एनएससीएन (के) पर 5 साल का और प्रतिबंध: गृह मंत्रालय का फैसला
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार (22 सितंबर, 2025) को नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (खापलांग) [एनएससीएन (के)], उसके सभी गुटों, शाखाओं और अग्रिम संगठनों पर प्रतिबंध को पाँच साल के लिए और बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह कदम भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए इस समूह की हानिकारक गतिविधियों को देखते हुए उठाया गया है। गृह मंत्रालय (एमएचए) की एक अधिसूचना में कहा गया है कि यह प्रतिबंध 28 सितंबर से पाँच वर्षों की अवधि के लिए प्रभावी होगा। गृह मंत्रालय का यह फैसला समूह की निरंतर हिंसक और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के कारण लिया गया है।
नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश की सिफारिशें
नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश की राज्य सरकारों ने भी गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 के तहत एनएससीएन (के) को एक गैरकानूनी संगठन घोषित करने की सिफारिश की थी। सरकार ने इन सिफारिशों को मानते हुए कहा कि अगर इस समूह की गतिविधियों पर तुरंत अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह फिर से संगठित हो सकता है, खुद को फिर से हथियारबंद कर सकता है और नागरिकों व सुरक्षा बलों की जान ले सकता है।
भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा
सरकार का मानना है कि एनएससीएन (के) ने भारतीय संघ से अलग होकर भारत-म्यांमार क्षेत्र के नागा बहुल इलाकों को मिलाकर एक संप्रभु नागालैंड बनाने का अपना लक्ष्य घोषित किया है। इसके अलावा, इस समूह ने यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) [उल्फा (आई)], पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलीपाक (पीआरईपीएके) और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) जैसे अन्य गैरकानूनी संगठनों के साथ भी गठबंधन किया है। इन गतिविधियों को भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए एक गंभीर खतरा माना गया है।
समूह की आपराधिक और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियाँ
अधिसूचना में बताया गया है कि एनएससीएन-के व्यापारियों, सरकारी अधिकारियों और अन्य नागरिकों से फिरौती और जबरन वसूली के लिए अपहरण में भी लिप्त है। यह अवैध हथियार और गोला-बारूद रखता है और हथियार व अन्य सहायता प्राप्त करने के लिए अन्य देशों में भारत विरोधी ताकतों से सहायता प्राप्त करता है। यह समूह दशकों से एक प्रतिबंधित संगठन बना हुआ है, और हर पाँच साल में इस प्रतिबंध को बढ़ाया जाता रहा है। गृह मंत्रालय का यह फैसला इस बात को पुष्ट करता है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।
पिछले पाँच वर्षों का रिकॉर्ड
गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, 28 सितंबर, 2020 से 30 अप्रैल, 2025 के बीच एनएससीएन (के) कैडर की कई आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता पाई गई है। इस दौरान, इसके कैडर के खिलाफ 71 मामले दर्ज किए गए, 56 आरोपपत्र दाखिल किए गए और 35 कैडरों पर मुकदमा चलाया गया। इसके अलावा, 51 अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी इसके कैडर शामिल थे। इस अवधि में 85 कैडरों की गिरफ्तारी हुई और 69 ने आत्मसमर्पण किया। सुरक्षा बलों और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में 13 भूमिगत कैडर मारे गए।
अधिकारियों ने इस दौरान बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की, जिसमें 69 हथियार, 52 मैगज़ीन, 931 जिंदा कारतूस, 10 ग्रेनेड, 150 डेटोनेटर, तीन विस्फोटक जेल ट्यूब, 200 ग्राम ट्राइनाइट्रोटोल्यूइन, डेढ़ किलोग्राम इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) और 800 ग्राम अन्य विस्फोटक शामिल हैं। यह गृह मंत्रालय का फैसला इस बात का सबूत है कि इस समूह पर सरकार की कड़ी नजर बनी हुई है।
नेतृत्व और संगठन की स्थिति
एनएससीएन-के का गठन एस.एस. खापलांग ने किया था, जिनका 2017 में निधन हो गया था। अब यह संगठन उनके दो सहयोगियों द्वारा चलाया जाता है। खापलांग एक म्यांमारी नागा थे और दशकों तक इस समूह का नेतृत्व किया। यह ध्यान देने योग्य है कि एनएससीएन-के का प्रतिद्वंद्वी गुट, एनएससीएन-आईएम, वर्तमान में नागालैंड की सात दशक पुरानी उग्रवाद समस्या का शांतिपूर्ण समाधान खोजने के लिए केंद्र सरकार के साथ शांति वार्ता कर रहा है।
अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि यह प्रतिबंध 28 सितंबर, 2025 से पाँच वर्षों की अवधि के लिए तत्काल प्रभाव से लागू होगा, जो 28 सितंबर, 2030 तक प्रभावी रहेगा, जब तक कि अधिनियम के प्रावधानों के तहत इसमें पहले कोई संशोधन न किया जाए। इन परिस्थितियों में, गृह मंत्रालय का यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।



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