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दुर्लभ CRIB: एक नया रक्त समूह की खोज, चिकित्सा में मील का पत्थर

CRIB नया रक्त समूह

आज हम एक ऐसी अविश्वसनीय चिकित्सा उपलब्धि की बात कर रहे हैं जिसने दुनियाभर के विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। बेंगलुरु की एक 38 वर्षीय महिला में CRIB एक नया रक्त समूह खोजा गया है। यह रक्त समूह दुनिया में पहले कभी नहीं देखा गया था। यह खोज रक्त आधान चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह दिखाता है कि भारत चिकित्सा अनुसंधान में अग्रणी है।

  • एक असाधारण खोज हुई है।
  • यह भारतीय चिकित्सा विज्ञान में मील का पत्थर है।
  • दुनियाभर के वैज्ञानिक अब हैरान हैं।

मुख्य बिंदु :

  1. बेंगलुरु की महिला में खोजा गया ‘CRIB’ दुनिया का अब तक का अनदेखा नया रक्त समूह है।
  2. महिला का रक्त सभी आम O-पॉजिटिव रक्त इकाइयों से असंगत पाया गया, जिससे चिकित्सक चकित रह गए।
  3. रोटरी बैंगलोर टीटीके ब्लड सेंटर ने उन्नत जांच के बाद इस अज्ञात रक्त समूह की पुष्टि की।
  4. ‘CRIB’ नाम में ‘CR’ क्रोमर और ‘IB’ भारत-बेंगलुरु के चिकित्सा योगदान को दर्शाता है।
  5. इस खोज की अंतरराष्ट्रीय घोषणा मिलान में आयोजित ISBT सम्मेलन में 4 जून 2025 को की गई।
  6. यह खोज भारत को वैश्विक इम्यूनोहेमेटोलॉजी अनुसंधान में अग्रणी देश के रूप में स्थापित करती है।
  7. CRIB रक्त समूह से आधान सुरक्षा, अंग प्रत्यारोपण और आपात चिकित्सा में बेहतर परिणाम मिल सकेंगे।

कर्नाटक की महिला बनी दुनिया की पहली ‘CRIB’ एंटीजन धारक

इस अभूतपूर्व खोज का श्रेय रोटरी बैंगलोर टीटीके ब्लड सेंटर को जाता है। उन्होंने इस अज्ञात रक्त समूह का पता लगाया। बाद में, ब्रिटेन के ब्रिस्टल स्थित अंतर्राष्ट्रीय रक्त समूह संदर्भ प्रयोगशाला (IBGRL) ने इसकी पुष्टि की। महिला हृदय शल्य चिकित्सा के लिए भर्ती हुई थी। उसका रक्त प्रकार O Rh+ था, जो आमतौर पर सबसे आम है। लेकिन यह सभी उपलब्ध O-पॉजिटिव रक्त इकाइयों से असंगत था।

  • उसका रक्त सभी इकाइयों से असंगत था।
  • यह खोज चिकित्सा जगत के लिए महत्वपूर्ण है।

10 महीने का शोध और ‘पैन-रिएक्टिविटी’ का रहस्य

यह मामला रोटरी बैंगलोर टीटीके ब्लड सेंटर में भेजा गया था। वहाँ उन्नत इम्यूनोहेमेटोलॉजी संदर्भ प्रयोगशाला में इसकी जाँच हुई। केंद्र के डॉ. अंकित माथुर ने इसे “पैन-रिएक्टिविटी” वाला बताया।

  • हर परीक्षण पैनल के साथ असंगतता मिली।
  • परिवार के 20 सदस्यों का रक्त भी मेल नहीं खाया।
  • बिना रक्त आधान के सर्जरी हुई।

इसका मतलब था कि यह हर परीक्षण पैनल से असंगत था। महिला की सर्जरी बिना रक्त आधान के सफलतापूर्वक पूरी की गई।

‘CRIB’ नामकरण: क्रोमर और भारतीय योगदान का प्रतीक

महिला के नमूने आगे के विश्लेषण के लिए यूके भेजे गए। 10 महीने के गहन आणविक विश्लेषण के बाद, वैज्ञानिकों ने एक नया प्रतिजन खोजा। यह क्रोमर (CR) रक्त समूह प्रणाली का हिस्सा है।

  • ‘CR’ क्रोमर को दर्शाता है।
  • ‘IB’ भारत, बेंगलुरु का प्रतिनिधित्व करता है।
  • यह नामकरण वैज्ञानिक पहचान का प्रतीक है।

इस नए प्रतिजन को आधिकारिक तौर पर ‘CRIB’ नाम दिया गया है। यह नाम भारत के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है।

मिलान में ऐतिहासिक घोषणा और वैश्विक प्रभाव

इस खोज की सार्वजनिक घोषणा 4 जून, 2025 को की गई। यह इटली के मिलान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय रक्त आधान सोसायटी (ISBT) के 35वें क्षेत्रीय सम्मेलन में हुई। इस खोज के साथ, महिला CRIB एंटीजन से पहचानी जाने वाली विश्व स्तर पर पहली व्यक्ति बन गई है।

  • CRIB: एक नया रक्त समूह अब वैश्विक रूप से मान्य है।
  • यह भारत की शोध क्षमता को दर्शाता है।
  • ISBT ने इस खोज को स्वीकार किया है।

डॉ. माथुर ने बताया कि यह खोज दुर्लभ रक्त समूह अनुसंधान में भारत के योगदान को पुष्ट करती है। भारत ने पहले भी कई दुर्लभ रक्त प्रकार के मामलों का समर्थन किया है।

दुर्लभ रक्त समूह का भविष्य और आधान सुरक्षा

CRIB: एक नया रक्त समूह जैसी खोजें भविष्य की चिकित्सा आपात स्थितियों में सहायक होंगी। यह आधान सुरक्षा और संगतता परीक्षण में सुधार करती है। यह सफलता भारत को वैश्विक इम्यूनोहेमेटोलॉजी अनुसंधान में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाती है। महिला को भविष्य में रक्त आधान के लिए ऑटोलॉगस ट्रांसफ़्यूज़न की आवश्यकता हो सकती है। रोटरी बैंगलोर टीटीके ब्लड सेंटर ने एक दुर्लभ दाता रजिस्ट्री भी स्थापित की है।

  • यह आधान सुरक्षा को बढ़ाता है।
  • अंग प्रत्यारोपण में मदद मिलेगी।
  • भारत अग्रणी अनुसंधान देश बन रहा है।
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