC फर्जी यूनिवर्सिटी लिस्ट से जुड़ी डिग्री रखना करियर के लिए ‘सुसाइड’ जैसा है। कई युवा बेहतर पैकेज के चक्कर में इन फर्जी संस्थानों से बैकडेटेड डिग्रियां ले लेते हैं, लेकिन बड़ी टेक कंपनियां अब यूजीसी के डेटाबेस से सीधे डिग्री की सत्यता जांचती हैं।

यदि आप पकड़े जाते हैं, तो न केवल आपकी नौकरी जाएगी, बल्कि आप ‘ब्लैकलिस्ट’ भी हो सकते हैं और आप पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज हो सकता है। युवाओं को समझना चाहिए कि शॉर्टकट से मिली डिग्री लंबी रेस में काम नहीं आती। सोशल मीडिया पर भी कई ऐसे विज्ञापन चलते हैं जो ‘फास्ट ट्रैक डिग्री’ का दावा करते हैं, जिनसे दूर रहना ही समझदारी है।

कानूनी कार्रवाई और दंड: क्या अब जेल जाएंगे फर्जी यूनिवर्सिटी के मालिक?

यूजीसी ने UGC फर्जी यूनिवर्सिटी लिस्ट जारी करने के साथ ही एक कड़ा कानूनी स्टैंड लिया है। आयोग ने राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि इन संस्थानों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा चलाया जाए।

केवल जुर्माना लगाने से काम नहीं चलेगा, क्योंकि ये संस्थान जुर्माने की रकम से कहीं ज्यादा पैसा छात्रों से वसूल चुके हैं। यूजीसी ने ‘फेक यूनिवर्सिटी प्रिवेंशन बिल’ के लिए भी केंद्र सरकार को सुझाव दिए हैं, जिसमें फर्जी संस्थान चलाने वालों के लिए 10 साल तक की जेल और भारी आर्थिक दंड का प्रावधान है। जब तक संचालकों को जेल नहीं होगी, तब तक यह शिक्षा माफिया फलता-फूलता रहेगा।

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शिक्षा के बाज़ारीकरण के खिलाफ एक निर्णायक जंग

अंततः, UGC फर्जी यूनिवर्सिटी लिस्ट यह याद दिलाती है कि शिक्षा के बाज़ारीकरण ने समाज को किस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। एक सीनियर एडिटर के तौर पर मेरा मानना है कि यह केवल यूजीसी की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज और सरकार की सामूहिक विफलता है कि राजधानी के बीचों-बीच 12 फर्जी संस्थान सालों से चल रहे हैं।

छात्रों को जागरूक होना होगा और सरकारों को अपने निगरानी तंत्र को और अधिक सक्रिय करना होगा। डिग्री केवल एक कागज नहीं है, यह वर्षों की मेहनत और सपनों का प्रतीक है। इसे नकली संस्थानों के हाथों नीलाम न होने दें। आने वाले एडमिशन सत्र में पूरी सावधानी बरतें और केवल मान्यता प्राप्त संस्थानों में ही अपने उज्जवल भविष्य की नींव रखें।

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