‘उत्पीड़न उनके लिए सबक’ – इंदौर छेड़छाड़ पर मंत्री विजयवर्गीय का बयान
मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में दो ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटरों से छेड़छाड़ की घटना पर जो बयान दिया है, उसने देश भर में नया आक्रोश पैदा कर दिया है। आरोपी की गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद, मंत्री विजयवर्गीय ने 26 अक्टूबर को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ‘उत्पीड़न उनके लिए सबक’ है। उन्होंने यह कहकर विवाद को जन्म दिया कि खिलाड़ियों को अपनी सुरक्षा के प्रति और अधिक सावधान रहना चाहिए था। आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप में भाग ले रही दो ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटरों का कथित तौर पर 23 अक्टूबर को एक मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति ने पीछा किया और उनमें से एक के साथ छेड़छाड़ की थी।
सुरक्षा में चूक या खिलाड़ियों की ‘गलती’? मंत्री के बयान पर बवाल
मंत्री विजयवर्गीय ने अपने बयान में सुरक्षा में चूक की बात तो मानी, लेकिन साथ ही खिलाड़ियों पर भी दोष मढ़ दिया। उन्होंने कहा, “देखिए, सुरक्षा में चूक हुई है। लेकिन खिलाड़ी बिना किसी को बताए अचानक वहाँ से चले गए; उन्होंने अपने कोच को भी नहीं बताया। यह उनकी तरफ से भी एक गलती है… उन्हें ज़्यादा सावधान रहना चाहिए था।” उन्होंने कहा, “जब भी कोई खिलाड़ी कहीं जाता है, यहाँ तक कि हम भी, तो हम कम से कम एक स्थानीय व्यक्ति को ज़रूर सूचित करते हैं।” मंत्री ने जोर देकर कहा कि इस घटना से खिलाड़ियों को याद दिलाया जाएगा कि “भविष्य में अगर हम अपने स्टेडियम से बाहर जाएँ, तो हमें पहले अपनी सुरक्षा व्यवस्था या स्थानीय प्रशासन को सूचित करना चाहिए, क्योंकि क्रिकेट खिलाड़ियों का बहुत बड़ा क्रेज है।”
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लोकप्रियता का एहसास और ‘सबके लिए सबक’
विजयवर्गीय यहीं नहीं रुके। उन्होंने अपनी लोकप्रियता के प्रति खिलाड़ियों को सचेत करते हुए एक अजीबोगरीब दलील दी। उन्होंने कहा कि “कभी-कभी खिलाड़ियों को अपनी लोकप्रियता का एहसास नहीं होता। खिलाड़ी बहुत लोकप्रिय होते हैं, इसलिए उन्हें सावधान रहना चाहिए।” मंत्री ने जोर देकर कहा, “यह घटना घटी है; यह सभी के लिए एक सबक है। यह हमारे लिए और खिलाड़ियों के लिए भी एक सबक है।” अपने तर्क को पुष्ट करने के लिए, उन्होंने एक पुरानी घटना का भी ज़िक्र किया, जहाँ कुछ उन्मादी प्रशंसकों ने एक प्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ी के कपड़े फाड़ दिए थे। उन्होंने बताया, “कोई एक प्रसिद्ध खिलाड़ी से ऑटोग्राफ माँग रहा था। एक लड़की ने उसे चूमा और उसके कपड़े फट गए।” यह बयान एक बार फिर इस बात पर ज़ोर देता है कि उत्पीड़न ‘उनके लिए सबक’ है और खिलाड़ियों को अपनी सुरक्षा खुद सुनिश्चित करनी चाहिए।
कानूनी कार्रवाई और आरोपी का आपराधिक इतिहास
उत्पीड़न की घटना के बाद, दोनों खिलाड़ियों ने M.I.G पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74 (महिला का शील भंग करने के लिए आपराधिक बल का प्रयोग) और 78 (पीछा करना) के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। एक पुलिस गश्ती दल ने खिलाड़ियों को उनके होटल तक पहुँचाया और स्थानीय अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई के बाद आरोपी अकील शेख को अगले ही दिन गिरफ्तार कर लिया गया। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने पुष्टि की कि आरोपी अकील शेख का आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस के अनुसार, 2017 में वह डकैती के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद तीन साल की जेल की सज़ा भी काट रहा था। उसका 2018 में आबकारी अधिनियम और 2022 में मारिजुआना पीते पकड़े जाने का भी मामला है। 2023 में हत्या के प्रयास और 2024 में हिंसक डकैतियों के मामले भी उस पर दर्ज हैं।
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विपक्षी दलों और कार्यकर्ताओं का तीखा हमला
