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गोवा-कर्नाटक नदी विवाद महादयी परियोजना पर बढ़ा तनाव

महादयी परियोजना

गोवा-कर्नाटक नदी विवाद एक बार फिर गहरा गया है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के महादयी नदी परियोजना पर दिए बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। शिवकुमार ने सावंत पर “मानसिक संतुलन खो देने” का आरोप लगाते हुए कहा है कि कर्नाटक इस परियोजना पर आगे बढ़ेगा, क्योंकि यह उनके आत्मसम्मान का प्रश्न है। उन्होंने गोवा के मुख्यमंत्री को अंतर-राज्यीय संबंधों के महत्व की भी याद दिलाई। शिवकुमार ने इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से मिलने की बात कही।

  • शिवकुमार ने कहा कि महादयी जल आवंटन का निर्णय पहले ही हो चुका है।
  • उन्होंने पुष्टि की कि परियोजना के लिए निविदाएं जारी हो चुकी हैं।
  • कर्नाटक सरकार काम शुरू करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी।

गोवा के मुख्यमंत्री के बयान पर पलटवार

मंगलवार को गोवा विधानसभा में प्रमोद सावंत ने दावा किया था कि केंद्र महादयी परियोजना को मंजूरी नहीं देगा। उन्होंने यह भी कहा था कि गोवा सरकार कर्नाटक द्वारा की जा रही गतिविधियों के लिए सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करेगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने गोवा के मुख्यमंत्री के बयान को “निंदनीय” बताया और कहा कि वे कर्नाटक को रोक नहीं सकते।

  • शिवकुमार ने कहा कि सावंत संघीय ढांचे की जानकारी नहीं रखते हैं।
  • वन मंजूरी के लिए नोटिस मिला है, लेकिन काम रोकने को नहीं कहा गया।
  • उनका यह बयान हमें काम करने से नहीं रोक सकता।

शिवकुमार ने कहा, “मैं काम शुरू करूंगा। उन्हें इसे रोकने की कोशिश करने दीजिए – मुझे देखने दीजिए।”

सांसदों से एकजुट होकर लड़ने का आह्वान

उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने इस मुद्दे पर कर्नाटक के सभी सांसदों से मिलने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह हमारे आत्मसम्मान का सवाल है। उन्होंने सांसदों की चुप्पी को एक बड़ी भूल बताया।

  • कर्नाटक के 28 लोकसभा और 12 राज्यसभा सदस्यों को एकजुट होना चाहिए।
  • हमें राज्य के हितों को बेचना नहीं चाहिए।
  • केंद्रीय मंत्रियों और प्रधानमंत्री पर दबाव बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और प्रधानमंत्री से समय मांगने की बात कही। शिवकुमार ने सभी सांसदों को साथ लेकर उनसे मिलने का प्रयास करने का संकल्प लिया।

केंद्र पर आरोप और गोवा सरकार पर राजनीति का इल्जाम

शिवकुमार ने कहा कि केंद्रीय मंत्री संतुलित हैं और “राजनीति में शामिल नहीं होते”। उन्होंने गोवा सरकार पर “मुद्दे का राजनीतिकरण” करने का आरोप लगाया। शिवकुमार ने दावा किया कि वे केंद्रीय मंत्रियों से पांच-छह बार मिल चुके हैं और वे सभी विकास कार्य चाहते हैं।

  • केंद्रीय वन और जल संसाधन मंत्री समस्या को समझते हैं।
  • वे राजनीति नहीं कर रहे हैं, गोवा सरकार ही राजनीति कर रही है।
  • कर्नाटक महादयी परियोजना पर काम शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी सावंत की टिप्पणी की आलोचना की और इसे कर्नाटक के लोगों का “अपमान” बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र ने इस परियोजना के बारे में आधिकारिक तौर पर चिंता क्यों नहीं जताई।

महादयी नदी विवाद: परियोजना का महत्व और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गोवा, महादयी नदी बेसिन में कर्नाटक की कलासा-बंडूरी परियोजनाओं का विरोध करता रहा है। कर्नाटक सरकार की कलासा-बंडूरी परियोजना का उद्देश्य धारवाड़, बेलगावी, बागलकोट और गडग जिलों के कुछ हिस्सों में पेयजल आपूर्ति बढ़ाना है। इसमें महादयी नदी के पानी को मलप्रभा नदी में मोड़ने का प्रस्ताव है। महादयी नदी अरब सागर में मिलने से पहले कर्नाटक और गोवा से होकर बहती है। गोवा में इसे मंडोवी के नाम से जाना जाता है और यह राज्य की दो प्रमुख नदियों में से एक है।

  • महादयी जल विवाद न्यायाधिकरण ने 2018 में फैसला सुनाया था।
  • कर्नाटक को 13.42 टीएमसीएफटी पानी आवंटित किया गया था।
  • केंद्र सरकार ने 2020 में इस फैसले को अधिसूचित किया था।

यह परियोजना उत्तर कर्नाटक क्षेत्र के प्रमुख जिलों में जल संकट को समाप्त करेगी।

सर्वोच्च न्यायालय से याचिका वापस लेने का फैसला

शिवकुमार ने घोषणा की कि कर्नाटक सरकार सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका वापस ले लेगी। उन्होंने कहा कि वे परियोजना का काम तुरंत शुरू कर देंगे।

  • उन्होंने कहा कि गोवा के मुख्यमंत्री को उन्हें रोकने की कोशिश करने दीजिए।
  • भाजपा के कार्यकाल में भी परियोजना की प्रगति का जश्न मनाया गया था।
  • सभी दलों के सांसदों की बैठक बुलाई जाएगी।

यह गोवा-कर्नाटक नदी विवाद अब राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर तेज होता दिख रहा है।

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