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भारत-ब्राज़ील व्यापार विस्तार,  “20 अरब डॉलर लक्ष्य ” और डिजिटल सहयोग

20 अरब डॉलर लक्ष्य

भारत और ब्राज़ील ने अपने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कमर कस ली है। दोनों देश मर्कोसुर ढांचे के तहत अपने अधिमान्य व्यापार समझौते (PTA) को व्यापक बनाने की योजना बना रहे हैं। यह कदम 2030 तक 20 अरब डॉलर लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को साधने की दिशा में उठाया जा रहा है, जो 2024 में 12 अरब डॉलर था।

इसके साथ ही, दोनों राष्ट्र नए डिजिटल सहयोग पर भी नज़र रख रहे हैं, जो भविष्य की हरित और डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देगा।

भारत और लैटिन अमेरिकी समूह मर्कोसुर (जिसमें अर्जेंटीना, ब्राज़ील, उरुग्वे और पैराग्वे सदस्य हैं) के बीच वर्तमान में एक सीमित व्यापार समझौता है। जुलाई में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अर्जेंटीना और ब्राज़ील यात्रा के दौरान इस मौजूदा सीमित व्यापार समझौते के विस्तार पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई थी।

मर्कोसुर के साथ व्यापारिक साझेदारी को मिलेगी नई धार

16 अक्टूबर, 2025 को नई दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में, ब्राज़ील के उपराष्ट्रपति और विकास, उद्योग, व्यापार एवं सेवा मंत्री गेराल्डो अल्कमिन और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और मर्कोसुर के सदस्य देशों द्वारा अपने मौजूदा PTA को और मज़बूत करने में गहरी रुचि का स्वागत किया।

वाणिज्य विभाग ने गुरुवार को एक बयान में यह जानकारी दी, जिसमें कहा गया कि इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना है।

ब्राज़ीलियाई पक्ष ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह अपने मर्कोसुर भागीदारों के साथ मिलकर ‘समझौते को पर्याप्त, त्वरित और पारस्परिक रूप से लाभकारी रूप से मज़बूत’ बनाने की दिशा में समन्वित रूप से काम करेगा। यह सहयोग दोनों देशों के बीच व्यापार प्रवाह को विस्तारित करने के लिए PTA को व्यापक बनाने की साझा इच्छा को दर्शाता है।

PTA का इतिहास और द्विपक्षीय व्यापार की वर्तमान स्थिति

भारत-मर्कोसुर पीटीए पर जनवरी 2004 में हस्ताक्षर किए गए थे, जो जून 2009 से प्रभावी हुआ। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने 10 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक टैरिफ रियायतें दी थीं। भारत ने 450 टैरिफ लाइनों पर रियायतें दीं, जबकि मर्कोसुर समूह ने 452 टैरिफ लाइनों पर रियायतें दीं।

PTA का मूल विचार टैरिफ को समाप्त करना या हटाना है, जो वस्तुओं की सीमित संख्या को कवर करता है और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की तुलना में कम व्यापक होता है।

ब्राज़ील के उपराष्ट्रपति अल्कमिन ने ‘भारत-ब्राज़ील व्यापार वार्ता’ में कहा कि “इस वर्ष भारत से ब्राज़ील को निर्यात 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है और ब्राज़ील से निर्यात भी बढ़ रहा है।

हम 2030 तक 20 अरब डॉलर लक्ष्य विदेशी व्यापार को पार कर लेंगे।” उन्होंने ज़ोर दिया कि दोनों देश प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।

अल्कमिन ने बताया कि ब्राज़ील भारतीय निवेश के लिए अपने दरवाजे खोल रहा है, जिससे दोनों देश मिलकर अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बदल सकते हैं और भविष्य के लिए एक मजबूत ब्राज़ील-भारत गठबंधन बना सकते हैं।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी ब्राज़ील के साथ PTA को वर्तमान स्तर से आगे बढ़ाने पर चर्चा की, ताकि भारत भविष्य में दक्षिण अमेरिकी बाजार में बड़े पैमाने पर प्रवेश कर सके।

गोयल ने संवाददाताओं से कहा कि यह बैठक ब्राज़ील के दौरे पर आए प्रतिनिधिमंडल के साथ “एक बहुत अच्छी बातचीत और चर्चा” रही, और शीर्ष नेतृत्व की भागीदारी “भारतीय विकास की कहानी में बढ़ती रुचि” को दर्शाती है।

निवेश और डिजिटल नवाचार के नए क्षितिज

उपराष्ट्रपति अल्कमिन ने भारतीय कंपनियों को ब्राज़ीलियाई क्षेत्रों जैसे ऑटोमोटिव, आईटी, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, एयरोस्पेस, कृषि, सेमीकंडक्टर और डिजिटल नवाचार में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने यह भी घोषणा की कि दोनों देश एआई, उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग और तकनीकी स्टार्ट-अप की दिशा में ब्राज़ील-भारत डिजिटल साझेदारी शुरू करने के लिए तैयार हैं।

यह डिजिटल साझेदारी नई हरित और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रेरक शक्ति बनेगी, जिससे अधिक रोज़गार और तकनीकी संप्रभुता का सृजन होगा।

अल्कमिन ने आगे कहा कि ब्राज़ील भारत को निर्यात और निवेश विविधीकरण के लिए एक प्राथमिकता वाला साझेदार मानता है। उन्होंने बताया कि निवेश सुविधा समझौते और दोहरे कराधान से बचने के उपायों पर चल रहा सहयोग एक ज़्यादा विश्वसनीय और सुरक्षित कारोबारी माहौल तैयार करेगा।