विजयवर्गीय की टिप्पणी पर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण यादव ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण और बेहद घृणित” बताया, और कहा कि “यह घटना राज्य की अपने मेहमानों की सुरक्षा में विफलता को उजागर करती है। कैलाश जी की टिप्पणी एक परेशान करने वाली मानसिकता को दर्शाती है।”
मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख जीतू पटवारी और नेता मुमताज पटेल ने भी इसकी आलोचना करते हुए इसे मध्य प्रदेश पर एक “धब्बा” बताया।
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने भी मंत्री के बयान को “सरकार की दयनीय मानसिकता” का प्रतिबिंब बताया और कहा कि यह भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को कम करता है।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने मंत्री के इस बयान को “पीड़ितों पर दोषारोपण, महिलाओं के आंदोलनों पर पुलिसिया नियंत्रण और पुरुषों के आपराधिक व्यवहार को तर्कसंगत ठहराना” करार दिया।
बीसीसीआई और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की प्रतिक्रिया
इस गंभीर घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सचिव देवजीत सैकिया ने एक बयान जारी कर खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “हम मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा आरोपियों को पकड़ने में की गई त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की सराहना करते हैं। न्याय सुनिश्चित करने के लिए कानून अपना काम करेगा।” बीसीसीआई ने भविष्य में खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने और उन्हें और मज़बूत करने का वादा किया है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने भी पुष्टि की है कि टीम की सुरक्षा एजेंसियों ने पुलिस को मामले की सूचना दी थी और स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने मामले को अपने हाथ में ले लिया है। इस बीच, खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम को नवी मुंबई में पुलिस एस्कॉर्ट प्रदान किया गया है, जहाँ वे अगले चरण के लिए ठहरी हैं।
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विजयवर्गीय की विवादास्पद पूर्व टिप्पणियाँ
यह पहली बार नहीं है जब कैलाश विजयवर्गीय ने महिलाओं के बारे में विवादास्पद बयान देकर सुर्खियाँ बटोरी हैं। उनके पिछले बयानों की भी काफी आलोचना हुई है। उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर टिप्पणी करते हुए कहा था, “आजकल हमारे विपक्षी नेता ऐसे हैं कि बीच चौराहे पर अपनी छोटी बहनों को चूम लेते हैं… यह संस्कारों की कमी है। ये विदेशी संस्कार हैं।” जून में इंदौर में एक जनसभा के दौरान, उन्होंने लैंगिक भेदभाव वाली टिप्पणी करते हुए कहा था, “मुझे कम कपड़े पहनने वाली लड़कियाँ पसंद नहीं हैं… कभी-कभी लड़कियाँ मेरे साथ सेल्फी लेने आती हैं। मैं उनसे कहता हूँ, ‘बेटा, अगली बार ढंग के कपड़े पहनकर आना, फिर हम फोटो खिंचवाएंगे’।” 2022 में, उन्होंने यहाँ तक कहा था कि आजकल लड़कियाँ “शूर्पणखा जैसी दिखती हैं”, क्योंकि वे ‘गंदे कपड़े’ पहनती हैं, जो एक बार फिर यह साबित करता है कि मंत्री के लिए उत्पीड़न ‘उनके लिए सबक’ से जुड़ा यह बयान कोई नया नहीं है।
सुरक्षा और लैंगिक हिंसा पर नई बहस
इस घटना ने एक बार फिर भारत में खिलाड़ियों की सुरक्षा और लैंगिक हिंसा को लेकर बहस को हवा दे दी है। जहाँ 2022 में औसतन प्रतिदिन लगभग 90 बलात्कार की घटनाएँ दर्ज की गईं, वहाँ आलोचकों का तर्क है कि छिटपुट गिरफ्तारियों के अलावा, गहन संरचनात्मक सुधारों और सांस्कृतिक बदलावों की आवश्यकता है। महिला विश्व कप के जारी रहने के साथ, यह घटना न केवल खिलाड़ियों की सुरक्षा पर, बल्कि इस बात पर भी ध्यान केंद्रित करती है कि मेज़बान देश अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों की सुरक्षा और सम्मान को कितनी गंभीरता से लेते हैं, और जब इन मानकों का उल्लंघन होता है तो सरकारी अधिकारी किस प्रकार प्रतिक्रिया देते हैं।



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