एयर इंडिया विमान हादसा: बोइंग और हनीवेल पर मुकदमा
हाल ही में, एयर इंडिया दुर्घटना के पीड़ितों के परिवारों ने विमान निर्माता कंपनी बोइंग और हनीवेल पर मुकदमा दायर करके एक बड़ा कदम उठाया है। यह मुकदमा 16 सितंबर को डेलावेयर सुपीरियर कोर्ट में दायर किया गया है। पीड़ितों के परिवारों का आरोप है कि विमान में लगे दोषपूर्ण ईंधन कटऑफ स्विच और कंपनियों की घोर लापरवाही ने 260 लोगों की जान ले ली। यह मुकदमा इस बात का संकेत है कि पीड़ित परिवार न्याय की लड़ाई में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
वादी, जिनमें कांताबेन, नाव्या, कुबेरभाई और बेबीबेन पटेल शामिल थे, का दावा है कि यह हादसा अनजाने में स्विच के सक्रिय हो जाने से हुआ। विमान ने अहमदाबाद से उड़ान भरी थी और कुछ ही मिनटों बाद वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
यह हादसा 12 जून को फ्लाइट 171 के साथ हुआ था, जिसमें दुखद रूप से केवल एक व्यक्ति जीवित बचा। इस मामले में डेलावेयर में दर्ज मुकदमे में बोइंग और हनीवेल दोनों को प्रतिवादी बनाया गया है।
FAA की चेतावनी और कंपनियों की अनदेखी
इस मामले की जड़ें 2018 में एफएए (फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन) द्वारा जारी की गई एक चेतावनी से जुड़ी हैं। एफएए ने तब ईंधन स्विच लॉकिंग मैकेनिज्म पर एक चेतावनी जारी की थी। हालांकि यह केवल एक सिफारिश थी, अनिवार्य नहीं, फिर भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया। एयर इंडिया ने भी इस चेतावनी के बाद कोई निरीक्षण नहीं किया। पीड़ितों के परिवारों का आरोप है कि एफएए की चेतावनियों के बावजूद, इन कंपनियों ने आवश्यक कदम नहीं उठाए।
हनीवेल ने इस स्विच को डिजाइन किया था, जबकि बोइंग ने इसे विमान में लगाया था। एफएए ने पहले ही कई बोइंग मॉडलों में इस स्विच को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं। थ्रस्ट लीवर के पास इस तरह के स्विच को लगाना एक बड़ा सुरक्षा खतरा माना गया था, क्योंकि इससे यह गलती से सक्रिय हो सकता था।
दुर्घटना के समय, स्विच “कटऑफ” की स्थिति में चला गया था, जिससे इंजनों को ईंधन मिलना बंद हो गया और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बोइंग और हनीवेल पर मुकदमा दायर करने का यह कदम इन कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए उठाया गया है।
कॉकपिट में भ्रम की स्थिति और तकनीकी जांच
जांच रिपोर्ट के अनुसार, उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड में विमान की बिजली आपूर्ति बंद हो गई थी। फ्लाइट रिकॉर्डिंग से पता चला कि एक पायलट ने स्विच को बंद करने से इनकार किया था, लेकिन यह अस्पष्ट है कि यह संवाद किन पायलटों के बीच हुआ। रिकॉर्डिंग में ईंधन कटऑफ को लेकर कॉकपिट में भारी भ्रम की स्थिति भी दिखाई दी। स्विच 10 सेकंड के भीतर चालू हो गए थे, लेकिन तब तक थ्रस्ट वापस नहीं आ पाया था।
गौरतलब है कि विमान की मरम्मत 2019 और 2023 में की गई थी, लेकिन यह स्विच तब भी एक खतरा बना रहा। एफएए ने अपनी जांच में यह भी कहा कि उन्हें ईंधन नियंत्रण प्रणाली में कोई यांत्रिक खराबी नहीं मिली, जिससे यह संदेह और गहरा हो गया कि यह हादसा मानवीय त्रुटि या स्विच की डिजाइन में खामी के कारण हुआ। बोइंग और हनीवेल पर मुकदमा इस तकनीकी पहलू की गहन जांच की मांग करता है।
पायलट के मानसिक स्वास्थ्य पर अटकलें और परिवार का जवाब
हादसे के बाद, मीडिया में पायलट कैप्टन सुमीत सभरवाल के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। उनके पिता पुष्कराज ने इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया और उनके उड़ान रिकॉर्ड का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि कैप्टन सुमीत के पास 15,638 घंटे का उड़ान अनुभव था और वह एक लाइसेंस प्राप्त ट्रेनिंग कैप्टन भी थे। उन्होंने हाल ही में 100 से अधिक सफल उड़ानें भी पूरी की थीं। परिवार का आरोप है कि चुनिंदा जानकारी को सार्वजनिक करके मृतक की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया।
जांच रिपोर्ट और कानूनी स्थिति
एएआईबी (एयर एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया था कि स्विच खुद-ब-खुद “कटऑफ” की स्थिति में चला गया था। इससे कॉकपिट में भ्रम पैदा हुआ, जिससे अंततः विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
डेलावेयर कोर्ट में दायर यह केस अमेरिका में दर्ज किया गया पहला मामला है। यह मुकदमा संख्या N25C-09-145 के तहत दर्ज किया गया है।
पीड़ितों में भारतीय और ब्रिटिश नागरिक शामिल थे। इस हादसे में 12 क्रू सदस्य और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की भी मौत हो गई। एयर इंडिया दुर्घटना के पीड़ितों के परिवारों द्वारा बोइंग और हनीवेल पर मुकदमा दायर करने का यह कदम न्याय की उम्मीद जगाता है।



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