भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी: आर्थिक सुरक्षा, तकनीक रक्षा में सहयोग
भारत और जापान ने अपनी भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को और भी मजबूत किया है, जिसमें आर्थिक सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल ही में टोक्यो यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने अपनी साझेदारी को क्षेत्रीय और वैश्विक समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया। साझा मूल्यों और आपसी सम्मान पर आधारित यह सहयोग अब सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, सूचना प्रौद्योगिकी, और फार्मास्यूटिकल्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक फैल गया है। दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा पर एक नया संवाद शुरू किया है, जो रणनीतिक व्यापार और प्रौद्योगिकी में सहयोग के लिए एक व्यापक ढाँचा है। इसके समानांतर, कीदानरेन और भारतीय उद्योग परिसंघ के बीच एक निजी क्षेत्र का मार्ग भी खोला गया है, जो रणनीतिक उद्योगों में सहयोग को आगे बढ़ाएगा।
सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा में अभूतपूर्व प्रगति
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में, भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय के बीच एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप ठोस परियोजनाएँ शुरू हुई हैं। इसमें जापानी सेमीकंडक्टर कंपनी रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा गुजरात में ओएसएटी सुविधा स्थापित करने के लिए सीजी पावर के साथ साझेदारी, ‘चिप्स टू स्टार्टअप’ कार्यक्रम के तहत आईआईटी हैदराबाद और सी-डैक के साथ सहयोग, और टोक्यो इलेक्ट्रॉन तथा टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच रणनीतिक गठजोड़ शामिल है। जापान ने तमिलनाडु के निवेश प्रोत्साहन कार्यक्रम के लिए येन ऋण सहायता भी प्रदान की है, जो सेमीकंडक्टर सहित उभरती प्रौद्योगिकियों में स्टार्टअप को वित्त पोषित करेगा।
स्वच्छ ऊर्जा भी एक प्रमुख केंद्र बिंदु के रूप में उभरी है। भारत और जापान ने एक संयुक्त ऋण व्यवस्था पर समझौता ज्ञापन और स्वच्छ हाइड्रोजन एवं अमोनिया पर एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। सहयोगी परियोजनाओं में अदानी पावर के मुंद्रा संयंत्र में अमोनिया का सह-प्रज्वलन और 400 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो के संचालन के लिए क्लीन मैक्स के साथ जेबीआईसी-ओसाका गैस साझेदारी शामिल है। दोनों पक्ष बैटरी आपूर्ति श्रृंखलाओं और जैव ईंधन पहलों पर भी काम कर रहे हैं, जिन्हें असम में बांस-आधारित इथेनॉल जैसी हरित परियोजनाओं में निवेश द्वारा समर्थन मिल रहा है।
अंतरिक्ष और रक्षा सहयोग ने छुए नए आयाम
प्रधानमंत्री मोदी ने टोक्यो में 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा से मुलाकात के दौरान चंद्रयान-5 मिशन पर इसरो और जाक्सा के सहयोग की सराहना की। इस मिशन को जाक्सा अपने H3-24L प्रक्षेपण यान के जरिए लॉन्च करेगा, जो इसरो द्वारा निर्मित चंद्र लैंडर और जापान निर्मित चंद्र रोवर को ले जाएगा। यह मिशन, जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव का अन्वेषण करना है, दोनों देशों की वैज्ञानिक और तकनीकी साझेदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
रक्षा क्षेत्र में, दोनों देशों ने सुरक्षा सहयोग पर एक संयुक्त घोषणापत्र अपनाकर अपनी भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया है। यह घोषणापत्र हिंद-प्रशांत और उसके बाहर शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इसमें रक्षा, प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-निरोध में सहयोग को गहरा करने की प्रतिबद्धता है। दोनों देशों ने अपने सशस्त्र बलों के बीच अंतर-संचालन क्षमता बढ़ाने, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सैन्य अभ्यासों का विस्तार करने, और साइबर सुरक्षा व समुद्री डकैती जैसे खतरों से निपटने के लिए सहयोग पर सहमति व्यक्त की है।
ट्रम्प टैरिफ का असर और साझा व्यापार रणनीति
अमेरिकी संरक्षणवादी नीतियों के तहत बढ़ते वैश्विक व्यापार तनाव के बीच, प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा ने गहरा महत्व प्राप्त किया है। भारत और जापान दोनों ही ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ का सामना कर रहे हैं। इस दबाव के बावजूद, दोनों देशों ने अमेरिका की मांगों के आगे झुकने से इनकार कर दिया है। जापान ने अमेरिका के लिए निर्धारित एक आर्थिक प्रतिनिधिमंडल को रद्द कर दिया, जबकि भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा। जापान ने अमेरिका में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में निवेश को स्थगित करते हुए, इसके बजाय भारत में 10 ट्रिलियन येन (लगभग 60,000 करोड़ रुपये) का पर्याप्त निवेश करने का वादा किया है। यह कदम अमेरिकी आर्थिक दबाव के प्रतिकार के रूप में भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है।
दोनों देश अब अमेरिका-केंद्रित व्यापार के विकल्प तलाश रहे हैं, जिसमें ब्रिक्स जैसे मंचों के माध्यम से गहन जुड़ाव शामिल है। यह सहयोग अंतर-सदस्य व्यापार को बढ़ाने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने का प्रयास है, जो डॉलर के वैश्विक प्रभुत्व के लिए एक चुनौती है। इस तरह की भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी एक परिपक्व और लचीले संबंध का संकेत देती है जो एकतरफावाद के प्रति साझा प्रतिरोध पर भी आधारित है। दारुमा गुड़िया, जो लचीलेपन और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है, इस विकसित होते गठबंधन की भावना का प्रतिनिधित्व करती है।



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