दोनों पक्ष कनेक्टिविटी बढ़ाने और यात्रा को आसान बनाने के लिए ई-वीज़ा प्रणाली पर भी काम कर रहे हैं।

भारत की विकास गाथा के तीन मजबूत स्तंभ

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने व्यापार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विकास गाथा को तीन मजबूत स्तंभों पर टिका बताया:

मज़बूत व्यापक आर्थिक बुनियाद: सरकार ने कम मुद्रास्फीति बनाए रखी है, निरंतर विकास सुनिश्चित किया है, बैंकिंग प्रणाली को मज़बूत किया है और दुनिया के शीर्ष पाँच विदेशी मुद्रा भंडारों में से एक (लगभग 700 अरब डॉलर) बनाया है। ये बुनियादें देश को महत्वाकांक्षी विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने और अपनी विकास यात्रा को गति देने के लिए आधार प्रदान करती हैं।

नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की खुदरा मुद्रास्फीति दर सितंबर 2025 में गिरकर 1.54% हो गई, जो आठ साल का निचला स्तर है। 2025-26 की अप्रैल-जून तिमाही में इसकी वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर पाँच तिमाहियों के उच्चतम स्तर 7.8% पर पहुँच गई। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत के विकास अनुमान को 0.2 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 6.6% कर दिया है।

गोयल ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत पिछले चार वर्षों से दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और वह कम से कम अगले दो दशकों तक इस गति को जारी रखेगा।आधुनिक बुनियादी ढाँचा: यह पूरे भारत में “प्रतिस्पर्धा की नींव और समान विकास का वाहक” है।

बुनियादी ढाँचे में निवेश कनेक्टिविटी में सुधार करता है, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करता है और व्यवसायों का विस्तार करने तथा रोज़गार सृजन करने की भारत की क्षमता को मज़बूत करता है।

बेहतर जीवन स्तर: सरकार ने मध्यम वर्ग पर आयकर का बोझ कम किया है और व्यावसायिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली को सरल बनाया है। 22 सितंबर को जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने से कर दरों में उल्लेखनीय कमी आई है।

    गरीबी उन्मूलन और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में योगदान

    गोयल ने आईएमएफ प्रमुख की टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले 12 वर्षों में, 25 करोड़ भारतीयों को गरीबी से बाहर निकाला गया है, जिससे एक मजबूत और आकांक्षी मध्यम वर्ग का निर्माण हुआ है जो अब देश की खपत और विकास की कहानी को गति दे रहा है।

    उन्होंने कहा कि भारत की कल्याणकारी और बुनियादी ढाँचागत पहलें एक समावेशी, टिकाऊ और लचीली अर्थव्यवस्था बनाने के लिए मिलकर काम कर रही हैं। इन प्रयासों ने निवेशकों का विश्वास मजबूत किया है, और भारत निकट भविष्य में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, जिसका लक्ष्य 2047 तक 30-35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है।

    विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर, गोयल ने भारत और ब्राज़ील की साझा कृषि शक्तियों पर प्रकाश डाला, जो “वैश्विक खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले दो प्रमुख कृषि उत्पादक देश” हैं। उन्होंने कहा कि यह संवाद कृषि-व्यवसाय और खाद्य प्रसंस्करण में अधिक सहयोग को बढ़ावा देगा।

    संबंध “कार्निवल की तरह रंगीन और फ़ुटबॉल की तरह जोशीले”

    गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हवाला देते हुए कहा कि भारत-ब्राज़ील संबंध कार्निवल की तरह रंगीन और फ़ुटबॉल की तरह जोशीले” होने चाहिए। उन्होंने ब्राज़ील की स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों में योग और आयुर्वेद को शामिल करने के लिए उसकी सराहना की।

    गोयल ने यह भी कहा कि “हमारी दोस्ती अन्य कारकों से निर्धारित नहीं होती है,” अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी के मद्देनजर संबंधों के अधिक रणनीतिक होने के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि इससे कोई फर्क पड़ता है।”

    वित्त वर्ष 2025 में, भारत ने ब्राज़ील के साथ अपना व्यापार अधिशेष बनाए रखा, जिसमें 6.77 बिलियन डॉलर का निर्यात और 5.42 बिलियन डॉलर का आयात था, जिससे कुल द्विपक्षीय व्यापार 12.19 बिलियन डॉलर हो गया। हालाँकि, वित्त वर्ष 2023 से समग्र द्विपक्षीय व्यापार में कमी आई है।

    गोयल ने ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुईज़ इनासियो लूला दा सिल्वा के कथन का भी हवाला दिया: “पेड़ लगाए बिना कोई भी फल नहीं काट सकता।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत ने दीर्घकालिक विकास और साझेदारी के बीज बोए हैं, और भारत और ब्राज़ील की मित्रता दोनों देशों के लिए स्थायी समृद्धि का स्रोत बनेगी और उन्हें उनके 20 अरब डॉलर लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करेगी।

    भारत सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के लिए 20 अरब डॉलर लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य देश के निर्यात और विनिर्माण क्षेत्र को नई ऊर्जा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    यह लक्ष्य मुख्य रूप से इंजीनियरिंग, फार्मा और टेक्सटाइल सेक्टर पर केंद्रित रहेगा।विदेश व्यापार नीति में संशोधन के साथ नए निर्यात प्रोत्साहन भी लागू किए गए हैं।

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