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जादू-टोना के शक में हत्या ओडिशा में भयावह अपराध

जादू-टोना के शक में हत्या

ओडिशा के ब्रह्मपुर जिले में जादू-टोना के शक में हत्या की एक भयावह घटना सामने आई है। ग्रामीणों ने एक 35 वर्षीय व्यक्ति को बर्बरता से मार डाला। यह घटना समाज में व्याप्त अंधविश्वास और क्रूरता को दर्शाती है।

  • यह खौफनाक वारदात मोहना थाना क्षेत्र के मालसापदर गांव में हुई।
  • मृतक की पहचान गोपाल मलिक के रूप में हुई है, जिसकी उम्र 37 वर्ष थी।
  • पुलिस ने इस मामले में 14 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

ग्रामीणों ने मृतक पर दो हफ्ते पहले एक महिला की मौत का आरोप लगाया था। गोपाल को जादू-टोना करने का जिम्मेदार ठहराया गया था।

ग्रामीणों का खौफनाक आरोप और पलायन

कुछ ग्रामीणों को संदेह था कि एक महिला की मौत काले जादू के कारण हुई। उन्होंने गोपाल को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। अपनी जान के डर से गोपाल और उसका परिवार गांव छोड़कर गंजम जिले में चला गया था।

  • वह अपने ससुर के घर में शरण लिए हुए था और अपने मवेशियों व बकरियों को छोड़ गया था।
  • शनिवार को वह जानवरों को लेने वापस गांव लौटा, तभी उसका अपहरण कर लिया गया।
  • ग्रामीणों ने गोपाल पर जादू-टोना करने की बात स्वीकार करने के लिए दबाव डाला।

गोपाल ने अपनी संलिप्तता से इनकार किया, जिसके बाद ग्रामीणों ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। बाद में उन्होंने उसकी बेरहमी से पिटाई की और उसकी हत्या कर दी।

बर्बरता की हद पार, क्षत-विक्षत शव बांध में फेंका

ग्रामीणों ने गोपाल की हत्या करने के बाद उसके गुप्तांग काट दिए। उन्होंने उसके पेट को चीर दिया और उसके शव को एक पत्थर से बांध दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि पुलिस ने आगे की जांच शुरू कर दी है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद घटनास्थल का भी पुनर्निर्माण किया गया।

  • शव को पास के हरभंगी बांध में फेंक दिया गया था, जहां से उसे बरामद किया गया।
  • पुलिस ने अग्निशमन कर्मियों की मदद से रविवार सुबह शव को जलाशय से बाहर निकाला।
  • जी उदयगिरि के उप-विभागीय पुलिस अधिकारी सुरेश चंद्र त्रिपाठी ने यह जानकारी दी।

कानून और अंधविश्वास का संघर्ष

ओडिशा में इस तरह की घटनाएँ अक्सर सामने आती हैं। यह जादू-टोना के शक में हत्या की चौथी घटना है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, 2015 से 2024 के बीच राज्य में 556 हत्याएँ हुई हैं। पूर्व डीजीपी बीके शर्मा ने कहा कि अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता है। उन्होंने असम के कानून का उदाहरण दिया, जहां सरकारी अधिकारी भी जवाबदेह होते हैं।

  • पिछले हफ्ते कालाहांडी और गंजम में भी इसी तरह की घटनाएँ हुई थीं।
  • बिहार में भी इसी तरह की घटना हुई थी, जहां पांच लोगों को जिंदा जला दिया गया था।
  • ओडिशा डायन-हत्या निवारण अधिनियम, 2013, ऐसे अपराधों के खिलाफ है।

पुलिस कार्रवाई और सामाजिक कलंक

पुलिस ने हत्या के आरोप में 14 ग्रामीणों को हिरासत में लिया है। पूछताछ के दौरान उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। यह अधिनियम पीड़ितों को सामाजिक बहिष्कार से बचाने में अपर्याप्त है। कई पीड़ितों को उनके गांवों से निकाल दिया जाता है।

  • पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियार और तीन ऑटो-रिक्शा जब्त कर लिए हैं।
  • आरोपियों को सोमवार को अदालत में पेश किया गया।
  • यह जादू-टोना के शक में हत्या का मामला एक बड़ा सामाजिक कलंक है।

कानून में बदलाव की आवश्यकता

बीके शर्मा ने बताया कि डायन-हत्या के मामलों में पूरा गांव आरोपियों का समर्थन करता है। ओडिशा का कानून इन मामलों से प्रभावी ढंग से निपटने में कमजोर है।

  • अधिनियम में केवल 11 धाराएँ हैं, जो प्रभावी नहीं हैं।
  • असम डायन शिकार अधिनियम को एक मजबूत मॉडल के रूप में देखा जा सकता है।
  • इस समस्या से निपटने के लिए समाज और कानून दोनों को मिलकर काम करना होगा।

ओडिशा के आदिवासी बहुल जिलों में ये मामले अधिक आम हैं। इनमें मयूरभंज, क्योंझर, सुंदरगढ़ और मलकानगिरी शामिल हैं।

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