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भारत आईफोन निर्माण रणनीति पर ट्रंप टैरिफ नीति का वैश्विक प्रभाव

भारत आईफोन निर्माण रणनीति

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित 25% टैरिफ के बावजूद, भारत आईफोन निर्माण रणनीति पर कोई विशेष प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। Apple पहले ही भारत को चीन के विकल्प के रूप में उभरते विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टैरिफ़ राजनीतिक संकेत भर हैं और Apple की दीर्घकालिक योजना में बदलाव की कोई ठोस वजह नहीं बनते।

भारत सरकार की उत्पादन-समर्थक योजनाएं, कम श्रम लागत और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती ने Apple के लिए भारत को एक स्थायी विकल्प बना दिया है। हालांकि अमेरिकी उपभोक्ताओं पर कीमतों के प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन टेक विश्लेषकों का मानना है कि Apple इन लागतों को खुद वहन करेगा या किस्त आधारित योजनाओं में समाहित कर देगा।

ट्रंप का टैरिफ़ आदेश और उसका स्वरूप

30 जुलाई 2025 को, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और अब फिर से चुनाव की दौड़ में शामिल डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि भारत से आयात होने वाले सभी उत्पादों पर 1 अगस्त से 25% टैरिफ और दंडात्मक शुल्क लागू किया जाएगा। उन्होंने यह कदम भारत के ऊंचे टैरिफ़, रूस के साथ उसके रक्षा और ऊर्जा संबंधों तथा अमेरिका के साथ असमान व्यापार संतुलन का हवाला देकर उठाया।

ट्रंप के आरोप:

  • भारत द्वारा अमेरिका पर लगाए गए “दुनिया के सबसे ऊंचे टैरिफ़”
  • रूस से सैन्य उपकरण और ऊर्जा आयात
  • अमेरिकी कंपनियों की नौकरियाँ विदेश ले जाना

ट्रंप का बयान (Truth Social पर):

“भारत हमारा मित्र है, लेकिन उनके टैरिफ़ अत्यधिक हैं और उनके पास सबसे कड़े गैर-टैरिफ़ प्रतिबंध हैं। हमने बहुत सहा है। अब दंड होगा।”

Apple ने भारत से अमेरिका को किया $3.2 अरब का iPhone निर्यात

Apple के प्रमुख विनिर्माण भागीदार Foxconn ने मार्च–मई 2025 के दौरान भारत से 3.2 अरब डॉलर के iPhone अमेरिका को भेजे। यह Apple की ‘चीन प्लस वन’ रणनीति का स्पष्ट प्रमाण है। Apple की इस रणनीति का उद्देश्य है चीन पर निर्भरता कम करना, विशेषकर उस दौर में जब अमेरिका–चीन संबंध जटिल हो गए हैं।

प्रमुख आँकड़े:

  • अमेरिका में बिकने वाले 71% iPhone अब भारत से आते हैं (पिछले साल 31%)
  • भारत में iPhone निर्माण अब तीन प्रमुख कंपनियों द्वारा किया जा रहा है – Foxconn, Pegatron और Wistron
  • 2023–2025 के बीच Apple ने भारत में $5 बिलियन से अधिक का निवेश किया

भारत सरकार का रुख: टैरिफ़ का अध्ययन जारी

भारत सरकार ने ट्रंप के टैरिफ़ की घोषणा पर गंभीरता से संज्ञान लिया है। संसद में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा: उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत पहले ही UAE, UK, ऑस्ट्रेलिया और EFTA देशों के साथ व्यापक व्यापार समझौते कर चुका है और अन्य देशों के साथ वार्ता प्रगति पर है।

“सरकार भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ़ के प्रभावों की जाँच कर रही है और सभी हितधारकों से राय ले रही है।”

गोयल का संसद में वक्तव्य:

  • सरकार राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगी
  • MSMEs, निर्यातकों और किसानों के कल्याण को प्राथमिकता
  • सभी व्यापारिक विकल्पों और समझौतों पर विचार जारी

टेक विश्लेषकों की राय: Apple की रणनीति स्थायी है

TechArc के प्रमुख विश्लेषक फैसल कावूसा ने कहा कि Apple अपने भारत विस्तार में बाधा डालने की बजाय अमेरिकी बाज़ार में कीमत को स्थिर रखने की नीति अपनाएगा। इसके अलावा, विश्लेषकों का मानना है कि चीन में अस्थिरता और श्रम लागत में वृद्धि के कारण भारत का महत्व Apple के लिए और बढ़ा है।

“Apple ज़्यादातर iPhone को टेलीकॉम ऑपरेटर डील्स के ज़रिए बेचता है। कीमतें सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डालनी पड़तीं।”

चीन से दूरी बनाना ही Apple की नई प्राथमिकता

Apple ने पिछले दो वर्षों में चीन में अपने कई मैन्युफैक्चरिंग शिफ्ट्स भारत, वियतनाम और मलेशिया की ओर स्थानांतरित किए हैं। इसका मुख्य कारण है: भारत ने PLI योजना (Production-Linked Incentive) और मेक इन इंडिया जैसी पहल से इन कंपनियों को आकर्षित किया है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत वैश्विक तकनीकी विनिर्माण का केंद्र बने

  • अमेरिका–चीन व्यापार युद्ध
  • मानवाधिकारों को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना
  • कोविड-19 के बाद चीन में लॉकडाउन और अस्थिरता

ट्रंप के टैरिफ़ से उपभोक्ता प्रभावित होंगे?

कुछ अमेरिकी विश्लेषकों का मानना है कि टैरिफ़ का भार अंततः उपभोक्ता पर जाएगा, लेकिन Apple जैसी कंपनियाँ इससे बचने की रणनीति पहले ही बना चुकी हैं। बल्कि वह उन्हें फाइनेंसिंग योजनाओं या सर्विस बंडल्स के जरिए स्थिर रखता है।

भारत की दीर्घकालिक रणनीति: वैश्विक भरोसे का निर्माण

भारत सरकार ने बीते वर्षों में विदेशी निवेश को आकर्षित करने और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं: इन प्रयासों से Apple और अन्य वैश्विक टेक कंपनियों को भारत में स्थायी उपस्थिति दर्ज करने का मार्ग आसान हुआ है।

  • नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी 2022
  • ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग में सुधार
  • बिज़नेस एग्रीमेंट्स में डिजिटलीकरण
  • बिज़नेस वीज़ा प्रक्रिया का सरलीकरण

Apple की दीर्घकालिक योजना अडिग

ट्रंप के टैरिफ़ भले ही शोर मचाएँ, लेकिन भारत आईफोन निर्माण रणनीति पर उनका असर सीमित ही रहेगा। Apple जैसे ब्रांड ने भारत को उत्पादन केंद्र के रूप में अपनाया है और इसे तात्कालिक राजनीतिक निर्णयों से झटका नहीं लगेगा।

संक्षेप में:

  • Apple भारत में iPhone उत्पादन जारी रखेगा
  • अमेरिकी टैरिफ़ से दीर्घकालिक रणनीति में कोई बदलाव नहीं
  • भारत सरकार पूरी स्थिति की समीक्षा में जुटी है
  • भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश जारी

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