“रिकॉर्ड पर्यटकों के साथ मैसूर दशहरा उत्सव का भव्य समापन”
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इस साल के दशहरा उत्सव समापन में पर्यटकों की रिकॉर्ड संख्या निःसंदेह एक बड़ी सफलता है, लेकिन जंबू सवारी के दौरान पास धारकों को प्रवेश नहीं मिला यह प्रशासनिक चूक भविष्य के लिए एक सबक है। जिला प्रशासन को अब इस बात पर गंभीरता से विचार करना होगा कि जब बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित किया जा रहा है, तो भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का कैसे बनाया जाए।
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि अगले वर्ष से जंबू सवारी के लिए पास वितरण प्रणाली को और पारदर्शी बनाया जाएगा। इसके अलावा, मैसूर महल प्रवेश द्वार पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक तकनीक और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती पर विचार किया जा रहा है। विजयादशमी जुलूस की भव्यता बरकरार रहे, इसके लिए स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने वाले तत्वों को और अधिक शामिल करने की योजना है।
इस साल 11 दिनों तक चले उत्सव ने साबित कर दिया है कि मैसूर दशहरा को और अधिक दिनों तक सफलतापूर्वक आयोजित किया जा सकता है, जिससे राज्य के पर्यटन और राजस्व को और बढ़ावा मिलेगा। यह दशहरा उत्सव समापन एक सीख भी देकर गया है कि सफलता के साथ बेहतर व्यवस्था की ज़िम्मेदारी भी आती है।
इस साल के दशहरा उत्सव समापन में पर्यटकों की रिकॉर्ड संख्या निःसंदेह एक बड़ी सफलता है, लेकिन जंबू सवारी के दौरान पास धारकों को प्रवेश नहीं मिला यह प्रशासनिक चूक भविष्य के लिए एक सबक है। जिला प्रशासन को अब इस बात पर गंभीरता से विचार करना होगा कि जब बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित किया जा रहा है, तो भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का कैसे बनाया जाए।
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि अगले वर्ष से जंबू सवारी के लिए पास वितरण प्रणाली को और पारदर्शी बनाया जाएगा। इसके अलावा, मैसूर महल प्रवेश द्वार पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक तकनीक और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती पर विचार किया जा रहा है। विजयादशमी जुलूस की भव्यता बरकरार रहे, इसके लिए स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने वाले तत्वों को और अधिक शामिल करने की योजना है।
मैसूर में गुरुवार को विजयादशमी जुलूस देखने के लिए सिटी बस स्टैंड पर भारी भीड़ उमड़ी। | फोटो साभार: एम.ए. श्रीराम। यह भीड़ इस बात का स्पष्ट संकेत थी कि मैसूर का विश्व प्रसिद्ध दशहरा अब केवल कर्नाटक ही नहीं, बल्कि वैश्विक पटल पर एक बड़े पर्यटक आकर्षण के रूप में उभरा है।
मैसूर महल के उत्तरी द्वार के बाहर नंदी ध्वज की पूजा करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, श्री सिद्धारमैया ने इस दावे पर मुहर लगाई। यह उत्तरी द्वार विजयादशमी जुलूस की शुरुआत का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस साल दशहरा सामान्य 10 दिनों के बजाय 11 दिनों तक मनाया गया। उन्होंने इस बात पर भी संतोष व्यक्त किया कि यह उत्सव बिना किसी बाधा के हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, जिसने इस साल के आयोजन की सफलता को और बढ़ा दिया।
जंबू सवारी: भव्य समापन पर प्रबंधन की चूक से पास धारकों को हुई निराशा
उत्सव के भव्य समापन, जंबू सवारी देखने के लिए गुरुवार को बड़ी संख्या में पास धारकों को मैसूर महल में प्रवेश नहीं मिला, जिससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। महल परिसर के पश्चिमी भाग में स्थित ब्रह्मगिरि द्वार, जंबू सवारी के लिए ‘आमंत्रित’ पास धारकों के लिए निर्धारित प्रवेश द्वार था। लेकिन, गुरुवार को बड़ी संख्या में पास धारकों को जंबू सवारी देखने के लिए महल परिसर में प्रवेश नहीं मिला, क्योंकि उन्हें आवंटित स्थान पहले ही भर चुके थे। इस अव्यवस्था के कारण कई आगंतुकों को मायूस होकर लौटना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि जंबू सवारी के दौरान पास धारकों को प्रवेश नहीं मिला। इस घटना ने एक बार फिर प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण की चुनौती को उजागर किया, खासकर तब जब उत्सव ने बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित किया है। बावजूद इसके, शाही रस्में, जंबो सफारी ने शानदार मैसूर दशहरा का जश्न मनाया।
भव्य मैसूर दशहरा समारोह के केंद्र में, दक्षिणी दृश्य मैसूर पैलेस के जीवंत नज़ारे को कैद करता है, जहाँ भुवनेश्वरी मंदिर में अनुष्ठान चल रहे थे। भव्य समारोहों में मैसूर दशहरा उत्सव, अनुष्ठान, परेड और प्रतिष्ठित जंबो सफारी शामिल हैं। इन मनमोहक दृश्यों और परंपराओं के बीच, इस साल के दशहरा उत्सव समापन का यादगार ढंग से समापन हुआ।
मुख्यमंत्री का दावा और भविष्य की तैयारियां
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने दावे को दोहराते हुए कहा कि दशहरा उत्सव समापन राज्य के लिए एक बड़ी सफलता थी, खासकर पर्यटकों की संख्या के मामले में। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले साल, इस तरह की भव्य भीड़ को संभालने के लिए और अधिक पुख्ता इंतज़ाम किए जाएंगे, ताकि किसी भी पास धारक को असुविधा न हो।
सिटी बस स्टैंड पर विजयादशमी जुलूस देखने के लिए उमड़ी भारी भीड़ यह साबित करती है कि मैसूर दशहरा एक सांस्कृतिक महाकुंभ का रूप ले चुका है, जिसके सफल और सुव्यवस्थित आयोजन की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। उम्मीद है कि अगले वर्ष के उत्सव में भव्यता और व्यवस्था का यह संतुलन और बेहतर होगा।
इस साल के दशहरा उत्सव समापन में पर्यटकों की रिकॉर्ड संख्या निःसंदेह एक बड़ी सफलता है, लेकिन जंबू सवारी के दौरान पास धारकों को प्रवेश नहीं मिला यह प्रशासनिक चूक भविष्य के लिए एक सबक है। जिला प्रशासन को अब इस बात पर गंभीरता से विचार करना होगा कि जब बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित किया जा रहा है, तो भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का कैसे बनाया जाए।
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि अगले वर्ष से जंबू सवारी के लिए पास वितरण प्रणाली को और पारदर्शी बनाया जाएगा। इसके अलावा, मैसूर महल प्रवेश द्वार पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक तकनीक और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती पर विचार किया जा रहा है। विजयादशमी जुलूस की भव्यता बरकरार रहे, इसके लिए स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने वाले तत्वों को और अधिक शामिल करने की योजना है।
इस साल 11 दिनों तक चले उत्सव ने साबित कर दिया है कि मैसूर दशहरा को और अधिक दिनों तक सफलतापूर्वक आयोजित किया जा सकता है, जिससे राज्य के पर्यटन और राजस्व को और बढ़ावा मिलेगा। यह दशहरा उत्सव समापन एक सीख भी देकर गया है कि सफलता के साथ बेहतर व्यवस्था की ज़िम्मेदारी भी आती है।



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