“हाफिज़ सईद ट्रायल 26/11” भारत में चलेगा ‘इन एब्सेंशिया’ ट्रायल,
हाफिज़ सईद ट्रायल 26/11 वर्ष 2008 के भयानक 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता और लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज़ मोहम्मद सईद समेत छह फरार पाकिस्तानी आरोपियों पर भारत में उनकी गैर-मौजूदगी (‘इन एब्सेंशिया’) में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
मुंबई पुलिस ने इस संबंध में विशेष सरकारी वकील (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) उज्ज्वल निकम को एक औपचारिक पत्र भेजकर ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (BNSS) की धारा 356 के तहत अदालती कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया है।
किन-किन आतंकियों के खिलाफ जारी हुई उद्घोषणा?
अदालत ने मुंबई हमले में शामिल जिन छह मुख्य फरार आरोपियों के खिलाफ उद्घोषणा (proclamation) जारी की है, उनके नाम निम्नलिखित हैं:
हाफिज़ मोहम्मद सईद (लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख व मास्टरमाइंड)
ज़की-उर-रहमान लखवी (लश्कर का शीर्ष कमांडर)
साजिद मीर (26/11 हमले का मुख्य हैंडलर)
अबू अलकामा
आसिम उर्फ अबू कहफा
मेजर अब्दुर रहमान पाशा
विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने बताया कि ट्रायल कोर्ट ने इन सभी छह भगोड़ों के खिलाफ उद्घोषणा जारी कर दी है। जैसे ही इसकी आधिकारिक रिपोर्ट अदालत में दाखिल होगी, उनके खिलाफ उनकी अनुपस्थिति में औपचारिक विचारण (Trial) शुरू हो जाएगा।
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क्या है ‘इन एब्सेंशिया’ ट्रायल और इसका प्रभाव?
भारतीय कानून (BNSS) की धारा 356 के तहत यदि कोई गंभीर अपराध का आरोपी जानबूझकर अदालत के समक्ष पेश होने से बचता है या विदेश में छिपा रहता है, तो उसकी अनुपस्थिति में भी मुकदमा चलाया जा सकता है।
तत्काल सजा का प्रावधान: यदि इस विशेष सुनवाई के अंत में अदालत इन आरोपियों को दोषी मानती है, तो भविष्य में उनके भारत प्रत्यर्पित होते ही या पकड़े जाते ही उन्हें सीधे सजा सुनाई जाएगी और जेल भेजा जाएगा।
अंतर्राष्ट्रीय दबाव: इस कानूनी कदम से पाकिस्तान पर आतंकियों के खिलाफ ठोस कदम उठाने और उन्हें भारत को सौंपने का कूटनीतिक दबाव और बढ़ेगा।
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अन्य मामलों में भी कसता शिकंजा
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की सप्लीमेंट्री चार्जशीट के आधार पर जम्मू की एक अदालत ने पहलगाम आतंकी हमले के मामले में भी हाफिज़ सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।
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26 नवंबर 2008 को समुद्र के रास्ते आए 10 पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई में 166 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी। भारत सरकार और जांच एजेंसियों का यह कदम उन शहीदों और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम माना जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय दबाव और कानूनी शिकंजे के बीच फिर चर्चा में आया हाफिज़ सईद ट्रायल 26/11 मामला
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