बिहार मतदाता सूची विवाद: विशेष गहन पुनरीक्षण पर विपक्ष का हंगामा!
पटना बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को “बिहार मतदाता सूची विवाद” को लेकर ज़बरदस्त राजनीतिक टकराव देखने को मिला। विपक्षी विधायकों ने काले कपड़े पहनकर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में सदन की कार्यवाही बाधित कर दी। उनका आरोप था कि एसआईआर के बहाने राज्य सरकार “वोटर चोरी” कर रही है और करोड़ों गरीब मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।
विपक्ष का दो दिन से हंगामा
- 21 और 22 जुलाई, दोनों दिन विधानसभा में हंगामा
- काले कपड़ों और तख्तियों के साथ विपक्षी विधायक पहुंचे
- अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने कार्यवाही दोपहर तक स्थगित की
राजद, कांग्रेस, वामपंथी दलों और AIMIM के विधायक विधानसभा गेट पर प्रदर्शन करते देखे गए। वे लगातार “एसआईआर छोड़ो”, “वोट चोरी बंद करो” जैसे नारे लगा रहे थे। विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में भी यह विरोध जारी रहा।
तेजस्वी यादव और विपक्षी दलों की आक्रामकता
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने अध्यक्ष से मुलाकात कर इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की। राजद नेता आलोक मेहता ने भी आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया खास समुदायों को निशाना बनाकर चलाई जा रही है।
कांग्रेस विधायक राजेश कुमार ने कहा:
“एसआईआर के ज़रिए लाखों गरीबों और वंचित समुदाय के लोगों के मताधिकार छीने जा रहे हैं।”
AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान ने इसे लोकतंत्र के ताबूत में कील बताया और कहा कि आने वाले चुनावों में इसका असर नीतीश सरकार पर दिखेगा।
लोकसभा में भी विपक्ष ने किया विरोध
बिहार मतदाता सूची विवाद को लेकर मंगलवार को संसद का निचला सदन भी प्रभावित रहा। कांग्रेस, राजद, सपा, टीएमसी और वामपंथी सांसदों ने ‘SIR = लोकतंत्र की मृत्यु’ और ‘मोदी सर, नहीं सर’ जैसी तख्तियों के साथ सदन में प्रदर्शन किया।
18 मिनट में ही ठप हुई कार्यवाही
- प्रश्नकाल के दौरान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चर्चा की अपील की
- अध्यक्ष ओम बिरला ने तख्तियाँ दिखाने को परंपराओं के खिलाफ बताया
- विपक्ष की मांग: एसआईआर पर तत्काल चर्चा
संसद के बाहर मकर द्वार पर इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने तख्तियाँ लेकर विरोध प्रदर्शन किया। दोपहर बाद कार्यवाही फिर शुरू हुई, लेकिन चर्चा का वादा मिलने के बावजूद विपक्ष वेल में आ गया।
सरकार की प्रतिक्रिया
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा:
“आप चर्चा चाहते हैं, हम तैयार हैं। लेकिन तख्तियाँ लेकर व्यवधान ठीक नहीं है। यह जनता का समय और पैसा बर्बाद करना है।”
उपसभापति हरिवंश की अध्यक्षता में राज्यसभा की कार्यवाही भी कई बार स्थगित हुई।
चुनाव आयोग के आँकड़े: 52 लाख मतदाता सूची से बाहर
चुनाव आयोग ने मंगलवार को प्रेस रिलीज़ जारी कर बताया कि 24 जून 2025 तक बिहार के 7.89 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से 52.30 लाख (6.62%) मतदाता अपने पते पर नहीं पाए गए।
इनमें शामिल हैं:
| श्रेणी | संख्या | प्रतिशत |
|---|---|---|
| मृतक मतदाता | 18.66 लाख | 2.36% |
| अन्य निर्वाचन क्षेत्र गए | 26.01 लाख | 3.29% |
| एक से अधिक पंजीकरण | 7.5 लाख | 0.95% |
| पता नहीं चला | 11,484 | 0.01% |
इसके अलावा, अब तक 7.16 करोड़ गणना प्रपत्र जमा किए जा चुके हैं जिनमें से 97.3% डिजिटल हैं।
आयोग ने सफाई दी, विपक्ष को बैठक में बुलाया
चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर 52 लाख छूटे हुए मतदाताओं की सूची साझा की है और कहा है कि मसौदा मतदाता सूची 1 अगस्त को जारी की जाएगी। इसके बाद 1 सितंबर तक दावा-आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।
चुनाव आयोग के अनुसार:
- सभी 12 प्रमुख दलों के ज़िला अध्यक्षों ने बूथ एजेंट नियुक्त किए हैं
- 1 लाख बीएलओ, 4 लाख स्वयंसेवक, 1.5 लाख बीएलए जुटे हैं
- 97.3% मतदाताओं को कवर कर लिया गया है
विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तनाव तेज़
बिहार में अक्टूबर-नवंबर में संभावित विधानसभा चुनाव से पहले, “बिहार मतदाता सूची विवाद” ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। विपक्ष इसे सरकार की साजिश बता रहा है, जबकि चुनाव आयोग ने प्रक्रिया की पारदर्शिता पर ज़ोर दिया है। आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा और गरमाने वाला है, क्योंकि मसौदा सूची के बाद दावा-आपत्ति और अंतिम सूची का दौर अब शुरू होने वाला है।



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