नस्लभेदी टिप्पणी पर पलटवार: अमेरिकी इंजीनियर ने भारतीयों का किया बचाव
नस्लभेदी टिप्पणी पर पलटवार आज के वैश्विक दौर में जहाँ अमेरिकी वीज़ा नियमों में सख्ती और H-1B वीज़ा पर बहस तेज हो रही है, भारतीय प्रोफेशनल्स अक्सर ऐसे सार्वजनिक विवादों का हिस्सा बन जाते हैं जिनका उनके काम से कोई सीधा संबंध नहीं होता।
हाल ही में एक वायरल X (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में भारतीय पेशेवरों की काबिलियत पर सवाल उठाए गए, जिसके बाद सिटाडेल में कार्यरत एक अमेरिकी सॉफ्टवेयर इंजीनियर, जॉन फ्रीमैन ने नस्लभेदी टिप्पणी पर पलटवार करते हुए अपने भारतीय साथियों का खुलकर बचाव किया। फ्रीमैन ने भारत विरोधी दावों को पूरी तरह गलत बताते हुए वर्कप्लेस की बेहतरी और भारतीय टैलेंट की महत्ता पर ज़ोर दिया।
सिटाडेल इंजीनियर जॉन फ्रीमैन ने वर्कप्लेस के अनुभवों से साझा की सच्चाई
न्यूयॉर्क में सिटाडेल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर जॉन फ्रीमैन ने X पर वायरल हो रही एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए अपने भारतीय साथियों, टीम लीड और बॉस का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया। उन्होंने बताया कि उनकी टीम में कई साथी भारतीय हैं और उन्होंने उन्हें “काफी तेज़” और “सुपर फ्रेंडली” पाया है।
फ्रीमैन ने जिस पोस्ट का जवाब दिया, उसमें दावा किया गया था कि भारतीय प्रोफेशनल्स आदतन नाकाबिल होते हैं और काम में रुकावट पैदा करते हैं। फ्रीमैन ने इन स्टीरियोटाइप्स को तोड़ते हुए वास्तविक कार्य अनुभव साझा किए।
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“मेरे बॉस और CTO भारतीय हैं”: फ्रीमैन ने गिनाई टीम की खूबियां
भारतीय काबिलियत पर बात करते हुए फ्रीमैन ने लिखा, “आइए इंडियन काबिलियत के बारे में बात करते हैं। मेरा टीम लीड इंडियन है। मेरा बॉस इंडियन है। उसका बॉस, जिसने हम दोनों को हायर किया, इंडियन है। उसका बॉस, जो कंपनी के CTO हैं, वह भी इंडियन हैं। वे सभी काफी तेज हैं।
” फ्रीमैन ने इस दौरान नस्लभेदी टिप्पणी पर पलटवार करते हुए स्पष्ट किया कि उनके वरिष्ठ अधिकारी बिजनेस की बारीकियों को अंदर और बाहर से बखूबी जानते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे दूसरों के साथ बहुत अच्छा तालमेल बिठाते हैं और उनकी अंग्रेजी भाषा पर पकड़ भी बेहतरीन है।
‘P1 अर्जेंट प्रायोरिटी’ के स्टीरियोटाइप पर टेकी का करारा तंज
वायरल पोस्ट में भारतीयों पर आरोप लगाया गया था कि वे हर छोटे-बड़े काम को “P1 सुपर-अर्जेंट” बताते हैं और तथ्यों के बजाय चिल्लाने, धमकी देने या दबाव बनाने का सहारा लेते हैं। फ्रीमैन ने इस दावे की धज्जियां उड़ाते हुए कहा, “मैं यहाँ एक साल से हूँ और मुझे कभी भी किसी भी नस्ल का ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जो ‘सब कुछ P1 अर्जेंट’ कहता हो।
मेरी पिछली कंपनी में भी मेरे बॉस इंडियन थे और वह काफी अच्छे थे।” उन्होंने तीखा तंज कसते हुए लिखा कि अगर आपकी कंपनी में हर कोई नाकाबिल है, तो शायद आपकी कंपनी सिर्फ नाकाबिल लोगों को ही हायर करती है।
CISA प्रमुख मधु गोट्टुमुक्कला और हालिया साइबर सुरक्षा घटना का संदर्भ
इस विवाद की शुरुआत एक साइबर सिक्योरिटी घटना से जुड़े ऑनलाइन गुस्से के बाद हुई थी, जिसमें अमेरिकी साइबर सुरक्षा एजेंसी (CISA) की भारतीय मूल की हेड मधु गोट्टुमुक्कला का नाम घसीटा गया।
पोलिटिको की एक रिपोर्ट के अनुसार, गोट्टुमुक्कला पर ChatGPT पर एक संवेदनशील डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद DHS जांच शुरू हुई थी, हालांकि उन्हें AI चैटबॉट इस्तेमाल करने की अनुमति पहले ही मिल गई थी।
इसी घटना को आधार बनाकर सोशल मीडिया पर भारतीयों के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की गई, जिस पर फ्रीमैन ने नस्लभेदी टिप्पणी पर पलटवार किया।
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कौन हैं मधु गोट्टुमुक्कला? 24 वर्षों का शानदार करियर रिकॉर्ड
मधु गोट्टुमुक्कला वर्तमान में CISA के एक्टिंग डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। यह एजेंसी अमेरिका के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। इससे पहले, वे दक्षिण डकोटा के CIO और ब्यूरो ऑफ इंफॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी के कमिश्नर रह चुके हैं।
भारत में जन्मी गोट्टुमुक्कला ने आंध्र यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की और बाद में अमेरिका जाकर डकोटा स्टेट यूनिवर्सिटी से PhD, यूनिवर्सिटी ऑफ डलास से MBA और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास से मास्टर डिग्री हासिल की। उनका लंबा अनुभव उनकी काबिलियत का प्रमाण है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: ‘जब स्टीरियोटाइप टूटते हैं तो असलियत दिखती है’
फ्रीमैन की इस पोस्ट ने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी है। इसे 4 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा और हजारों लोगों ने सराहा। एक यूजर ने कमेंट किया, “जब आप स्टीरियोटाइप बनाना बंद कर देते हैं तो असलियत ऐसी ही दिखती है।” वहीं अन्य यूजर्स ने भारतीय लीडर्स की मल्टीटास्किंग और मल्टीडायमेंशनल सोच को सांस्कृतिक ताकत बताया।
कुछ लोगों ने यह भी तर्क दिया कि भारतीय लीडर्स डिमांडिंग हो सकते हैं, लेकिन टॉप लेवल पर उनकी नाकाबिलियत की बात करना असंभव है। यहाँ भी फ्रीमैन द्वारा नस्लभेदी टिप्पणी पर पलटवार को एक सटीक और साक्ष्यों पर आधारित जवाब माना गया।
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इमिग्रेशन नीतियों और बढ़ते भेदभाव के बीच एक सकारात्मक पहल
यह पूरी घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पॉलिसी फ्रेमवर्क और नए H-1B आवेदनों के लिए प्रस्तावित $100,000 की फीस जैसे कड़े नियमों ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है।
सिटाडेल के पूर्व CTO उमेश सुब्रमण्यम के हालिया इस्तीफे और भारतीयों के खिलाफ बढ़ते हेट स्पीच के बीच, जॉन फ्रीमैन जैसे अमेरिकी प्रोफेशनल्स का आगे आकर सच बोलना टेक इंडस्ट्री में विविधता और समावेशन (Inclusion) की अहमियत को रेखांकित करता है। उन्होंने यह साबित किया कि काबिलियत किसी देश या नस्ल की मोहताज नहीं होती।
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