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डेंगू-मलेरिया रोकथाम अभियान पर केंद्र सख्त, राज्यों को निर्देश

डेंगू मलेरिया रोकथाम अभियान

नई दिल्ली: डेंगू मलेरिया रोकथाम अभियान देश में डेंगू और मलेरिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, और इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को एक सख्त परामर्श जारी किया है। इस परामर्श के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि आने वाले महीनों में डेंगू और मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण के लिए तत्काल और समन्वित कार्रवाई की जाए। मंत्री ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्रियों को व्यक्तिगत रूप से स्थिति की समीक्षा करने और 20 दिनों के भीतर एक कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। यह कदम देश में वेक्टर जनित बीमारियों के बोझ को कम करने के लिए हुई प्रगति को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

मच्छर मुक्त परिसर और पर्याप्त संसाधनों पर जोर

समीक्षा बैठक के दौरान, जेपी नड्डा ने डेंगू और मलेरिया की रोकथाम और नियंत्रण की वर्तमान स्थिति और प्रमुख चुनौतियों का जायजा लिया। उन्होंने राज्यों, स्थानीय निकायों और समुदायों से आग्रह किया कि वे इस उच्च जोखिम वाले समय (जुलाई से अक्टूबर) में निवारक और नियंत्रण उपायों को तेज़ करें। विशेष रूप से दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि डेंगू की स्थिति का बारीकी से आकलन किया जा सके और अग्रिम तैयारी सुनिश्चित हो सके।

केंद्र सरकार के अधीन आने वाले अस्पतालों सहित सभी अस्पतालों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके पास पर्याप्त दवाएं, निदान सुविधाएं, बिस्तर और मच्छर-मुक्त परिसर हों। हाल ही में हुई बारिश के कारण जल जमाव से मच्छरों के प्रजनन स्थल बनने के मद्देनजर, राज्यों और स्थानीय निकायों से निवारक उपाय बढ़ाने को कहा गया है।

भारत की मलेरिया पर उल्लेखनीय प्रगति और आगे की रणनीति

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने मलेरिया से निपटने में उल्लेखनीय प्रगति की है। 2015 और 2024 के बीच मलेरिया के मामलों में 78% से अधिक की कमी आई है, जबकि मलेरिया से संबंधित मौतों में भी लगभग 78% की गिरावट दर्ज की गई है। 2022 और 2024 के बीच 160 जिलों में मलेरिया का कोई भी मामला सामने नहीं आया, और 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वार्षिक परजीवी घटना (API) एक से भी कम रही है। भारत ने 2030 तक मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य रखा है।

इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार ने कई पहल शुरू की हैं, जिनमें मलेरिया उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (2023-27), वास्तविक समय निगरानी के लिए एकीकृत स्वास्थ्य प्रबंधन प्लेटफॉर्म (IHIP), आशा कार्यकर्ताओं के प्रोत्साहन में वृद्धि, लंबे समय तक चलने वाले कीटनाशक जालों (LLIN) का बड़े पैमाने पर वितरण, और ‘शून्य मलेरिया’ दर्जा प्राप्त करने वाले जिलों को मान्यता देना शामिल है। इन पहलों के अलावा, प्रयोगशाला तकनीशियनों के लिए रिफ्रेशर प्रशिक्षण भी आयोजित किए जा रहे हैं।

डेंगू और चिकनगुनिया पर भी सतर्कता

डेंगू के संबंध में, जेपी नड्डा ने कहा कि लद्दाख को छोड़कर सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश डेंगू और चिकनगुनिया के लिए स्थानिक हैं। इनके प्रकोप का सबसे अधिक जोखिम मानसून और उसके बाद की अवधि में होता है। स्वास्थ्य मंत्रालय निर्देश के तहत, राष्ट्रीय डेंगू नियंत्रण रणनीति को राज्य वेक्टर जनित रोग प्रकोष्ठों के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जो निगरानी, केस प्रबंधन, वेक्टर नियंत्रण, अंतर-क्षेत्रीय समन्वय और सामुदायिक जागरूकता पर ध्यान केंद्रित कर रही है। सरकार ने अपनी नैदानिक क्षमता को भी मजबूत किया है, जिसमें 869 प्रहरी निगरानी अस्पताल और 27 शीर्ष रेफरल प्रयोगशालाएं शामिल हैं जो मुफ्त परीक्षण सेवाएं प्रदान करती हैं। अब तक, राज्यों को 5,520 से अधिक डेंगू और 2,530 चिकनगुनिया निदान किट की आपूर्ति की जा चुकी है।

इसके अतिरिक्त, सामुदायिक भागीदारी और व्यक्तिगत सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए गहन आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) और सोशल मीडिया आउटरीच भी जारी है। राष्ट्रीय डेंगू दिवस (16 मई) और डेंगू रोधी माह (जुलाई) जैसे अभियानों का आयोजन भी इस राष्ट्रव्यापी प्रयास का हिस्सा है।

इन प्रयासों के माध्यम से, स्वास्थ्य मंत्रालय निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश वेक्टर जनित रोगों के खिलाफ एक मजबूत और समन्वित प्रतिक्रिया दे सके, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा हो सके और बीमारियों का बोझ कम हो।

देश में डेंगू और मलेरिया के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने डेंगू-मलेरिया रोकथाम अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर कदम उठाना बेहद जरूरी है, वरना संक्रमण की स्थिति गंभीर हो सकती है। केंद्र ने स्पष्ट किया कि डेंगू-मलेरिया रोकथाम अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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