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अवैध प्रवासियों पर अलर्ट असम सरकार बेदखली अभियान से बढ़ी क्षेत्रीय चिंता!

अवैध प्रवासियों पर अलर्ट

असम सरकार के अतिक्रमण विरोधी अभियान के बीच अवैध प्रवासियों पर अलर्ट जारी करते हुए नागालैंड, मणिपुर और मेघालय ने सीमाओं पर निगरानी तेज कर दी है।

उरियमघाट में पलायन, नागालैंड की सख्ती

गोलाघाट जिले के उरियमघाट में वन भूमि से बेदखली की तैयारी के बीच सैकड़ों लोग पहले ही पलायन कर चुके हैं। कहा जा रहा है कि ये लोग बिना दस्तावेज़ वाले प्रवासी हैं, जिन्होंने वन भूमि पर अतिक्रमण कर पान की खेती शुरू की थी।

  • नागालैंड के दीमापुर, निउलैंड, चुमौकेदिमा और मोकोकचुंग जैसे सीमावर्ती जिलों में विशेष चौकसी।
  • पुलिस ने 200 से अधिक वाहनों को राज्य की सीमा से लौटा दिया।
  • दीमापुर के पुलिस आयुक्त केविथुतो सोफी के अनुसार, सभी संवेदनशील प्रवेश बिंदुओं पर मोबाइल चेक-पोस्ट लगाए गए हैं।

मुख्य बिंदु :

  1. असम के उरियमघाट में बेदखली अभियान से पहले सैकड़ों लोग सीमावर्ती इलाकों से पलायन कर गए।
  2. नागालैंड ने सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाई, 200 से अधिक संदिग्ध वाहन राज्य सीमा से लौटाए।
  3. मेघालय सरकार ने घुसपैठ रोकने के लिए NGO और पारंपरिक प्रमुखों के साथ समन्वय का निर्देश दिया।
  4. मणिपुर ने सीमा पर सतर्कता बढ़ाई, बायोमेट्रिक डेटा लेकर अवैध प्रवासियों को निर्वासित करने का निर्देश।
  5. मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, अभियान असम के अस्तित्व की रक्षा है, रुकने का कोई इरादा नहीं।
  6. भाजपा ने बेदखली को शहीदों की विरासत से जोड़ा, राजनीतिक दबाव में न झुकने की बात दोहराई।
  7. जून से अब तक 50,000 से ज्यादा लोग बेदखल, गोलपाड़ा में गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हुई।

मेघालय में सीमा निगरानी पर मुख्यमंत्री की बैठक

मेघालय सरकार ने भी असम की बेदखली नीति से उत्पन्न संभावित घुसपैठ को लेकर अलर्ट जारी किया है।

  • मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने NGO और परंपरागत प्रमुखों को सतर्क रहने का आग्रह किया।
  • उपायुक्तों को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर सुरक्षा तैनाती बढ़ाने के निर्देश।
  • मुख्य सचिव डीपी वाहलांग और डीजीपी नोंगरांग ने सुरक्षा समीक्षा की।

मणिपुर ने भी जारी किया सतर्कता परामर्श

हालांकि मणिपुर की सीमा सीधे असम से नहीं लगती, फिर भी राज्य सरकार ने बेदखली अभियान से उत्पन्न अप्रत्याशित आवाजाही को रोकने के लिए सख्त परामर्श जारी किया है।

  • अंतर्राष्ट्रीय, अंतर-राज्यीय और जिला सीमाओं पर अतिरिक्त निगरानी।
  • जिलों को संदिग्ध प्रवासियों का बायोमेट्रिक और बायोग्राफिकल विवरण दर्ज करने का आदेश।
  • स्थानीय समाज में घुलने-मिलने से रोकने के निर्देश।

परामर्श के अनुसार, “सभी संदिग्धों को सुरक्षित स्थानों पर रखा जाए और उचित प्रक्रिया के बाद उन्हें निर्वासित किया जाए।”

मुख्यमंत्री सरमा का बयान और अभियान की व्यापकता

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमित भूमि को मुक्त कराना उनकी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह अभियान असम के अस्तित्व की रक्षा की लड़ाई” है।

  • दरांग ज़िले में 2021 से बेदखली अभियान चल रहा है।
  • गोलपाड़ा और धुबरी ज़िले में हजारों एकड़ सरकारी ज़मीन पर से अतिक्रमण हटाया गया।
  • सरमा ने अवैध बसावट को ‘संदिग्ध बांग्लादेशी’ प्रवासियों की संज्ञा दी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और रणनीतिक दृष्टिकोण

भाजपा प्रवक्ता कल्याण गोगोई ने इसे प्रशासनिक नहीं, बल्कि वैचारिक संघर्ष बताया। उन्होंने कहा, “जब तक हम असम आंदोलन के शहीदों के बलिदान का हिसाब नहीं ले लेते, यह अभियान जारी रहेगा।”

दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई को धार्मिक और जातीय रूप से लक्षित बताते हुए आलोचना की है।

इतिहास और पृष्ठभूमि

  • असम आंदोलन (1979–85) के बाद NRC और CAA जैसे मुद्दों से राज्य में ‘अवैध प्रवासियों’ का प्रश्न लगातार उभरता रहा है।
  • NRC की अंतिम सूची से 19 लाख लोगों को बाहर कर दिया गया था, जिसमें से बड़ी संख्या मुसलमानों की थी।
  • असम सरकार लंबे समय से सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए ‘राजस्व गांवों’ और ‘वन क्षेत्र’ चिह्नित कर रही है।

संभावित मानवीय संकट और भविष्य की राह

  • जून 2025 से अब तक 50,000 से अधिक लोग विभिन्न जिलों से बेदखल किए गए।
  • गोलपाड़ा के पैकन रिजर्व फॉरेस्ट में हालिया गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हुई।
  • मणिपुर जैसे राज्यों ने ‘अमानवीयता’ न हो, इसके लिए मानवीय सहायता की बात की है।

बेदखली अभियान असम में राज्य सरकार की प्राथमिक नीति बन चुका है, लेकिन इससे उत्पन्न मानवीय और क्षेत्रीय तनाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अवैध प्रवासियों पर अलर्ट से स्पष्ट है कि अन्य पूर्वोत्तर राज्य भी अपनी जनसांख्यिकीय संरचना को लेकर चिंतित हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा भारत के संघीय ढांचे और मानवीय अधिकारों की परीक्षा बन सकता है।

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