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शिगेरु इशिबा मोदी मुलाकात: 21 समझौतों के साथ जापान में ऐतिहासिक यात्रा

शिगेरु इशिबा-मोदी मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके जापानी समकक्ष शिगेरु इशिबा मोदी मुलाकात ने दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई दिशा दी। दोनों नेताओं ने शनिवार को टोक्यो से सेंडाइ तक शिंकानसेन बुलेट ट्रेन से यात्रा की, जो भारत और जापान के बीच बढ़ते विश्वास और गर्मजोशी का प्रतीक है। इशिबा ने यात्रा के कुछ हिस्से के लिए मोदी के साथ कार से भी सफर किया। इस दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वी जापान रेलवे कंपनी में प्रशिक्षण ले रहे भारतीय ट्रेन ड्राइवरों से भी मुलाकात की, जिन्होंने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने इस यात्रा की तस्वीरें अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर साझा कीं, जिसमें उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेंडाइ। कल रात से जारी रखते हुए, मैं आपके साथ कार में रहूंगा।” विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर बताया कि इस दौरान मोदी ने “राज्यों-प्रान्तों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला और इस संबंध में साझा प्रगति के लिए 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान शुरू की गई राज्य-प्रान्त साझेदारी पहल के तहत कार्रवाई करने का आग्रह किया।”

रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूती देने वाले प्रमुख समझौते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय जापान यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से 21 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें 6 समझौते, 7 समझौता ज्ञापन (MoUs) और 8 नई घोषणाएँ शामिल हैं। इन समझौतों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि अगले दस वर्षों के लिए व्यापार, प्रौद्योगिकी और गतिशीलता में सहयोग बढ़ाने के लिए एक दीर्घकालिक रोडमैप को अपनाना था। एक और महत्वपूर्ण समझौता रक्षा सहयोग पर हुआ, जिसमें द्विपक्षीय सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए एक नया ढाँचा पेश किया गया। जापान ने भारत में अगले दस वर्षों में 10 ट्रिलियन येन (लगभग ₹60,000 करोड़) का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई। इस यात्रा के दौरान शिगेरु इशिबा मोदी मुलाकात में कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात हुई, जिसमें डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्वच्छ ऊर्जा, दूरसंचार, सेमीकंडक्टर और फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं।

भविष्य की ओर बढ़ता कदम: तकनीक और नवाचार में सहयोग

अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने एक सेमीकंडक्टर प्लांट और एक बुलेट ट्रेन कोच सुविधा का दौरा किया, जो रक्षा और उन्नत तकनीक में दोनों देशों के बढ़ते सहयोग को दर्शाता है। एक प्रमुख घोषणा में, जापान ने 2030 के दशक की शुरुआत तक भारत में अपनी उन्नत E10 शिंकानसेन ट्रेनें शुरू करने की योजना की पुष्टि की। दोनों पक्षों ने अगले पाँच वर्षों में 50,000 कुशल और अर्ध-कुशल भारतीय पेशेवरों को जापान भेजने की योजना को अंतिम रूप दिया। इसके अलावा, भारत-जापान डिजिटल साझेदारी 2.0 और भारत-जापान एआई पहल भी शुरू की गई। अंतरिक्ष क्षेत्र में, भारतीय और जापानी अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच एक संयुक्त चंद्र मिशन के लिए समझौता हुआ, जिसमें चंद्रयान-5 परियोजना पर सहयोग शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी नवाचार और भारतीय प्रतिभा के बीच साझेदारी को एक “विजयी संयोजन” बताया और कहा कि यह एक व्यापक गतिशीलता समझौते के तहत जहाज निर्माण, विमानन और बंदरगाहों में संयुक्त प्रयासों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

आतंकवाद पर कड़ा रुख और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर

पहलगाम में हुए हालिया आतंकवादी हमले की प्रतिक्रिया में, दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त रूप से हिंसा की निंदा की और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की मांग की। संयुक्त राष्ट्र की एक निगरानी टीम की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला द रेजिस्टेंस फ्रंट से जुड़ा था। इसके अलावा, श्री मोदी और श्री इशिबा ने क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और पूर्वी तथा दक्षिण चीन सागर में सुरक्षा स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के आधार पर समुद्री विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया। इस शिगेरु इशिबा मोदी मुलाकात में, दोनों नेताओं ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की।

यात्रा के अन्य महत्वपूर्ण पहलू

प्रधानमंत्री मोदी ने टोक्यो में जापान के पूर्व प्रधानमंत्रियों योशीहिदे सुगा और फुमियो किशिदा से भी मुलाकात की। उन्होंने पूर्व जापानी प्रधानमंत्री योशीहिदे के साथ भारत-जापान सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने व्यापार, नवाचार, उद्यमिता, स्टार्टअप, तकनीक और एआई जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं पर बात की। इस यात्रा के दौरान दोनों सरकारें आर्थिक सुरक्षा और उच्च-तकनीकी व्यापार पर नीति-स्तरीय वार्ता को तेज करने पर सहमत हुईं, जिसका उद्देश्य निर्यात नियंत्रणों को आसान बनाना और विशिष्ट सहयोगी परियोजनाओं की पहचान करना है। प्रधानमंत्री इशिबा ने भारत को अपने बाजार को जापानी निवेश के लिए और अधिक अनुकूल बनाने हेतु नियामक सुधार जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। श्री मोदी ने भारत में रोजगार और नवाचार को बढ़ावा देने में जापानी कंपनियों की भूमिका की सराहना की और और अधिक कंपनियों को निवेश के लिए आमंत्रित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा के अंत में एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “एक उपयोगी यात्रा के दौरान उपयोगी परिणाम। आने वाले समय में भारत-जापान मित्रता नई ऊँचाइयों को छुए!”

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