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केरल की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 24 लाख नाम हटाए गए SIR के बाद बड़ा फैसला

केरल में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चुनाव आयोग ने राज्य की मतदाता सूची में भारी बदलाव किए हैं। मंगलवार को जारी की गई केरल स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ड्राफ्ट सूची से कुल 24 लाख नाम हटाए गए हैं। एक महीने तक चले इस गहन अभ्यास के बाद, केरल में अब कुल मतदाताओं की संख्या 2.54 करोड़ रह गई है। अधिकारियों ने इस भारी कटौती के पीछे मौतों, पलायन और लापता मतदाताओं को मुख्य कारण बताया है। यह अभ्यास 2002 के बाद पहली बार केरल में इतने विस्तृत स्तर पर किया गया है। 28 अक्टूबर को शुरू हुआ यह SIR अभ्यास अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और अंतिम मतदाता सूची 19 फरवरी, 2026 (कुछ रिपोर्टों में 21 फरवरी) को प्रकाशित की जाएगी।

SIR अभ्यास के चौंकाने वाले आंकड़े और कारण

केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) रतन यू. खेलकार ने आंकड़ों का खुलासा करते हुए बताया कि ड्राफ्ट लिस्ट में अब 2,54,42,352 मतदाता हैं, जबकि पहले यह संख्या 2,78,50,855 थी। खेलकार ने स्पष्ट किया कि कुल 24,08,503 वोटरों को हटाया गया या फ्लैग किया गया है। इनमें से लगभग 6,49,885 वोटर्स की मौत हो चुकी है, जिसे आयोग ने ‘मृत’ श्रेणी में रखा है। इसके अलावा, SIR प्रक्रिया के दौरान 6,45,548 वोटर्स का पता ही नहीं चल पाया, जिन्हें ‘लापता’ या ‘ट्रेस न हो पाने वाले’ माना गया है। वहीं, कुल 8,21,622 वोटर्स ऐसे हैं जो स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए हैं। इसके अलावा 1.36 लाख डुप्लीकेट एंट्री और 1.60 लाख अन्य अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत एंट्री को भी हटा दिया गया है। आयोग का कहना है कि यह कदम एक साफ-सुथरी और सटीक मतदाता सूची सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

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राजनीतिक दलों की चिंता और आपत्तियों का मौका

इस भारी फेरबदल ने राज्य की राजनीतिक पार्टियों को चिंता में डाल दिया है। कांग्रेस और सीपीएम (CPM) ने हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों से पहले SIR को लागू करने का ज़ोरदार विरोध किया था। हालांकि, चुनाव आयोग ने नागरिकों को राहत देते हुए कहा है कि ड्राफ्ट लिस्ट के बारे में शिकायतें, दावे और आपत्तियां 22 जनवरी, 2026 तक स्वीकार की जाएंगी। जो लोग ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर रह गए हैं, वे फॉर्म-6 (विदेश में रहने वाले वोटर के मामलें में फॉर्म 6 A) का इस्तेमाल करके ऑनलाइन अपना नाम फिर से रजिस्टर करवा सकते हैं। इसके लिए आवेदन के साथ दिया जाने वाला घोषणा पत्र SIR जनगणना फॉर्म जैसा ही होगा। मतदाता यह जानने के लिए केरल के मुख्य निर्वाचन कार्यालय की वेबसाइट, www.ceo.kerala.gov.in/voters पर लॉग इन कर सकते हैं।

शिकायत निवारण और अधिकारियों की तैनाती

मतदाताओं की समस्याओं को सुलझाने के लिए चुनाव आयोग ने व्यापक इंतजाम किए हैं। शिकायतों को दूर करने के लिए लगभग 1,000 अधिकारियों को विशेष रूप से तैनात किया गया है। यह पता लगाने के प्रयास जारी हैं कि कुछ बूथों से इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कैसे हटा दिए गए हैं। आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि अगर कोई वोटर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो वह 15 दिनों के भीतर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के पास अपील कर सकता है। यदि वहां भी समस्या का समाधान नहीं होता, तो 30 दिनों के अंदर चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के पास अपील करने का विकल्प खुला है।

