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तेलंगाना में भारी बारिश: भाजपा और कांग्रेस ने राहत कार्यों में मोर्चा संभाला,

तेलंगाना में भारी बारिश

तेलंगाना में भारी बारिश ने राज्य में एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है, जिसके चलते जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस आपदा की घड़ी में, राजनीतिक दल और सरकारें राहत और बचाव कार्यों में सक्रिय रूप से लगी हुई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने कार्यकर्ताओं को इस संकट के समय में लोगों की मदद के लिए आगे आने का निर्देश दिया है। तेलंगाना भाजपा के अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने गुरुवार को पार्टी कार्यकर्ताओं को बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत कार्यों में जुटने का निर्देश दिया। उन्होंने बूथ स्तर के अध्यक्षों, जिला अध्यक्षों, पदाधिकारियों और पार्षदों के साथ एक टेली-कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे निचले इलाकों से लोगों को निकालने और ज़रूरतमंदों को भोजन और पेयजल वितरित करने में आधिकारिक मशीनरी के साथ सहयोग करने का आग्रह किया।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने भी श्री राव से बात करके राज्य की स्थिति की जानकारी ली। एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि केंद्र सरकार ने तेलंगाना को राहत कार्यों में पूरी मदद का आश्वासन दिया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें पहले ही तैनात कर दी गई हैं और बाढ़ प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के लिए हेलीकॉप्टर तैयार रखे गए हैं।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का हवाई सर्वेक्षण और बचाव कार्य

वहीं, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने भी राज्य में हो रही तेलंगाना में भारी बारिश के मद्देनजर पूरे प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है। बुधवार को उन्होंने पेद्दापल्ली, कामारेड्डी और मेडक जिलों के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। बीआरएस ने उन पर यह आरोप भी लगाया कि राज्य के हेलीकॉप्टर कांग्रेस के प्रचार के लिए बिहार भेजे गए हैं, जबकि राज्य बाढ़ से जूझ रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पुराने या कमज़ोर घरों में रह रहे निवासियों को सुरक्षित इलाकों में पहुँचाने का निर्देश दिया है। बिजली विभाग को भी गणेश पंडालों में भक्तों के लिए सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने हैदराबाद आपदा प्रतिक्रिया और संपत्ति उत्पादन एजेंसी (HYDRAA), ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), अग्निशमन सेवा और पुलिस विभागों को भारी बारिश के दौरान असुविधा को रोकने और प्रयासों में समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया है। निचले इलाकों के पुलों, पुलियों और झरनों में पानी के बढ़ते प्रवाह को देखते हुए, अधिकारियों को बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही रोकने का आदेश दिया गया है। कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने अपने विभाग को फसल के नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है।

पोचारम परियोजना: एक सदी पुराना चमत्कार

इस आपदा के बीच, 103 साल पुरानी पोचारम परियोजना की मजबूती एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। कामारेड्डी ज़िले के नागिरेड्डी पेट मंडल में स्थित यह परियोजना 70,000 क्यूसेक की एमएफडी क्षमता के मुकाबले 1.82 लाख क्यूसेक पानी के प्रवाह को झेल गई। रविवार को इसके जलग्रहण क्षेत्र में हुई तेलंगाना में भारी बारिश के कारण यह अभूतपूर्व बाढ़ की चपेट में आ गई थी। जिला प्रशासन और सिंचाई अधिकारियों को बांध के टूटने का डर था, लेकिन जैसे-जैसे जलस्तर कम हुआ, यह स्पष्ट हो गया कि एक सदी से भी ज्यादा पुरानी यह परियोजना विनाशकारी बाढ़ के पानी को झेलने में सक्षम है।

सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी राहत जाहिर करते हुए लिखा, “हमारी 103 साल पुरानी पोचारम परियोजना ने 1,82,000 क्यूसेक के विशाल बाढ़ प्रवाह को बहादुरी से झेला है, जो इसके एमएफडी 70,000 क्यूसेक से कहीं ज़्यादा है।” रिकॉर्ड बताते हैं कि यह परियोजना हैदराबाद के तत्कालीन निज़ाम द्वारा 1917 में शुरू की गई थी और ₹27.11 लाख की लागत से पूरी हुई थी।

बाढ़ का कहर और बचाव कार्य

तेलंगाना में भारी बारिश के कारण मेडक और कामारेड्डी जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। मेडक ज़िले के पेद्दाशंकरमपेट में सबसे ज़्यादा 20.4 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। मूसलाधार बारिश ने नाले, झीलें और तालाब उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों की सड़कें और गाँव जलमग्न हो गए हैं। कई जिलों में सड़क संपर्क बाधित हुआ है। नारायणखेड़-कांगटी सड़क पर पानी बह रहा है और कामारेड्डी जिले के लक्ष्मपुर गाँव के पास एक पुलिया बह गई है।

राजन्ना सिरसिला जिले के गंभीरावपेट मंडल में फंसे ग्रामीणों को बचाने के लिए वायुसेना के दो हेलीकॉप्टर तैनात किए गए। स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा ने रामायमपेट के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और पुष्टि की कि अब तक एक व्यक्ति की दीवार गिरने से मौत हो गई है, जबकि एक कार में सवार दो लोग बह गए हैं। मेडक में बचाव और राहत कार्य में एसडीआरएफ की 15 टीमें, एनडीआरएफ की 5 टीमें और लगभग 100 सैन्यकर्मी लगे हुए थे। राष्ट्रीय राजमार्ग 44, जो उत्तर-दक्षिण दिशा का एक प्रमुख मार्ग है, कम से कम तीन स्थानों पर धंस गया है, जिससे भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जा रहा है।

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