संविधान अनुच्छेद 67(ए) और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा
21 जुलाई 2025, संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ ही था कि एक अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया — भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत दिया गया, जिसमें उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति को संबोधित पत्र द्वारा त्यागपत्र देने का अधिकार प्राप्त है।
धनखड़ ने अपने त्यागपत्र में लिखा:
“स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के अनुसार तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूँ।”
इस एक पंक्ति ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी और एक बार फिर उपराष्ट्रपति अनुच्छेद 67(ए) राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में आ गया।
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 67(ए) के तहत उपराष्ट्रपति त्यागपत्र दे सकते हैं।
- इस्तीफा राष्ट्रपति को हस्ताक्षरित पत्र के रूप में देना होता है।
- धनखड़ का कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन उन्होंने 2025 में इस्तीफा दिया।
- इस्तीफे का कारण “स्वास्थ्य और चिकित्सीय सलाह” बताया गया।
- संसद सत्र के पहले दिन इस्तीफा आया, जिससे समय पर चर्चा टली।
- विपक्षी नेताओं ने राजनीतिक मतभेद के बावजूद उनका सम्मान किया।
- यह इस्तीफा भारतीय संवैधानिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
संविधान क्या कहता है? जानिए अनुच्छेद 67(ए) की मूल भावना
अनुच्छेद 67(ए) भारतीय संविधान का वह प्रावधान है जो उपराष्ट्रपति को अपना पद छोड़ने की वैधानिक प्रक्रिया देता है। इसमें साफ कहा गया है:
“The Vice-President may resign his office by writing under his hand addressed to the President.”
इसका अर्थ है कि उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति को लिखित और हस्ताक्षरित पत्र देकर अपने पद से त्यागपत्र दे सकते हैं। इसमें न तो राष्ट्रपति की अनुमति आवश्यक होती है, और न ही संसद की।
यह अनुच्छेद यह सुनिश्चित करता है कि उपराष्ट्रपति अपनी इच्छा से, बिना किसी बाध्यता के, गरिमापूर्वक पद छोड़ सकते हैं।
धनखड़ का कार्यकाल और भूमिका: एक समीक्षा
- 6 अगस्त 2022 को जगदीप धनखड़ ने भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।
- उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराकर 528 वोटों से जीत हासिल की थी।
- उनके कार्यकाल के दौरान कई बार संसद में विपक्ष से तीखी बहसें हुईं, लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी भूमिका को संविधान के दायरे में निभाया।
- वे राज्यसभा के सभापति के रूप में सक्रिय रहे और कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में नेतृत्व किया।
धनखड़ का इस्तीफा: सिर्फ स्वास्थ्य कारण या कुछ और भी?
यद्यपि इस्तीफे का औपचारिक कारण “स्वास्थ्य कारण और चिकित्सीय सलाह” बताया गया है, लेकिन यह फैसला ऐसे समय में आया जब विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच कई संवैधानिक और कार्यप्रणाली से जुड़े मतभेद खुलकर सामने आ रहे थे।
पिछले वर्ष दिसंबर 2024 में राज्यसभा में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया था, हालांकि इसे उपसभापति ने खारिज कर दिया था।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह इस्तीफा सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य का मामला नहीं बल्कि एक संवेदनशील राजनीतिक संतुलन का परिणाम भी हो सकता है।
भारत में उपराष्ट्रपति इस्तीफों का इतिहास
| उपराष्ट्रपति | वर्ष | कारण | अनुच्छेद |
|---|---|---|---|
| वी.वी. गिरी | 1969 | राष्ट्रपति चुनाव लड़ना | 67(ए) |
| जगदीप धनखड़ | 2025 | स्वास्थ्य कारण | 67(ए) |
वी.वी. गिरी पहले उपराष्ट्रपति थे जिन्होंने इसी अनुच्छेद का प्रयोग कर इस्तीफा दिया था।
कपिल सिब्बल की प्रतिक्रिया: राजनीति से परे सम्मान
वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने एक भावुक बयान में कहा:
“राजनीतिक मतभेद होते रहते हैं, लेकिन व्यक्तिगत संबंध कभी नहीं टूटते। धनखड़ जी से मेरा 30 वर्षों का सम्मानपूर्ण रिश्ता रहा है।”
“जब भी सदन में बोलने के लिए समय माँगा, उन्होंने कभी मना नहीं किया।”
इस तरह की प्रतिक्रियाएं यह दर्शाती हैं कि धनखड़ ने संवैधानिक पद की गरिमा बनाए रखी।
इस्तीफे के बाद की प्रक्रिया: कौन करेगा कार्यभार संभालना?
संविधान में उपराष्ट्रपति की आकस्मिक रिक्ति की स्थिति में, स्पष्ट उत्तर नहीं है। ऐसे मामलों में प्रायः:
- राज्यसभा का उपसभापति अस्थायी रूप से सभापति की भूमिका निभाते हैं।
- राष्ट्रपति, यदि आवश्यक हो, तो किसी अन्य वरिष्ठ सदस्य को कार्यभार सौंप सकते हैं।
संवैधानिक मर्यादा और व्यक्तिगत निर्णय का संगम
धनखड़ का इस्तीफा केवल एक व्यक्तिगत स्वास्थ्य निर्णय नहीं, बल्कि एक संविधान सम्मत और गरिमापूर्ण विदाई है।
उपराष्ट्रपति अनुच्छेद 67(ए) के तहत किया गया यह इस्तीफा भारतीय राजनीति में एक बार फिर यह संदेश देता है कि जब संवैधानिक संस्थाएं और व्यक्ति मर्यादा का पालन करते हैं, तो लोकतंत्र और मज़बूत होता है।



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