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बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की भूमिका और तकनीक का इस्तेमाल

इस विशाल प्रक्रिया को अंजाम देने में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की भूमिका अहम रही। BLOs ने 27 अक्टूबर तक रोल में शामिल सभी वोटर्स के घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म बांटे और कम से कम तीन बार दौरे किए। चुनाव आयोग की विशेष पहलों में BLOs को स्थानीय आंगनवाड़ी टीचर, एनसीसी/एनएसएस स्वयंसेवकों और छात्रों का सहयोग मिला। केरल के मुख्य चुनाव अधिकारी ने ‘SIR जॉयथॉन’ और ‘नाइट आउट’ जैसी पहल भी शुरू कीं, ताकि अधिकारियों का मनोबल बना रहे और काम समय पर पूरा हो सके। जिन इलाकों में नेटवर्क की समस्या थी, वहां ‘कम्युनिटी मॉडल’ अपनाया गया, जहां BLOs ने एक साथ बैठकर फॉर्म डिजिटाइज़ किए। इसी मेहनत का नतीजा है कि 24 लाख नाम हटाए जाने के बावजूद प्रक्रिया पारदर्शी बनी रही।

मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में भी बड़ा बदलाव

सिर्फ केरल ही नहीं, चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश की मतदाता सूची में भी बड़े बदलाव किए हैं। मध्य प्रदेश में लगभग 42.7 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। वहां कुल मतदाताओं की संख्या अब 5.31 करोड़ रह गई है। मध्य प्रदेश में हटाए गए नामों में 8.46 लाख से ज़्यादा मृत व्यक्ति और 8.42 लाख से ज़्यादा लापता मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी SIR के तहत बड़ा बदलाव देखा गया है, जहां 16.72 प्रतिशत मतदाता अनुपस्थित या स्थानांतरित पाए गए। तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्यों में भी इसी तरह की प्रक्रिया चल रही है, जहां वोटरों से लगभग 85 प्रतिशत गिनती फॉर्म इकट्ठा किए गए हैं।

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अनमैप्ड वोटर्स के लिए विशेष सुनवाई और नोटिस

केरल में लगभग 19.32 लाख ‘अनमैप्ड वोटर्स’ की पहचान की गई है, जिनके नाम 2002 की SIR लिस्ट के डेटा से मेल नहीं खा रहे हैं। केलकर ने बताया कि बूथ लेवल अधिकारी ऐसे वोटरों को उनके घर पर नोटिस पहुंचाएंगे। इन नोटिसों पर सुनवाई 14 फरवरी तक होगी। आयोग ने लगभग 8.65 लाख ऐसे मतदाताओं की भी पहचान की है जिनकी जानकारी 2003 के रिकॉर्ड में नहीं है, और इन लोगों को भी दस्तावेज़ दिखाने के लिए नोटिस भेजा जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि 24 लाख नाम हटाए जाने के बाद भी कोई पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहे।

अंतिम सूची और भविष्य की समयसीमा

केरल के लिए अंतिम मतदाता सूची 19 या 21 फरवरी, 2026 को प्रकाशित की जाएगी। इससे पहले, चुनाव आयोग ने गिनती फॉर्म के डिजिटाइज़ेशन को पूरा करने के लिए डेडलाइन कई बार बढ़ाई थी। पहले यह 4 दिसंबर थी, फिर इसे राज्य सरकार और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दो बार बढ़ाया गया। अब जब ड्राफ्ट लिस्ट जारी हो चुकी है, तो राजनीतिक दलों और आम जनता के पास अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का समय है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 2026 के विधानसभा चुनावों के नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख तक लोग अपना नाम जुड़वा सकते हैं। इस पूरी कवायद का उद्देश्य एक दोषरहित मतदाता सूची तैयार करना है, भले ही इसके लिए 24 लाख नाम हटाए जाने जैसा कड़ा फैसला लेना पड़ा हो।

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