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अर्थव्यवस्था पर जीएसटी प्रभाव: मोदी सरकार का दिवाली तोहफा?

अर्थव्यवस्था पर जीएसटी प्रभाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में की गई घोषणा के बाद,अर्थव्यवस्था पर जीएसटी प्रभाव जहां उन्होंने अधिकांश उत्पादों और सेवाओं के लिए जीएसटी दरों में कमी की बात कही, भारत का ऑटोमोबाइल बाजार एक अभूतपूर्व स्थिति का सामना कर रहा है। 16 से 28 अगस्त, 2025 के बीच, कुल ऑटोमोबाइल बिक्री में साल-दर-साल 8.27% की गिरावट दर्ज की गई। खरीदारों का एक बड़ा वर्ग जीएसटी में भारी कटौती की उम्मीद में अपनी खरीदारी टाल रहा है। इस अवधि में कुल 7,57,165 वाहन पंजीकृत किए गए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 8,25,516 थी।

वाहन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, भारी माल वाहनों की बिक्री में 6,372 इकाइयां (पिछले साल 6,972), हल्के मोटर वाहनों में 1,40,515 (पिछले साल 1,43,404) और दोपहिया (गैर-परिवहन) खंड में 5,33,401 इकाइयां (पिछले साल 5,97,875) दर्ज की गईं। दोपहिया वाहनों की बिक्री में 11% और हल्के मोटर वाहनों की बिक्री में 2% की गिरावट आई। हालांकि, हल्के यात्री वाहनों के पंजीकरण में 5% की वृद्धि देखी गई, जो 11,997 इकाई थी। इस अस्थिर स्थिति पर ऑटोमोबाइल कंपनियों ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

जीएसटी कटौती की मिली-जुली प्रतिक्रिया और उद्योग की उम्मीदें

ऑटो डीलरों की शीर्ष संस्था, फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के अध्यक्ष सी.एस. विग्नेश्वर ने इस स्थिति को “मिली-जुली प्रतिक्रिया” बताया। उन्होंने कहा कि कुछ खरीदारों ने स्पष्टता आने तक इंतजार करने का फैसला किया, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने डीलरों द्वारा दी गई छूट का लाभ उठाते हुए खरीदारी की। उन्होंने कहा कि हालांकि मध्यम से लंबी अवधि में जीएसटी में कटौती इस क्षेत्र के लिए फायदेमंद होगी, लेकिन अल्पकालिक अवधि में थोड़ी उलझन देखने को मिली है। FADA और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने सरकार से जल्द से जल्द दरों पर फैसला लेने का आग्रह किया है। मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (MSIL) के अध्यक्ष आर.सी. भार्गव ने भी कहा कि छोटी कारों पर जीएसटी में कटौती से उद्योग में नई जान आएगी। जेफरीज़ ने अपने नोट में कहा कि संभावित जीएसटी कटौती से ऑटो मांग को बढ़ावा मिलेगा। वित्त मंत्री ने संकेत दिया है कि इस मामले को 22 सितंबर, 2025 तक सुलझा लिया जाएगा और जीएसटी परिषद की बैठक सितंबर के पहले सप्ताह में होने की उम्मीद है।

जीएसटी 2.0: आम लोगों के लिए दिवाली का तोहफा

बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार जीएसटी संरचना को सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है, जिससे भारत को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान चार-स्तरीय प्रणाली को सरल करके दो-स्तरीय प्रणाली में बदलने का प्रस्ताव है। यह रिपोर्ट बताती है कि अर्थव्यवस्था पर जीएसटी प्रभाव सकारात्मक होगा, क्योंकि 12% से 5% और 28% से 18% स्लैब को कम करने से बड़ी राहत मिलेगी। इसका मतलब है कि कई उपभोक्ता वस्तुएं और टिकाऊ वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी। रिपोर्ट का अनुमान है कि निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) का 11.4% सीधे तौर पर इससे लाभान्वित होगा।

खाद्य उत्पाद, जिनमें दूध, पनीर, तेल, चीनी, मिठाइयाँ और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ शामिल हैं, 12% से 5% की दर पर आ सकते हैं। इसी तरह, एयर-कंडीशनर, एलईडी/एलसीडी टीवी, डिशवॉशर और मोटर वाहन जैसी टिकाऊ वस्तुओं पर जीएसटी की दरें 28% से घटकर 18% हो सकती हैं। यह कदम उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के क्षेत्र में भी मांग में सुधार लाएगा, जो वर्तमान में दबाव में है।

विकास और आत्म-निर्भरता की ओर एक कदम

प्रधानमंत्री मोदी के 15 अगस्त के भाषण को “सुदर्शन चक्र” के रूप में देखा जा रहा है जो वैश्विक प्रतिकूलताओं से भारत की वित्तीय संप्रभुता की रक्षा करेगा। अर्थव्यवस्था पर जीएसटी प्रभाव से कॉर्पोरेट आय और समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा। जेफरीज़ और मॉर्गन स्टेनली जैसी ब्रोकरेज कंपनियों का अनुमान है कि इससे मांग में ₹2.4 लाख करोड़ तक की वृद्धि हो सकती है। यह जीएसटी सुधार तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है: संरचनात्मक परिवर्तन, दरों में कटौती और जीवन की बेहतर सुगमता। यह सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान के साथ भी मेल खाता है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) को इनपुट की कम लागत और सरल अनुपालन नियमों से बड़ी राहत मिलेगी। रोजमर्रा की वस्तुओं के सस्ते होने से लोगों की जेब में ज़्यादा पैसा आएगा, जिससे अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट का अनुमान है कि कर योग्य जीएसटी वस्तुओं और सेवाओं पर प्रभावी कर की दर घटकर 14-15% रह जाने की उम्मीद है। अर्थव्यवस्था पर जीएसटी प्रभाव के कारण यह दिवाली लाखों लोगों के लिए दोगुनी उज्ज्वल हो सकती है। सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था पर जीएसटी प्रभाव को कम करने के लिए, परिषद सितंबर के पहले सप्ताह में बैठक करेगी।

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